चर्चित नेपाली कवि। ‘गगन के उस पार’चर्चित कविता संग्रह।

कोलाहल

रहस्य के महाद्वीप पर
मैंने शब्दों का नीड़ बनाया है
वहां सपनों के पहाड़ हैं नदियां हैं
चिड़ियों का एक संसार है
वहां सबकुछ है
प्रकृति खुले में निर्वस्त्र होकर नाचती है
मैं वहां सदियां गुजारना चाहता हूँ
पर यह हरामी मन है मेरे पास
जो गंदी मैली बातों से
मैला कुचैला कर बरामदे को
बेचैन किए रहता है
मैं बहुत दुखी हूँ इस मन से
कभी अकेला नहीं रह पाता हूँ
इसके कोलाहल से।

मैं साक्षी हूँ

मेरे ऊपर फैला एक आकाश है
जहां बादल गरजते हैं वर्षा होती है
फिर भी वह इससे अछूता रहता है
घटनाओं से उस पर न कोई हलचल है
न कोई प्रभाव
यह मन है जहां सबकुछ घटता है
हलचल होती है
विजली कौंधती है
उससे परे मैं एक चैतन्य प्रकाश हूँ
सबकुछ घटता रहता है मेरी पहुंच से दूर
न मैं पक्ष हूँ न मैं विपक्ष
मैं बस देखता रहता हूँ
किसी निर्जीव पत्थर की
मूर्ति की तरह
मैं केवल साक्षी हूँ।

(अनुवाद कवि द्वारा)

संपर्क : खांखलाबारी, उदालगुडी784509, बीटीआर, असम मो.917002580050