आलेख
लघु पत्रिका आंदोलन और ‘लहर’ पत्रिका की भूमिका : शैलेंद्र चौहान

लघु पत्रिका आंदोलन और ‘लहर’ पत्रिका की भूमिका : शैलेंद्र चौहान

  वरिष्ठ लेखक। साहित्य की विभिन्न विधाओं में कई पुस्तकें प्रकाशित। ‘धरती’ अनियतकालिक साहित्यिक पत्रिका का संपादन। संप्रति स्वतंत्र पत्रकारिता।    लघु पत्रिका आंदोलन हिंदी साहित्य की वह सजीव धड़कन रहा है जिसने न केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया...

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एआई के अंधेरे पक्ष का सच : मुकेश असीमित

एआई के अंधेरे पक्ष का सच : मुकेश असीमित

    युवा लेखक और पेशे से अस्थि एवं जोड़ रोग के विशेषज्ञ। कई काव्य संग्रह और व्यंग्य संग्रह प्रकाशित।   धीरे-धीरे हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जहां हमारा सोचना, समझना, चिंतन सब आउटसोर्स होने लगा है। और यह मैं कोई फिल्मी डायलॉग नहीं बोल रहा हूँ,...

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क्रांतिकारी शहीद प्रीतिलता वाद्देदार शंखे-शंखे मंगल गाओ, एशेचे द्वारे : सुधीर विद्यार्थी

क्रांतिकारी शहीद प्रीतिलता वाद्देदार शंखे-शंखे मंगल गाओ, एशेचे द्वारे : सुधीर विद्यार्थी

प्रसिद्ध लेखक और यायावर। क्रांतिकारी आंदोलन पर अब तक दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। जनपदीय इतिहास और संस्कृति पर भी कई किताबें।   देश की स्वतंत्रता के लिए जिन दिनों बंगाल धधक रहा था तब वहां चटगांव की कलेक्टरी-कचहरी के हेडक्लर्क जगबंधु वाद्देदार के घर 5 मई,...

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आदिवासी समाज में रामकथा : हरि राम मीणा

आदिवासी समाज में रामकथा : हरि राम मीणा

    सेवानिवृत आई.पी.एस. एवं आदिवासी साहित्यकार। अब तक तीन कविता संकलन, एक प्रबंध काव्य, तीन यात्रा वृत्तांत, आदिवासी विमर्श की तीन पुस्तकें, संस्मरणों की एक पुस्तक और तीन उपन्यास प्रकाशित।    रामायण में वर्णित रामकथा को भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया...

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कृष्णा सोबती के लेखन में विभाजन का दर्द : श्रद्धांजलि सिंह

कृष्णा सोबती के लेखन में विभाजन का दर्द : श्रद्धांजलि सिंह

    सहायक प्राध्यापक, दार्जिलिंग गवर्नमेंट कॉलेज। भारतीय स्वाधीनता संग्राम की सफलता के रूप में मिलने वाली आजादी विभाजन की त्रासदी साथ लेकर आई थी। देश विभाजन एक ऐसी त्रासद घटना थी, जिसके साथ मानवता का क्रूरतम चेहरा सामने आया। इस त्रासदी ने दो देशों की सीमाएं...

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इतिहासकार अपने दरवाज़े से किसी भी तथ्य को लौटा नहीं सकता ; हितेंद्र पटेल

इतिहासकार अपने दरवाज़े से किसी भी तथ्य को लौटा नहीं सकता ; हितेंद्र पटेल

    सुपरिचित लेखक और इतिहासकार। रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफेसर। अद्यतन पुस्तक :‘आधुनिक भारत का ऐतिहासिक यथार्थ’।   अतीत के बारे में कई प्रकार से लिखा जाता है। जो बीत गई वह बात गई का भाव एक कवि इसलिए रखता है क्योंकि उसे लगता है...

