कविता
युवा कवि।मर्चेंट नेवी में कार्यरत। शीतयुद्ध लपटों के बादजल कर राख हो गईठंडी चीजों की भस्मबैठ जाती है नागरिकों के हृदय मेंबारूद की गंध ठंडी होकर जम जाती है स्मृतियों मेंग्रीष्म, शरद, वसंतएक-एक कर बीत जाती हैं ॠतुएंबस स्मृति नहीं बीततीबीत गए युद्ध की चीखों की। नदी पार...
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