लेखक, भाषाविद और अनुवादक।

अमेरिकी कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता। मुख्यतः शोषण, नस्लवाद, स्त्री विमर्श, हाशिए के लोगों पर केंद्रित रचनाएं। ‘द वन फॉर हूम फूड इज नॉट इनफ’ प्रसिद्ध रचना। राष्ट्रीय युवा कवयित्री के रूप में चयन। 2021 में बाइडेन के राष्ट्रपति पद के शपथ समारोह में इस उद्बोधन कविता का पाठ कर अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की।

जब बुरा दिन आता है हम खुद से पूछते हैं
इस अंतहीन अंधेरे में
हमें रोशनी कहां मिलेगी
जो भयंकर हानि हमने उठाई है
उसकी भरपाई हमें करनी पड़ेगी

अंतत: हमने राक्षस के पेट से
स्वयं को बचाया है
हमने सीखा है
मौन हमेशा
नहीं होता शांति का प्रतीक
निर्धारित मान्यताएं और धारणाएं
नहीं होतीं हमेशा सटीक न्यायपूर्ण
पर अब अगली सुबह हमारी है

भले था अज्ञात
पर हमने किसी तरह उसे कर दिखाया है
हमने संकटों को सहा है और महसूस किया है
देश बिखरा जरूर पर पूरी तरह टूटा नहीं है

हम उस देश और काल के उत्तराधिकारी हैं
जहां गुलामों की वंश-परंपरा में जन्मी
अकेली मां द्वारा पालित एक अश्वेत लड़की
देखती है सपना राष्ट्रपति बनने का
वह शपथ लेती है उस महिमामय पद की

और हां, हम नहीं हैं संस्कारित न आदिम
पर इसका यह अर्थ नहीं कि
हम कर रहे हैं कोशिश एक ऐसा संघ बनाने की
जो अपने आपमें हो पूर्ण
बल्कि हम कोशिश कर रहे हैं गढ़ने का एक देश
जिसका हो एक उद्देश्य
सभी संस्कृतियों, रंगों, विशेषताओं और
मानवीय दशाओं के प्रति दायित्वबोध से युक्त
इसीलिए हमारी नजरें उन चीजों पर नहीं हैं
जो हम दोनों के बीच समझौते से बनी हैं
बल्कि उन समस्याओं पर हैं जो हमारे सामने खड़ी हैं

हम मिटाते हैं विभेद क्योंकि हम जानते हैं
यदि भविष्य को रखना है सामने
तो हमें खत्म करने होंगे अपने मतभेद
हमें डालने होंगे अपने हथियार
ताकि हम फैला सकें अपने हाथ
चल सकें दूसरों को लेकर
किसी की हानि नहीं
सबके प्रति सद्भावना के साथ रहने के लिए

पूरी दुनिया करे कम से कम इस सच को स्वीकार
कि कष्ट झेल कर भी हम आगे बढ़े हैं
दुखों की घड़ी में भी हमने आशाएं पाली हैं
थके हैं पर हमारी कोशिशें जारी हैं

हम सदा रहेंगे एकजुट विजयी बनकर
इसलिए नहीं कि हम फिर नहीं देखेंगे पराजय
बल्कि इसलिए कि फिर नहीं तोड़ेंगे देश
बंटवारे के बीज बोकर

शास्त्र कहता है कि हम कल्पना करें
सभी बैठें अपने अंगूर और अंजीर के पेड़ तले
और कोई उनको डराता नहीं हो

यदि हम चाहते हैं हमारे अच्छे दिन आएं
तो विजय तलवारों से नहीं
उन पुलों से होगी जिन्हें हमने बनाया है
एक दूसरे तक पहुंचने के लिए
क्योंकि यही संकल्प हमें बीहड़ों में रास्ता देगा
पहाड़ों पर चढ़ने का हौसला

यदि हम कर सकें साहस भरा फैसला
इसलिए कि अमेरिकी होना महज गर्व की नहीं
हमारी विरासत की पहचान है

