कविता
युवा कवयित्री। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। अपनी-अपनी दुनिया आजकल सोचता हूँघर के बारे में उस घर के बारे मेंजहां लोग साथ-साथ रहते हैंसबके अपने-अपने कमरे हैंअपनी-अपनी दुनिया है एक मकान के अंदरकई दुनिया बसती है एक-दूसरे से बेख़बरये लोगजीते हैं...
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