वरिष्ठ गीतकार।अद्यतन पुस्तक ‘सपने मरने के लिए आते हैं नींद में’।


आगे जरा देख कर जाना
पुल टूटा है
मोड़ बहुत हैं आगे
ऊबड़-खाबड़
नई व्यवस्था वाले
पांव तुम्हारे
कुछ पतले हैं
चमरौंधां में फूटे छाले
गड्ढों में सड़कों का आना
कब छूटा है
देश कांपता हुआ पुलों-सा
रस्ते कटे हुए
पानी से
अल्सर पाले हुए व्यवस्था
कतराती
छप्पर-छानी से
साइत वाला घड़ा पुराना
अब फूटा है।

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