आलेख
राहुल सांकृत्यायन और भोजपुरी : शुभनीत कौशिक

राहुल सांकृत्यायन और भोजपुरी : शुभनीत कौशिक

इतिहास के सुपरिचित गवेषक।गांधी के जीवन और दर्शन में विशेष रुचि।संप्रति : सतीश चंद्र कॉलेज (बलिया) में अध्यापन। विश्व साहित्य को ‘वोल्गा से गंगा’ जैसी कालजयी कृतियों से समृद्ध करने वाले, ‘भागो नहीं, दुनिया को बदलो’ का संदेश देने वाले महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने अपनी...

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आशावाद के जनकवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण : अरविंद त्रिपाठी

आशावाद के जनकवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण : अरविंद त्रिपाठी

    साहित्य के अलावा संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय।अब तक आलोचना और सम्पादन की दो दर्जन कृतियां प्रकाशित।प्रमुख पुस्तकें - ‘शताब्दी, मनुष्य और नियति’, ‘हमारे समय की कविता’, ‘आलोचना की साखी, ‘कवियों की पृथ्वी’ आदि। ध्रुवदेव मिश्र पाषाण जन्म १९३९।क्रांतिकारी...

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गांधी की मृत्यु देखना चाहते थे औपनिवेशिक सत्ताधीश : हेरम्ब चतुर्वेदी

गांधी की मृत्यु देखना चाहते थे औपनिवेशिक सत्ताधीश : हेरम्ब चतुर्वेदी

    इतिहासकार।भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग एवं पूर्व डीन, कला संकाय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।जिस व्यक्ति को चर्चिल ‘अर्धनग्न फकीर’ कहता था, आंग्ल औपनिवेशिक सत्ता कभी उसी व्यक्ति से इतना त्रस्त हुई थी कि दक्षिण अफ्रीका में भी वह उसका सामना नहीं कर पाई...

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नज़ीर अकबराबादी की हिंदी परंपरा : एस के साबिरा

नज़ीर अकबराबादी की हिंदी परंपरा : एस के साबिरा

    पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च स्कालर। ‘चौथा आदमी’ और ‘रोल नंबर’ उर्दू से हिंदी में अनूदित कहानी संग्रह। ‘हम भी दीया जलाएंगे’ सद्यः प्रकाशित पुस्तक। नज़ीर अकबराबादीका जन्म १७३५ में दिल्ली में हुआ।सैयद वली मुहम्मद इनका नाम रखा गया था।मां दिल्ली से आगरा चली गई, साथ...

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आम आदमी की खासियत और बुद्धिजीवी : सतीश देशपांडे

आम आदमी की खासियत और बुद्धिजीवी : सतीश देशपांडे

    दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजविज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर।हाल की पुस्तक  ‘कंटेम्पररी इंडिया : ए सोशियोलॉजिकल व्यू’। हमारा समाज दिन-ब-दिन अंधकारमय होता चला जा रहा है, वह इंसानियत के सनातन उसूलों से मुंह फेर रहा है।देश नफरत, हिंसा, विचारहीनता और...

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आधुनिक जीवन-मूल्य और कहानीकार मन्नू भंडारी : शशिकला त्रिपाठी

आधुनिक जीवन-मूल्य और कहानीकार मन्नू भंडारी : शशिकला त्रिपाठी

    आचार्य एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट फोर्ट, वाराणसी। ‘राजेंद्र जी गोष्ठियों में खूब जाते हैं, आप क्यों नहीं?’ हौजख़ास के राजेंद्र दंपती-आवास पर हुई एक भेंट में मैंने मन्नू जी से पूछा था।उनका उत्तर था- ‘राजेंद्र जी का अपना एक...

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लोक का सामर्थ्य : सेवा राम त्रिपाठी

लोक का सामर्थ्य : सेवा राम त्रिपाठी

वरिष्ठ आलोचक। ‘वसुधा’ पत्रिका से जुड़े हुए थे लोक के विश्वास और जातीय स्मृतियां आश्चर्यजनक तरीके से हमें अपनी ओर आकर्षित करती हैं।लोक आख्यान है, जीवन भी है और जीवन का सच भी है।इससे आंखें फेर कर कोई आगे की यात्रा नहीं कर पाएगा।इस दौर में लोक को याद करते हुए मुझे बहुत...

