वरिष्ठ कवि और लेखकपत्रकार। दो उपन्यास, तीन कहानी संग्रह और दस कविता संग्रह प्रकाशित।

ख़ुशी

वह बेईमान था
मैं उसे खुश रखना चाहता था
सो मैंने उसे बेईमानी करने दी
और खुद भी खुश रहा।

जुगनू

मेरी आंखों में
आशाओं के कुछ जुगनू हैं
झिलमिल आंसू
और टूटे हुए कई ख़्वाब
तुम अपने हीरे बचा कर रखना
उपलब्धियों के
फीके पड़ जाएंगे।

कवि का पुनर्जन्म

कवि बार-बार जन्म लेता है
अपनी हर नई रचना के साथ
और बार-बार मरता है
जब भी करता है जीने की कोशिश

और एक दिन जब वह मर जाता है
भौतिक रूप से
जी उठता है मुकम्मल
अपनी सारी तृष्णाओं के साथ
जीवन के उत्सव में शामिल हो जाता है
वितृष्णाओं के बावजूद।

कविता और शब्द

देह तक पहुंचकर
प्रेम का वह अर्थ नहीं रह जाता जो पहले था
जीवन का वही अर्थ नहीं रहता
चिता तक पहुंचकर
कविता तक पहुंचकर
बदल जाते हैं आशय शब्दों के।

बच्चे

आजकल बच्चे मोबाइल फोन से खेलते हैं
क्योंकि हमने उनसे बात करना छोड़ दिया है

आजकल बच्चे
बैंक के एटीएम कार्ड से खेलते हैं
पैसे उगलने वाली इस चमत्कारी शै ने
खो दी है
उसी तरह अपनी संवेदनशीलता
जिस तरह हमने

आजकल बच्चे
हर उस चीज से खेलते हैं
जिनसे किसी को नहीं खेलना चाहिए

बच्चे ऐसा क्यों करते हैं
क्योंकि हमने बच्चों से खेलना छोड़ दिया है।

झगड़े

मेरे उससे
और झगड़े हुए होते
यदि उसने एक-एक झगड़े को
काफी लंबा न खींचा होता।

दशहरा

ज्ञान के अहंकार में छुपा है रावण
छुपा है योग्यता के बावजूद प्रमाद में
नैतिकताओं को तिलांजलि देने में छुपा है
छुपा है छिपी हुई लालसाओं में
प्रतिशोध में छिपा है
छिपा है उपहास की प्रवृत्ति में
खोजो खोजो
कि वह तुम्हारे भीतर है, जैसे मेरे भीतर भी
वह जलाने से नहीं जलेगा
अग्नि से नहीं
प्रकाश से होगा उसका विनाश।

सामर्थ्य

मेरे दुश्मन मजबूत थे
मैं उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता
मेरे दोस्त चालाक हैं
मैं उनका भी
कुछ नहीं बिगाड़ पाता
सब कहते हैं
मेरा जीवन व्यर्थ गया
मैं कभी भी किसी का
कुछ नहीं बिगाड़ पाया।

संवेदना

पिता ने संतान से अपने अस्तित्व को जोड़ा
और संतान ने
अंततः पिता के व्यक्तित्व को चुपचाप तोड़ा
बेहद निष्ठुर होता है
संवेदना का हथौड़ा।

स्त्री के भीतर

एक स्त्री के भीतर होते हैं
कितने ही बांध
कई-कई पुल
कई-कई नौकाएं
सभ्यताओं और संस्कृतियों की
कितने ही महाकाव्य रचे गए स्त्री पर
फिर भी बची रह गई हैं
उसकी लालसाएं और स्वप्न
व्यक्त होने से!