दिसंबर  अंक : वर्ष 28 II अंक 325

दिसंबर अंक : वर्ष 28 II अंक 325

अनुक्रम :: दिसंबर- 2022 पाठक निम्नलिखित में से किसी शीर्षक पर क्लिक करके रचना पाठ कर सकते हैं. संपादकीय- महान परंपरा और लघु परंपरा  कहानियां मुझ जैसी कोई -जयश्री रॉय दान-पुण्य -उर्मिला शिरीष स्टूल -रश्मि शर्मा बाज मर्तबा जिंदगी -प्रियंका ओम सिंगरीली -पार्वती तिर्की...
संपादकीय नवंबर-2022 : पश्चिमी नजर में धार्मिक भारत

संपादकीय नवंबर-2022 : पश्चिमी नजर में धार्मिक भारत

शंभुनाथ यह देखना रोचक होगा कि पश्चिमी बुद्धिजीवियों ने भारत को किस नजरिये से खोजा और इस देश को एक राजनीतिक ही नहीं, धार्मिक नक्शा भी दिया।उन्होंने भारत के बारे में यात्रा वृत्तांत लिखे थे, व्याख्यान दिए थे और चमकदार जिल्दों में अनगिनत रोचक पुस्तकें छपाई थीं।कभी ये...
दिन का उजाला : अरुण रंजन मिश्र, अनुवाद -शुभ्रजित सेन

दिन का उजाला : अरुण रंजन मिश्र, अनुवाद -शुभ्रजित सेन

अरुण रंजन मिश्र मुख्यतः संस्कृत समीक्षक के रूप में प्रतिष्ठित।ओड़िया में लंबे समय से कविकर्म, किंतु अपने इधर के तीन संस्कृत कविता संग्रहों के कारण चर्चित। बहते पानी जैसे लोगों के मुंह वहांकोई अघोरी कोटिशः जीवित नरमुंड फेंकता हैंसंपर्कों में वाड़वाग्नि जलता हैटूटी...
न जाने क्या चाहता हूँ मैं : रामकरण शर्मा, अनुवाद – प्रवीण पंड्या

न जाने क्या चाहता हूँ मैं : रामकरण शर्मा, अनुवाद – प्रवीण पंड्या

रामकरण शर्मा (१९२७ – २०१८) साहित्य अकादेमी, भारतीय भाषा परिषद, बिड़ला फाउंडेशन से पुरस्कृत।करीब १८ काव्यसंग्रह , 2उपन्यास प्रकाशित।समकालिक संस्कृत कविता के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर। ज्यों-ज्यों पाता हूँ सुखलंबी आयुताकत, पद, सोना और अभिज्ञतात्यों-त्यों मेरी पिपासाएं...
रोहिणी अग्रवाल

रोहिणी अग्रवाल

    वरिष्ठ आलोचक एवं कहानीकार।अद्यतन आलोचना पुस्तक ‘कथालोचना के प्रतिमान’। बभ्रुवाहन हाथ में हथियार होंऔर सिर पर दु:शासन का वरदहस्तअठारह अक्षौहिणी सेनाओं का बलमाथे पर चढ़ने लगता है आप ही आपटप-टप चूने लगता है अहंकार का महुआपूरा संसार शतरंज की बिसात बन जाता है...