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महादेवी वर्मा, मृणाल सेन और एक बांग्ला फिल्म : जयनारायण प्रसाद

महादेवी वर्मा, मृणाल सेन और एक बांग्ला फिल्म : जयनारायण प्रसाद

वरिष्ठ पत्रकार| अद्यतन पुस्तक ‘एक जीनियस फिल्मकार सत्यजित राय’। मृणाल सेन की फिल्मों के बारे में सोचना जितना सहज है, उनकी फिल्मों पर टिप्पणी करना उतना जटिल है।मृणाल सेन की ऐसी ही एक बांग्ला फिल्म है ‘नील आकाशेर नीचे’।यह मृणाल सेन की दूसरी फिल्म है, जो बनीं तो बांग्ला...

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प्रकृति वैभव उर्फ श्रीपर्णा : शेखर जोशी

प्रकृति वैभव उर्फ श्रीपर्णा : शेखर जोशी

    प्रसिद्ध कथाकार और कवि।प्रमुख रचनाएँ : ‘कोशी का घटवार’, ‘मेरा पहाड़’, ‘एक पेड़ की याद’। प्रकृति का सौंदर्य देखने के लिए ट्यूलिप गार्डन, कश्मीर जाने की आवश्यकता नहीं।न ही, उत्तराखंड में फूलों की घाटी जाने की।बस, देखने वाली आंख चाहिए।सौंदर्य हर कहीं बिखरा...

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रामविलास शर्मा मूलतः कवि थे -भाग 2 : विजय मोहन शर्मा

रामविलास शर्मा मूलतः कवि थे -भाग 2 : विजय मोहन शर्मा

    लेखक की पहली पुण्यतिथि पर (10 अक्टूबर 1938 - 6 जुलाई 2021) केंद्रीय जल आयोग में सहायक निदेशक तथा सलाहकार के रूप में देश-विदेश में कई उच्च पदों पर कार्य।रामविलास शर्मा के पत्रों तथा कई बिखरे कार्यों को संपादित करके पुस्तकाकार प्रकाशन।कृष्णदत्त शर्मा के...

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1857- घुड़सवार सैनिक, मातादीन और उसके साथियों की बगावत : सुभाष चंद्र कुशवाहा

1857- घुड़सवार सैनिक, मातादीन और उसके साथियों की बगावत : सुभाष चंद्र कुशवाहा

    सुपरिचित कथाकार, संपादक औरलोक-इतिहास के गंभीर अध्येता और लेखक। ‘लोकरंग’ से जुड़े।अद्यतन पुस्तक ‘भील विद्रोह’। अठारह सौ सत्तावन का विद्रोह, कई गुमनाम नायकों को छिपाए अभी भी किंवदंती बना हुआ है।अभी भी बहुत से गुमनाम नायकों के त्याग और बलिदान से हम अनभिज्ञ...

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सरहदों की नई व्याख्या ‘रेत समाधि’ : सुमा एस.

सरहदों की नई व्याख्या ‘रेत समाधि’ : सुमा एस.

    प्रमुख हिंदी लेखिका।तिरुअनंतपुरम के गवर्न्मेंट वीमेन्स कॉलेज में प्रोफेसर। ‘सरहद क्षितिज।जहां दो लोक मिलते हैं, गलबहियां करते हैं।बॉर्डर इश्क है।इश्क जेल नहीं बनाता, हर रोक लांघने के लिए सितारे बिछाता हैं।बॉर्डर मिलान की रेखा है।इधर और उधर के जोड़ को...

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रामविलास शर्मा मूलतः कवि थे -भाग 2 : विजय मोहन शर्मा

रामविलास शर्मा – वे मूलतः कवि थे : विजय मोहन शर्मा

    लेखक की पहली पुण्यतिथि पर (10 अक्टूबर 1938 - 6 जुलाई 2021) केंद्रीय जल आयोग में सहायक निदेशक तथा सलाहकार के रूप में देश-विदेश में कई उच्च पदों पर कार्य।रामविलास शर्मा के पत्रों तथा कई बिखरे कार्यों को संपादित करके पुस्तकाकार प्रकाशन।कृष्णदत्त शर्मा के...

