
वरिष्ठ गजलकार और लेखक। दो कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, दस गजल संग्रह और सात गजल केंद्रित आलोचना की पुस्तकें। संप्रति स्वतंत्र लेखन।

गजल
आंखों का मिलाना भी दुश्वार बना देंगे
सुनते हैं वो आंगन में दीवार बना देंगे
जागेंगे जगाएंगे सब ख़्वाब इन आँखों में
हम नींद के हमलों को बेकार बना देंगे
कमजोर न समझो तुम कमजोर नहीं हैं हम
सरकार गिरा देंगे सरकार बना देंगे
बरसात का मौसम है दर को न खुला रखिए
सावन के नए झोंके बीमार बना देंगे
वादों पे न जा उनके चालाक बहुत हैं वो
इकरार को इक पल में इनकार बना देंगे।
संपर्क : गुलज़ार पोखर, मुंगेर (बिहार)811201 मो. 7488542351
