पूर्णावतार (काव्य नाटक): हेतु भारद्वाज
वाणी प्रकाशन, दिल्ली : मूल्य : १९५ रुपये
महाभारत पर आधारित इस काव्य नाटक की विषयवस्तु एक उपेक्षित चरित्र गांधारी है।श्रीकृष्ण को पूर्णावतार कहा गया है।क्या पूर्णता से आगे भी कुछ हो सकता है? इस प्रश्न से जूझता यह काव्य नाटक कई आधुनिक विडंबनाओं को उजागर करता है।

झारखंड मुक्ति संघर्ष और अबुआ राज (इतिहास) – बजरंग सिंह
सूत्रधार प्रकाशन, कांचरापाड़ा : मूल्य : ४०० रुपये
यह पुस्तक झारखंड और आदिवासियों द्वारा अंग्रेजों से लड़ी गई आज़ादी की लड़ाई के कई लुप्त दास्तान से परिचित कराती है।इसमें पृथक झारखंड राज्य बनने की लंबी राजनीतिक लड़ाई और उठापटक बेहद करीने और तथ्यात्मक ढंग से प्रस्तुत की गई है।

आत्मवृत्तांत (आत्मकथा) : शैखुल इस्लाम हजरत मौलाना सय्यद हुसैन अहमद मदनी
खुसरो फाउंडेशन, दिल्ली : मूल्य : १००० रुपये
मदानी की आत्मकथा में अंग्रेजी साम्राज्यवाद ने हिंदुस्तान को किस तरह आर्थिक रूप से खोखला किया, सामाजिक स्तर पर किस तरह विद्वेष फैलाया, किस तरह हिंदुस्तानियों का उत्पीड़न किया, अपमानित किया, इन सबका विस्तृत उल्लेख है।शैखुल इस्लाम ही थे जिन्होंने मुहम्मद अली जिन्नाह के बयान ‘क़ौमें मज़हब से बनती हैं’ का दृढ़ता से विरोध किया था।

कामनाओं के नशेमन (उपन्यास) : हुस्न तबस्सुम निहां
प्रलेक प्रकाशन, मुंबई : मूल्य : ४०० रुपये
यह एक रुमानी और स्त्री-मनोविज्ञान पर आधारित उपन्यास है, कई प्रकार की घटनाओं परिघटनाओं के आस पास घूमती एक रोचक और त्रिकोणीय प्रेम कथा।इसमें स्त्री की दैहिक स्वतंत्रता की पैरवी साहस का काम है।व्यक्ति अपने साथी के प्रति घोर वफादार होने के बावजूद अपने दैहिक आग्रहों के सामने किस तरह झुकने को विवश हो जाता है, यह देखने को मिलता है।

प्रतिनिधि कहानियां (कहानी संग्रह) : सीतेश आलोक
किताबघर प्रकाशन, दिल्ली : मूल्य : ४५० रुपये
संग्रह में लेखक की चर्चित कहानियां रखी गई हैं।ये मानव जीवन की आधुनिक संवेदना और आकांक्षाओं से जुड़ी हुई हैं और इनमें बदलते सामाजिक परिवेश पर सूक्ष्म नजर है।