कविता
युवा लेखिका।कविता संग्रह- ‘लड़की कैक्टस थी’, ‘मैं किसी कालिदास की मल्लिका नहीं’। प्रेम के लौटने पर देह और मन में इतनी टूटन रहीकि दोनों की पीर मिलाकरबटी जा सकती थी एक रस्सीऔर चढ़ी जा सकती थी उससे फांसीपर मैंने उसे ठीक वैसे ही रोपा इस तन मेंजैसे रोपे जाते...
Recent Comments