कविता
वरिष्ठ कवि।हाल की कविता संग्रह,‘कलम का दिहाड़ी मजदूर’, आलोचना की पुस्तक ‘दलित साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’। प्रकृति जब हमारे पासकुछ भी नहीं था तब भीहम जीवित थेसांस थी हमारीधड़कनें थींभूख थी हमारे पासनींद थीइच्छाएं थींहमारे भीतर जोकिसी चिड़िया की तरहफुदकती...
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