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मोहन राकेश के नाटक में नगरबोध : चंदन कुमार

मोहन राकेश के नाटक में नगरबोध : चंदन कुमार

    युवा लेखक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित। संप्रति डीपीएस इंटरनेशनल में शिक्षक।    कोई शहर केवल एक भौतिक स्थल नहीं है, बल्कि वह एक विशिष्ट मानसिक और सामाजिक संरचना के साथ उभरता है। उससे व्यक्ति के अस्तित्व, पहचान और संबंधों का...

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कोरकू जनजाति का मौखिक इतिहास : विवेक कुमार/ महेंद्र कुमार जायसवाल

कोरकू जनजाति का मौखिक इतिहास : विवेक कुमार/ महेंद्र कुमार जायसवाल

विवेक कुमारशोधार्थी, मानवविज्ञान एवं जनजाति अध्ययन विभाग, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, राँची। महेंद्र कुमार जायसवालशोधार्थी, मानवविज्ञान विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)   लोककथाएं किसी समाज के इतिहास का मौखिक वर्णन...

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साठोत्तरी साहित्य का दौर : रविभूषण

साठोत्तरी साहित्य का दौर : रविभूषण

    रांची विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर। वरिष्ठ आलोचक और टिप्पणीकार। प्रमुख कृतियां : ‘रामविलास शर्मा का महत्व’, ‘वैकल्पिक भारत की तलाश’। 1960 के दशक में केवल कला-साहित्य में ही नहीं, प्राय: सभी क्षेत्रों में हम अभूतपूर्व बदलाव देखते हैं- यह दशक...

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समकालीन कविता : कुछ नोट्स – प्रदीप जिलवाने

समकालीन कविता : कुछ नोट्स – प्रदीप जिलवाने

युवा लेखक और कवि। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित। किताबें- ‘जहां भी हो जरा-सी संभावना’  (कविता संग्रह), ‘आठवाँ रंगपहाड़-गाथा’, ‘काकड़ किस्सा’ (उपन्यास), ‘प्रार्थना समय’ (कहानी संग्रह)। ‘लोग न्याय और बराबरी के जन्मजात आदर्श को नहीं भूलते, इतिहास के किसी...

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खासी लोक कथाओं में मानवीय मूल्य : अनीता पंडा

खासी लोक कथाओं में मानवीय मूल्य : अनीता पंडा

    वरिष्ठ आदिवासी लेखिका और समीक्षक। दस पुस्तकें प्रकाशित, ‘मेघदल साहित्यिक’ की संपादिका। मानव समाज का वह वर्ग, जो जीवन में सहजता, सरलता में विश्वास रखते हुए परंपरा का निर्वाह करता है ‘लोक’ कहलाता है। लोकसाहित्य ही लोक जीवन का प्रतिबिंब है। इसकी वाचिक...

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अज्ञेय पर एम.एन.रॉय का प्रभाव : विजय लक्ष्मी राय

अज्ञेय पर एम.एन.रॉय का प्रभाव : विजय लक्ष्मी राय

      युवा लेखिका। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने लगभग सभी आधुनिक विधाओं में लेखन का कार्य किया है। उन्होंने कला-साहित्य, समाज-संस्कृति, आधुनिकता तथा व्यक्ति-स्वातंत्र्य जैसे विषयों पर स्वतंत्र...

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सिर्फ एक मानवीय जीवन : जयशंकर

सिर्फ एक मानवीय जीवन : जयशंकर

    वरिष्ठ लेखक। अद्यतन पुस्तक ‘सर्दियों का नीला आकाश’। फिल्म सोसायटी मूवमेंट से संबद्ध। एक पोलिश फिल्म निर्देशक किस्लोव्स्की की फिल्म ‘डबल लाइफ ऑफ वैरोनिका’ की युवा नायिका फिल्म के अंतिम दृश्य में अपने मोहभंग, अपनी हताशा, व्यथा और निराशा के साथ अपने घर...

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भारतेंदु हरिश्चंद्र की शिक्षा नीति : बिजय कुमार रबिदास

भारतेंदु हरिश्चंद्र की शिक्षा नीति : बिजय कुमार रबिदास

  युवा आलोचक। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत।  दलित साहित्य, नवजागरण और बांग्ला साहित्य में विशेष रुचि है। भारतेंदु हरिश्चंद्र को पैंतीस साल की आयु मिली थी। उस अल्पायु में उन्होंने हिंदी-क्षेत्र की जनता के उत्थान के...

