संपादकीय जनवरी 2022 : भविष्य की कविता

संपादकीय जनवरी 2022 : भविष्य की कविता

शंभुनाथ प्रेमचंद कवि नहीं थे, लेकिन उन्होंने कवि के बारे में जो लिखा है वह अनोखा है :‘जिसे संसार दुख कहता है, वह कवि के लिए सुख है।धन और ऐश्वर्य, रूप और बल, विद्या और बुद्धि- ये विभूतियां संसार को चाहे कितना ही मोहित कर लें, कवि के लिए यहां जरा भी आकर्षण नहीं है।उसके...
गौहर जान का जमाना : मनीष कुमार मिश्रा / उषा आलोक दुबे

गौहर जान का जमाना : मनीष कुमार मिश्रा / उषा आलोक दुबे

मलका-ए-तरन्नुम,शान-ए-कलकत्ता,निहायत मशहूर-ओ-मा’रूफ़ गायिका गौहर जान का जन्म 26 जून 1873 ई. में वर्तमान उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ। गौहर का जन्म एक क्रिश्चियन परिवार में हुआ था। उनके दादा अंग्रेज और दादी हिंदू थी। अकबर की एक अर्मेनियाई रानी मरियम जमानी बेगम थीं।...
असमिया कविताएं – अनुवाद : देवेंद्र कुमार देवेश / रूमी लश्कर बोरा

असमिया कविताएं – अनुवाद : देवेंद्र कुमार देवेश / रूमी लश्कर बोरा

हरेकृष्ण डेका जन्म : 1941।असमिया कवि, कथाकार और आलोचक।साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कथा पुरस्कार तथा असमिया साहित्यिक पुरस्कार (2010) सहित अनेक सम्मान प्राप्त।दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। किसका ईश्वर आपमें से किसी को यदिईश्वर का पता मिलेमुझे बतानाऔर मैं उसके पास...
चंद्रशेखर साकल्ले की कविताएं

चंद्रशेखर साकल्ले की कविताएं

वरिष्ठ कवि। एक कविता संग्रह प्रकाशित। प्रेम एक पौधा हैधीरे-धीरे पनपताएक आग हैधीमे-धीमे सुलगतीएक फूल हैधीरे-धीरे खिलताएक सुगंध हैधीरे-धीरे मदहोश करती।एक पुल हैफूलों से बनाप्रेम पथिक है।एक जगह है मुझमेंजिसमें तुम स्वीकारएक जगह है तुममेंजिसमें मैं स्वीकारखुशी की तरह।एक...
पतझड़ अभी औेर भी है : वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’

पतझड़ अभी औेर भी है : वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’

वरिष्ठ आदिवासी कथाकार और पत्रकार।अद्यतन कहानी संग्रह ‘अपना-अपना युद्ध’, उपन्यास ‘लौटते हुए’। दोपहर में बासी भात सनई और बोदी तियन के साथ खाने के बाद सुगनी अम्बा बगीचा आ गई थी।पतझड़ समाप्त होने को है, परंतु अभी भी सूखे पत्तों की कमी नहीं थी।पिछले साल घर के पिछवाड़े अरहर...