आलेख
स्त्री-विमर्श – विस्मृत मुद्दे : रीतारानी पालीवाल

स्त्री-विमर्श – विस्मृत मुद्दे : रीतारानी पालीवाल

    वरिष्ठ लेखिका और पूर्व-प्रोफेसर। साहित्य, संस्कृति, रंगमंच संबंधी लेखन और अनुवाद की 19 पुस्तकें प्रकाशित। संप्रति सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली की सचिव। स्त्री के प्रश्न, जरूरतें, समस्याएं सब जगह समान होने के बावजूद सभ्यता, समाज और संस्कृति विशेष से जुड़ी...

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बहस का तहस-नहस : गौतम सान्याल

बहस का तहस-नहस : गौतम सान्याल

चर्चित आलोचक और कथाकार। बर्दवान विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व प्राध्यापक। अद्यतन आलोचना पुस्तक ‘कथालोचन के नये प्रतिमान’। ‘मैं नहीं जानता कोई कैसे अश्लीलता को परिभाषित करता है। मैं इतना निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि उम्र के अनुसार परिभाषा भी भिन्न-भिन्न होगी।’ यह...

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लोकरंग परंपरा में बहादुर लड़की गुलाब बाई : पुष्पा बरनवाल

लोकरंग परंपरा में बहादुर लड़की गुलाब बाई : पुष्पा बरनवाल

संस्कृतिकर्मी एवं बैसवारा पी. जी. कॉलेज, लालगंज में एसोसिएट प्रोफेसर। पुस्तक ‘जनवादी दृष्टि परंपरा तथा भैरव प्रसाद गुप्त के उपन्यास’ (आलोचना)। ‘बहादुर लड़की उ़र्फ औरत का प्यार’ ग्रेट गुलाब थियेटर कंपनी की बहुत ही मशहूर नौटंकी रही है। यह लेख ‘बहादुर लड़की’ शब्द सिर्फ...

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कृत्रिम बुद्धि के दौर में इतिहास लेखन : हेरम्ब चतुर्वेदी

कृत्रिम बुद्धि के दौर में इतिहास लेखन : हेरम्ब चतुर्वेदी

  वरिष्ठ इतिहासकार। भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग एवं पूर्व डीन, कला संकाय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय। पारंपरिक ज्ञान की अवधारण समावेशी थी- चाहे पाश्चात्य यूनानी चिंतन हो या भारतीय मानस! ज्ञान की इस अवधारणा के अंतर्गत विज्ञान भी सम्मिलित था। बीसवीं शताब्दी के...

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चुप्पियों को आवाज़ देने वाली कलम-जॉन फॉसे : उपमा ऋचा

चुप्पियों को आवाज़ देने वाली कलम-जॉन फॉसे : उपमा ऋचा

जब मैं कुछ ठीकठाक लिखने में कामयाब हो जाता हूं, तब एक दूसरी भाषा प्रकट होती है। मूक भाषा... यह भाषा बताती है यह सब क्या और किसलिए था। यह कोई कहानी नहीं, लेकिन आप इसके पीछे तैरता हुआ सा कुछ सुन सकते हैं। एक मूक भाषा को बोलते हुए! यही बात मेरे लिए साहित्य को महत्वपूर्ण...

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भविष्य कल्पना – पश्चिमी खिड़कियां : अवधेश प्रसाद सिंह

भविष्य कल्पना – पश्चिमी खिड़कियां : अवधेश प्रसाद सिंह

वरिष्ठ लेखक, भाषाविद और अनुवादक। पश्चिम में भविष्य कल्पना की एक दीर्घ परंपरा है। थामस मोर ने 1516 में अपनी पुस्तक ‘यूटोपिया’ में एक ऐसे राज्य की कल्पना की थी, जो हर तरह की दुरवस्था और दुर्नीति से मुक्त एक जनहितकारी, उत्कृष्ट, समानता पर आधारित व्यवस्था वाला कल्पलोक था।...

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गांधी -प्रेम और शांतिकामियों के चिर संगी : हितेंद्र पटेल

गांधी -प्रेम और शांतिकामियों के चिर संगी : हितेंद्र पटेल

    सुपरिचित लेखक और इतिहासकार। रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफेसर। अद्यतन पुस्तक :‘आधुनिक भारत का ऐतिहासिक यथार्थ’। गांधी का विरोध आज बढ़ता ही जा रहा है। साथ ही उनके प्रति आकर्षण भी खत्म नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि उनकी...

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कोदूराम ‘दलित’ की स्वतंत्रता भावना : हेमलाल सहारे

कोदूराम ‘दलित’ की स्वतंत्रता भावना : हेमलाल सहारे

    शोधार्थी। राजनांद गांव निवासी। छत्तीसगढ़ के जनकवि कोदूराम ‘दलित’ (1910-1967) के लेखन पर अधिकांशत: गांधीवादी विचारधारा का प्रभाव है। उनका लेखन 1926 से प्रारंभ हुआ, जिस समय देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। ‘दलित’ जी गांधी जी से प्रेरित होकर गांव के लोगों को...

