कवि और अधिवक्ता। अद्यतन कविता संग्रह यही दुनिया है

 

किसान

मौसम कोई भी हो
वह किसानों के
अनुकूल नहीं होता

जिन इलाकों में
बाढ़ आने की आशंका रही
किसानों ने आशंका के बीच
फसलें बोईं

बाढ़ आई
और फसलें बहाकर
अपने साथ लेकर
चली गई

बाढ़ के दौरान
किसान बाढ़ जाने के लिए
प्रतीक्षातुर रहे
और बाढ़ोपरांत फसलें बोने की
संभावनाएं विचारते रहे

बाढ़ गई
किसानों ने फिर से फसलें बोईं

उन इलाकों में
जहां बाढ़ नहीं आई
कहीं अतिवृष्टि ने फसलें बर्बाद कीं
तो कहीं अनावृष्टि की वजह से
फसलें मुआर काटनी पड़ी

पर हर बार
किसानों ने फसलें बोईं
हार नहीं मानी

फसलें उगाने वाले लोग
मौसम से उम्मीद नहीं करते
वे सिर्फ

जोतना और बोना जानते हैं
जोतना और बोना
सिर्फ फसलें उगाना नहीं है
वह
मौसम के खिलाफ खड़े होने की जिद है

जब तक दुनिया में जिद बाकी है
फसलें उगाने की उम्मीद काफी है

हम किसान हैं
फसलें उगाने वाले लोग हैं
पूरी जिद के साथ कह रहे हैं
हम जोतेंगे, बोएंगे फसलें उगाएंगे।

संपर्क : अधिवक्ता, जिला न्यायालय बलिया, पिन277001 (.प्र.) मो.7398159483