कविता
वरिष्ठ कवि। कविता संग्रह ‘चीख सकते तो पहले पेड़ चीखते’ तथा शहरनामा ‘एक शहर मेरे आस-पास’। ‘आरोह’ साहित्यिक पत्रिका का संपादन। घर लौटते हुए कितने समय तकरोक कर रख सकते हो मुझे! रात चाहती हैबिफोर टाइम झपट्टा मार देगांव की ललचाती शाम पर पर जब तकआखिरी आदमी की...
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