संस्मरण
राहुल सांकृत्यायन को जैसा पाया : संजीव देव

राहुल सांकृत्यायन को जैसा पाया : संजीव देव

संजीव देव (1914- 1999)  तेलुगु और अंग्रेजी के लेखक के अलावा कलाकार, चित्रकार, फोटोग्राफर, दार्शनिक और कुशल वक्ता। आंध्र विश्वविद्यालय से डी.लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित। बीस वर्ष की आयु में उत्तर भारत के अनेक प्रांतों में घूमकर प्रेमचंद जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों...

read more
कालू कलबंसिया : पानू खोलिया

कालू कलबंसिया : पानू खोलिया

(1939-2020) साठोत्तरी दौर के एक चर्चित कथाकार।  तीन कहानी-संग्रह और चार उपन्यास प्रकाशित। कुमाऊँ अंचल से संबद्ध होने के कारण पहाड़ी जीवन की संस्कृति और भाषा की समृद्ध झलक उनकी कहानियों में है। ‘पनचक्की’, ‘तुन महाराज’, ‘सीसकटी’, ‘गुनो लौट गई’ जैसी कहानियों के लिए विशेष...

read more
शैलेंद्र के गीत और ‘तीसरी कसम’ : प्रयाग शुक्ल

शैलेंद्र के गीत और ‘तीसरी कसम’ : प्रयाग शुक्ल

प्रमुख कवि तथा कला समीक्षक शैलेंद्र से मेरी भेंट कभी नहीं हुई। पर उनके गीत, वह तो उनके सच्चे प्रतिनिधि हैं। शैलेंद्र का कवि-मन, उनका इंसानी रूप, उनकी ऊर्जा, उनका सोचना, सब तो हैं वहाँ। उनके इस सोचने में, मानो उनका बिंबों में, दृश्यों में, बिंबों में सोचना शामिल है। और...

read more