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रामविलास शर्मा की आलोचना-दृष्टि : गोपेश्वर सिंह

रामविलास शर्मा की आलोचना-दृष्टि : गोपेश्वर सिंह

    चर्चित आलोचक और शिक्षाविद।अद्यतन आलोचना पुस्तक - ‘आलोचना के परिसर’।दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर और अध्यक्ष। सुनते हैं कि रूसी भाषा के महान लेखक लेव तोलस्तोय का संपूर्ण साहित्य 90 खंडों में प्रकाशित है।इधर चर्चा है कि रामविलास...

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रेत समाधि उपन्यास पर कुछ बातें : शंभुनाथ

रेत समाधि उपन्यास पर कुछ बातें : शंभुनाथ

        ‘रेत समाधि’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिलने के बाद उसे पढ़ने की उत्सुकता स्वाभाविक है।खुशी-खुशी पढ़ा।ग्लोबल मिजाज के उपन्यास में जो खिलंदड़ापन होता है, करुणा को भी विनोद में बदलते हुए, वह इस उपन्यास में है।इसमें बिंबों की एक माला है।तालाब...

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रेत समाधि – बहस बुकर पुरस्कार पर : दिनेश श्रीनेत

रेत समाधि – बहस बुकर पुरस्कार पर : दिनेश श्रीनेत

    कवि-कथाकार, पत्रकार तथा सिनेमा तथा लोकप्रिय संस्कृति के अध्येता।प्रमुख कृति ‘पश्चिम और सिनेमा’।इकनॉमिक टाइम्स के ऑनलाइन संस्करण में भारतीय भाषाओं के संस्करणों के प्रभारी। गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘रेत समाधि’ को मिले इंटरनेशनल बुकर प्राइज़ के बाद खुशी का...

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थेरी गाथा-स्त्री मुक्ति की आदिकथा : विभा ठाकुर

थेरी गाथा-स्त्री मुक्ति की आदिकथा : विभा ठाकुर

    कालिंदी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रो़फेसर। थेरीगाथा प्रथम प्रतिश्रुति के रूप में स्त्री गाथा का जीवित दस्तावेज है।धर्मशास्त्रों का हवाला देकर पितृसत्तात्मक समाज ने बहुत समय तक स्त्रियों को ज्ञान के अधिकार से वंचित रखा था।नारी को माया कहा...

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शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’ की इतिहास दृष्टि तिमिर नाशक या तिमिरवर्धक : संजय कुमार

शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’ की इतिहास दृष्टि तिमिर नाशक या तिमिरवर्धक : संजय कुमार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध छात्र। राजा शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’ (1823-1895) का लेखन अपने समय के अंतर्विरोधों से घिरा नजर आता है।नवजागरण के आगोश में नित नए चिंतन तथा नई खोजों के दौर में उनके लेखन में किसी एक दृष्टि का बोलबाला नहीं है, बल्कि घटनाएं, परिस्थितियां...

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आदिवासियों की भाषा ही अब उनका तीर है : मृत्युंजय

आदिवासियों की भाषा ही अब उनका तीर है : मृत्युंजय

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी। गुजरात के आदिवासी कवि हैं चामूकाल राठवा।उनकी एक कविता ‘आदिवासी’ का एक अंश है, ‘इस शब्द को वे/इस तरह बोलते हैं/जैसे यह किसी/ महामारी का नाम हो/...इस शब्द को सुनकर/वे ऐसे देखते हैं/जैसे उन्होंने/आकाश में उड़ती/रकाबी देख ली हो।’...

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आदिवासी होने का अर्थ : मीनाक्षी नटराजन, अनुवाद :अवधेश प्रसाद सिंह

आदिवासी होने का अर्थ : मीनाक्षी नटराजन, अनुवाद :अवधेश प्रसाद सिंह

सोशल एक्टिविस्ट, पूर्व लोकसभा सदस्य (म.प्र.) लेखक, भाषाविद एवं अनुवादक. जब नेहरू से पूछा गया कि आदिवासियों के प्रति भारत का रुख क्या होना चाहिए तो उन्होंने कहा, ‘विनम्रता’। 1931 में, जनगणना आयुक्त जे.एच. हट्टन ने यह सुझाव दिया कि आदिवासी समुदायों की मान्यताओं की रक्षा...

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