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मानव कल्याण में भारत का योगदान :आनंद के कुमारस्वामी, अंग्रेजी से अनुवाद :देवराज

मानव कल्याण में भारत का योगदान :आनंद के कुमारस्वामी, अंग्रेजी से अनुवाद :देवराज

प्रत्येक जाति आत्माभिव्यक्ति और आत्म-चरितार्थता की प्रक्रिया में विश्व-सभ्यता में कोई-न-कोई मूलभूत योगदान करती रही है। भारत का मूलभूत अवदान उसकी भारतीयता है। यदि हम प्रश्न करें कि इस मूलभूत-अवदान में सर्वाधिक विशिष्ट क्या है, तो सबसे पहले हमें स्पष्ट समझ लेना होगा कि...

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आदिवासी जीवन की वर्तमान चुनौतियां : शुभम यादव

आदिवासी जीवन की वर्तमान चुनौतियां : शुभम यादव

    युवा लेखक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित। आदिवासी समाज की लड़ाई जल, जंगल, जमीन की लड़ाई है। इनको बचाने के लिए आदिवासी समाज लगातार संघर्ष कर रहा है। यह लड़ाई सिर्फ औद्योगिक विकास के साथ नहीं शुरू हुई, बल्कि इसका एक लंबा इतिहास है। राज्य द्वारा...

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आदिवासी जीवन की त्रासदी : कनक तिवारी

आदिवासी जीवन की त्रासदी : कनक तिवारी

    वरिष्ठ लेखक और विचारक। छत्तीसगढ़ के पूर्व एडवोकेट जनरल। समाचार पत्रों से संबद्ध रहे। ‘फिर से हिन्द स्वराज’, ‘बस्तर-लाल क्रांति बनाम ग्रीन हंट’, ‘गांधी और पंचायती राज’, ‘लोहिया’ समेत विचारपरक कई पुस्तकें प्रकाशित। 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित...

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स्त्री-विमर्श – विस्मृत मुद्दे : रीतारानी पालीवाल

स्त्री-विमर्श – विस्मृत मुद्दे : रीतारानी पालीवाल

    वरिष्ठ लेखिका और पूर्व-प्रोफेसर। साहित्य, संस्कृति, रंगमंच संबंधी लेखन और अनुवाद की 19 पुस्तकें प्रकाशित। संप्रति सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली की सचिव। स्त्री के प्रश्न, जरूरतें, समस्याएं सब जगह समान होने के बावजूद सभ्यता, समाज और संस्कृति विशेष से जुड़ी...

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बहस का तहस-नहस : गौतम सान्याल

बहस का तहस-नहस : गौतम सान्याल

चर्चित आलोचक और कथाकार। बर्दवान विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व प्राध्यापक। अद्यतन आलोचना पुस्तक ‘कथालोचन के नये प्रतिमान’। ‘मैं नहीं जानता कोई कैसे अश्लीलता को परिभाषित करता है। मैं इतना निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि उम्र के अनुसार परिभाषा भी भिन्न-भिन्न होगी।’ यह...

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लोकरंग परंपरा में बहादुर लड़की गुलाब बाई : पुष्पा बरनवाल

लोकरंग परंपरा में बहादुर लड़की गुलाब बाई : पुष्पा बरनवाल

संस्कृतिकर्मी एवं बैसवारा पी. जी. कॉलेज, लालगंज में एसोसिएट प्रोफेसर। पुस्तक ‘जनवादी दृष्टि परंपरा तथा भैरव प्रसाद गुप्त के उपन्यास’ (आलोचना)। ‘बहादुर लड़की उ़र्फ औरत का प्यार’ ग्रेट गुलाब थियेटर कंपनी की बहुत ही मशहूर नौटंकी रही है। यह लेख ‘बहादुर लड़की’ शब्द सिर्फ...

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