मोहनदास नैमिशराय सुपरिचित दलित साहित्यकार और ‘बयान’ के संपादक माँ, बेटा और क्रांति माँ बीमार है और घर में अंधेरा न माँ के चेहरे पर तेज है और ना घर में उजाला जब से बेटे ने क्रांतिकारी झंडा उठा लिया था उसी समय से माँ ने चारपाई पकड़ ली थी माँ के सपने दफन हो गए थे उसी...

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