कितना वसंत है इस पतझर में : उपमा ऋचा

कितना वसंत है इस पतझर में : उपमा ऋचा

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती पर विशेष मल्टीमीडिया प्रस्तुति ‘वज्रादपि कठोर-मृदुनि कुसुमादपि’ निराला एक विराट समष्टि का नाम है। जीवन को कविता में और कविता को जीवन में उतारकर वंचितों और उपेक्षितों की वेदना, भूख, मान को अपनी आत्मा में महसूस करने वाला...
पतझर, वसंत और प्रेम की तीन कविताएं

पतझर, वसंत और प्रेम की तीन कविताएं

मालवा की गंध में रचे-बसे नरेश मेहता की जन्मशती के अवसर पर वागर्थ की मल्टी-मीडिया प्रस्तुति प्रत्येक नई अभिव्यक्ति को आरंभ में विरोध सहना होता है, लेकिन वर्चस्व वरेण्य बनकर ही रहता है। कल तक, आज की कविता उपेक्षिता थी, लेकिन आज स्वीकृता है। इसका एकमात्र कारण इस काव्य की...
संपादकीय जनवरी-फरवरी 2021 : इंडिया में किसान

संपादकीय जनवरी-फरवरी 2021 : इंडिया में किसान

शंभुनाथ ‘जेठ की चढ़ती दोपहरी में खेतों में काम करनेवाले भी अब गीत नहीं गाते हैं।… कुछ दिनों के बाद कोयल भी कूकना भूल जाएगी क्या?’ (रसप्रिया) ‘रखिए अपना पुरुख वचन, खूब सुन चुकी हूँ पुरुख वचन! चालीस साल से और किसका वचन सुन रही हूँ!’ (तीर्थोदक) ‘जाति बहुत बड़ी चीज...
झब्बू : उन्मेष कुमार सिन्हा

झब्बू : उन्मेष कुमार सिन्हा

युवा रचनाकार। एक आलोचना पुस्तक ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास और भारतीय राजनीति’। लोग उसे झब्बू कहते थे। दस-ग्यारह साल का रहा होगा। सुबह-सुबह ही वह छतरीवाले विशाल मकान के गेटमैन के पास पहुंच गया था। भूरे रंग की मैली शर्ट, देह की जामुनी रंगत से मिली हुई। दो बटन छोड़कर...
तकनीकी और प्राविधिक विकास की राह पर चलना होगा

तकनीकी और प्राविधिक विकास की राह पर चलना होगा

मत-मतांतर   देवसबोध भदंत : ‘वागर्थ’ के ऑनलाइन दिसंबर 2020 के अंक में बालकृष्ण काबरा ऐतेश द्वारा अनूदित लैंग्स्टन ह्यूज की कविता ‘फ्रीडम ट्रेन’ में अनोखा काव्य तत्व मौजूद है। नस्लवाद पर इतनी शालीनता से प्रत्यालोचना पहले दिखाई नहीं दी। बिर्ख खडका डुवर्सेली : कोरोना...