कविता
युवा कवि। म. ज्यो. फु. रूहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली में शोधार्थी। दूर वट की छांव से इस तरह स्वच्छंदबालाएं हुई हैंपायलें भी छिन गई हैंपांव से! आ, नगर की धड़कनों मेंखो गई हैंबादलों की पीठ परनव बीज बोनेरोलरों से देह-अंकुरको बचाकरचाहती हैं दुधमुंहेसपने...
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