अद्यतन कविता संग्रह एक ऐसी दुनिया की तलाश में।संप्रति शिक्षण संस्थान में कार्यरत।

रात में कौन लौटता है
थका हरा ड्राइवर
गमछी से पसीना पोंछता हुआ

ठीक आधी रात को
रोग लौट आता है
चुपके-चुपके

अधिकांश लोग
आधी रात में मरते हैं
रात को ही
कुत्ते रोते हैं बुक्का फाड़कर

घर का सदस्य लौटता है
ट्रेन से रात में
पत्नी और बाल बच्चों से मिलने

सैनिक मैदान से लौटते हैं
रात-रात भर
उनका लौटना नागरिक का लौटना होता है
जिनकी माएं सजाकर रखती हैं थाल में- दूब
हल्दी का टूसा, रोरी चंदन, फूल और अक्षत
घर में सोहर गीत झूमर सब गाती हैं
भोर होने तक

रात को सब नहीं लौटते
कायर भाग जाते हैं
देश छोड़कर अरब

कवि रात में लौटता है
कविता के साथ
गुलाब की पंखुड़ियों पर पैर रखते हुए
और प्रेमिका का
होंठों से चुंबन लेते हुए

लौटना ही है तो रात को लौटो
जब पंछी सो जाते हैं घोंसले में…!

दिन में लड़की लौटती है
चापाकल पर जल लेने
बाढ़ में!

संपर्क : मणि भवन, संकट मोचन नगर, आरा, भोजपुर८०२३०१ मो.९४३१६८५५८९