युवा कवयित्री। कविता संग्रह ‘ओ रंगरेज’, ‘वर्जित इच्छाओं की सड़क’ और आंचलिक विवाह गीतों का संकलन ‘मड़वा की छांव में’ प्रकाशित। संप्रति : स्वतंत्र लेखन।

दो कविताएं

1.
उनकी इंद्रियां सक्रिय हो उठती हैं
जब वे किसी औरत को
अकेली यात्रा करते हुए देखते हैं
जब वे देखते हैं
बिना पुरुष के अकेली स्त्री को

उनको लगता है कि स्त्री के साथ
संभावनाओं की सतत यात्रा की जा सकती है
जीवन की तमाम इच्छाओं को

बिना किसी प्रश्न के साथ जीती स्त्रियों पर
वे खड़े करते हैं सवाल
जींस पहनने पर
अकेले जाने पर

सुंदर दिखने पर
वे आश्चर्य करते हैं
जब हमें देखते हैं
किसी रहनुमा के बिना।

2.
अनेक बार खारिज कर दी जाती हैं
हमारी प्रार्थनाएं
अनेक बार हम वहीं खड़े रह जाते हैं
जबकि बाकी लोग आगे बढ़ चुके होते हैं
हमें छोड़कर

इस बीच गुजर चुकी होती हैं
तमाम ट्रेनें
तमाम बसें और हवाई जहाज

अंतरिक्ष में कितने सैटेलाइट घूम रहे हैं
और धरती पर
लगातार टपक रहे हैं फूल
हवाएं उतनी ही रफ्तार से चल रही हैं
जन्म लेते हैं पौधे, सूखते हैं पेड़

इस बीच कितनी चूड़ियां टूट चुकीं
कितनी बार होंठ
मुनीर नियाजी की गजलें दोहरा चुके

क्या मैं
इतना भी न चाहूं
कि जिससे मिलने का मन हो
उससे मिल सकूं!

संपर्क :सरस्वती विहार कॉलोनी, भरुहना, जिला–मीरजापुर-231001 (उत्तर प्रदेश)मो.9451185136