योगेंद्र पांडेय

योगेंद्र पांडेय

    युवा कवि। विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। संप्रति अध्यापन। परित्यक्त मकान उस परित्यक्त मकान में कैद हैंहजारों सपनेकैद होकर रह गई हैंबच्चों की किलकारियांपिछले कई वर्षों से उस परित्यक्त मकान परअब उग आए हैं घासकिसी की यादों की काईपसर गई है दीवार पर...