अतीत गवाह है हमारे उन कदमों का
जब बिखरे देश को फिर-फिर हमने सिरजा है
हमने देखी हैं वे ताकतें जो हमारे देश को
जोड़ने की जगह तोड़ने में लगी थीं
लोकतंत्र के आने में देरी होती तो
यह देश नष्ट हो जाता

पर हमारा प्रयास सफल रहा
कभी-कभी लोकतंत्र के आने में देर हो सकती है
पर उसे सदा के लिए हराया नहीं जा सकता
इस सचाई में
इस आत्मविश्वास में
हमारा बड़ा भरोसा है

यद्यपि हमारी नजरें भविष्य पर टिकी हैं
पर इतिहास की नजरें हम पर हैं

यह मुक्ति का युग है
पर प्रारंभ में हमें बहुत था भय
हमें लगता था हम नहीं हैं तैयार
झेल नहीं पाएंगे उन भयावह क्षणों के वार
पर उसके भीतर से ही हमने शक्ति जुटाई थी
एक नया अध्याय लिखने की ताकत पाई थी
हमने अपने जीवन में
मुस्कराहटें और उम्मीदें जगाई थीं
इसलिए एक समय था
जब हमने पूछा था खुद से
कैसे पार पाएंगे इस विनाशकारी पल से
पर अब हम जोर से कह सकते हैं
कोई महाविपत्ति कैसे जीत पाएगी हमसे

लौटेंगे नहीं हम फिर पिछली स्थितियों में
पहुंचेंगे वहां जहां हमें होना चाहिए
यह देश चोटिल हुआ है, खत्म नहीं
दयालु है पर साहस से भरा है
अपनी प्रबलता और स्वतंत्रता के साथ खड़ा है
डरा कर हमें कोई झुका नहीं पाएगा
हमारे जीवन में बाधा नहीं पहुंचा पाएगा
क्योंकि हम जानते हैं हमारी निष्क्रियता और जड़ता
भावी पीढ़ी को विरासत के रूप में मिलेगी
और हमारी भयंकर भूलें उनके लिए बोझ बन जाएंगी

एक बात निश्चित है
यदि ताकत के साथ करुणा हो
और अधिकार के साथ ताकत
तो प्रेम हमारा उत्तराधिकारी बनेगा
हमारे बच्चों के जन्मसिद्ध अधिकार स्थापित करेगा
अत: आओ हम अपने पीछे एक ऐसा देश छोड़ें
जो उससे बेहतर हो जैसा हमें मिला है

मेरी कांपती हुई छाती से निकली हर सांस
इस जख्मी दुनिया को अनोखी दुनिया में बदलेगी
हम उठ खड़े होंगे पश्चिम की सुनहली पहाड़ियों से
हम उठ खड़े होंगे झंझावातों से जर्जर उत्तरपूर्व से
जहाँ हमारे पूर्वजों ने किया था
क्रांति का प्रथम शंखनाद
हम उठ खड़े होंगे मध्य-पश्चिमी राज्यों के
झील-घिरे शहरों से
हम उठ खड़े होंगे सूर्यतप्त दक्षिण से
हम पुनर्निर्माण करेंगे मित्र बनाएंगे
और खुद को बचाएंगे
और हमारे राष्ट्र के हर नुक्कड़ पर और हर कोने में
जो हमारा देश कहलाता है
वहाँ से विविध तरह के सुंदर लोग निकल आएंगे
थके-हारे पर खूबसूरत

जब अच्छे दिन आते हैं
हम अंधेरे से बाहर निकल आते हैं
तेज से भरे हुए भय से मुक्त
नया सबेरा खिलता है जब हम उन्मुक्त आगे बढ़ते हैं
चारों ओर हमेशा फैली होती है रोशनी
यदि हममें उसे देखने का पर्याप्त साहस हो
और हो पर्याप्त माद्दा!

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