कवि लेखक और अनुवादक।

(१८९३–१९४५) कवि, उपन्यासकार, आलोचक, कला इतिहासकार, संगीतशास्त्री और छायाचित्रकार। ‘हैल्लूसिनेटेड सिटी’ उनका अति महत्वपूर्ण कविता संग्रह है।मारियो का ब्राजील के आधुनिक साहित्य पर गहरा प्रभाव है।संगीत के क्षेत्र में इनका महत्वपूर्ण काम है।

मेरी आत्मा अधीर है

मैंने गणना की और पाया कि मेरे पास जीने के लिए
उतना समय नहीं है, जितना मैं जी चुका हूँ

मेरा भविष्य मेरे अतीत से कम है
मैं स्वयं को उस बालक की तरह महसूस करता हूँं जिसे चेरी से भरा प्याला मिला
शुरू में वह उन्हें लपालप गटकता रहा
जब उसे लगा कि कुछ ही चेरी बची थीं
वह धीरे-धीरे चख-चख खाने लगा

मेरे पास अब दोयम दर्जे के लोगों के लिए
समय नहीं है

मैं उन बैठकों में शिरकत नहीं चाहता हूँ
जहां लपट-भरे अहंकार की नुमाइश होती है
मैं उन ईर्ष्यालु लोगों से परेशान हो जाता हूँ
जो सबसे सक्षम लोगों को
बदनाम करने की कोशिश करते हैं
उनकी जगह हथियाना चाहते हैं
उनकी पद-प्रतिष्ठा, प्रतिभा, उपलब्धि को
हासिल करने के लिए ललचाते हैं

मेरे पास समय नहीं है कि मैं उनके बारे में अंतहीन बहसें और अर्थहीन चर्चाएं करूं
जो मेरे जीवन का हिस्सा नहीं हैं
मेरे पास समय नहीं है कि मैं उनकी
भावुकता के लिए कुछ करूं
जो बावजूद अपनी काल-क्रमिक आयु के
अपरिपक्व हैं

लोग कंटेंट पर नहीं, लेबल पर बहस करते हैं
लेबल पर बहस करने के लिए
मेरे पास समय नहीं रह गया है
मैं सार चाहता हूँ, मेरी आत्मा अधीर है…
प्याले में अधिक चेरी नहीं हैं…

मैं मानवीय लोगों के पास रहना चाहता हूँ
उनके पास जो अपनी कमजोरियों पर हँसते हैं
और उनसे दूर जिन्हें सफलताओं ने
दंभी और अति-विश्वासी बना दिया है
उनसे दूर जो अहंमन्यता से भरे हुए हैं
उनके साथ
जो अपनी जिम्मेदारियों से भागते नहीं हैं…
जो मानवीय गरिमा की रक्षा करते हैं
और जो केवल ईमानदारी और
सत्य के रास्ते पर चलते हैं
आवश्यक वह है जो जीवन को सार्थक बनाता है

मैं उन लोगों के बीच रहना चाहता हूँ
जो लोगों के दिलों को छूना जानते हैं
उन लोगों के बीच जिन्हें जीवन के कठिन दौर ने
आत्मा की कोमलता के साथ आगे बढ़ना सिखाया है

हां…मैं अधीर हूँ…
उत्कटता के साथ जीने के लिए
वैसा जीवन केवल परिपक्वता दे सकता है
मैं बची हुई चेरी को बर्बाद होते नहीं देखना चाहता
यक़ीनन वे उत्कृष्ट होंगी
अब तक खाई गई चेरी से कहीं अधिक स्वादिष्ट

मेरा लक्ष्य उस अंत तक पहुंचना है
संतुष्ट और अपने प्रियजनों
और अपनी अंतरात्मा की शांति के साथ
मुझे लगता है तुम्हारा लक्ष्य भी वही है
क्योंकि किसी भी तरह तुम्हें भी वहीं पहुंचना है।

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