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बाजार में कविता : बद्री नारायण

बाजार में कविता : बद्री नारायण

    साहित्य अकादमी सम्मान से पुरस्कृत चर्चित कवि और शिक्षाविद। ‘लोक संस्कृति और इतिहास’, ‘लोक संस्कृति में राष्ट्रवाद’, ‘साहित्य और सामाजिक परिवर्तन’, ‘संस्कृति का गद्य’ आदि विचारात्मक पुस्तकों के अलावा ‘सच सुने कई दिन हुए’, ‘शब्दपदीयम’, ‘तुमड़ी का शब्द’ आदि...

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स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण मिशन और जवाहरलाल नेहरू : शुभनीत कौशिक

स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण मिशन और जवाहरलाल नेहरू : शुभनीत कौशिक

    इतिहास के अध्येता।गांधी के जीवन और दर्शन में रुचि। ‘इतिहास, भाषा और राष्ट्र’ पुस्तक प्रकाशित।सतीश चंद्र कॉलेज (बलिया) में अध्यापन। जवाहरलाल नेहरू के भारत-संबंधी चिंतन और संकल्पनाओं पर स्वामी विवेकानंद के विचारों का गहरा प्रभाव साफ दिखाई देता है।उल्लेखनीय...

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हिंदी भाषा में स्त्री-विमर्श : राजेंद्र प्रसाद सिंह

हिंदी भाषा में स्त्री-विमर्श : राजेंद्र प्रसाद सिंह

स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, शांति प्रसाद जैन महाविद्यालय, सासाराम में प्रोफेसर। ‘भाषा का समाजशास्त्र’ और ‘भारत में नाग परिवार की भाषाएं’, ‘हिंदी की लंबी कविताओं का आलोचना- पक्ष’ आलोचना की पुस्तकें। ‘भोजपुरी - हिंदी - इंग्लिश लोक शब्दकोश’ का संपादन।बिहार सरकार के डॉ....

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बंग महिला का वैचारिक लेखन और स्त्री-प्रश्न : राम बचन यादव

बंग महिला का वैचारिक लेखन और स्त्री-प्रश्न : राम बचन यादव

युवा लेखक।दो पुस्तकों का संपादन - ‘मीरा की कविता : विविध आयाम’ और ‘राजेंद्र यादव : प्रतिपक्ष की आवाज’। राजेंद्र बाला घोष हिंदी साहित्य की पहली सुप्रसिद्ध और महत्वपूर्ण लेखिका हैं।इनका लेखकीय नाम बंग महिला था।उनका ज्यादातर साहित्य इसी नाम से प्रकाशित होता रहा।बंग महिला...

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अवतारवाद की धारणा : विनोद शाही

अवतारवाद की धारणा : विनोद शाही

      वरिष्ठ आलोचक और नाटककार।आलोचना की लगभग तीस पुस्तकें।अद्यतन पुस्तक ‘संस्कृति और राजनीति’। अवतारवाद की पौराणिक धारणा, एक अर्से से भारतीय धर्म-संस्कृति की मुख्य पहचान होती चली गई है।हालांकि उसकी जड़ें न वेदों में हैं और न ही उपनिषदों में।इस बारे में...

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राहुल सांकृत्यायन और भोजपुरी : शुभनीत कौशिक

राहुल सांकृत्यायन और भोजपुरी : शुभनीत कौशिक

इतिहास के सुपरिचित गवेषक।गांधी के जीवन और दर्शन में विशेष रुचि।संप्रति : सतीश चंद्र कॉलेज (बलिया) में अध्यापन। विश्व साहित्य को ‘वोल्गा से गंगा’ जैसी कालजयी कृतियों से समृद्ध करने वाले, ‘भागो नहीं, दुनिया को बदलो’ का संदेश देने वाले महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने अपनी...

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आशावाद के जनकवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण : अरविंद त्रिपाठी

आशावाद के जनकवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण : अरविंद त्रिपाठी

    साहित्य के अलावा संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय।अब तक आलोचना और सम्पादन की दो दर्जन कृतियां प्रकाशित।प्रमुख पुस्तकें - ‘शताब्दी, मनुष्य और नियति’, ‘हमारे समय की कविता’, ‘आलोचना की साखी, ‘कवियों की पृथ्वी’ आदि। ध्रुवदेव मिश्र पाषाण जन्म १९३९।क्रांतिकारी...

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गांधी की मृत्यु देखना चाहते थे औपनिवेशिक सत्ताधीश : हेरम्ब चतुर्वेदी

गांधी की मृत्यु देखना चाहते थे औपनिवेशिक सत्ताधीश : हेरम्ब चतुर्वेदी

    इतिहासकार।भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग एवं पूर्व डीन, कला संकाय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।जिस व्यक्ति को चर्चिल ‘अर्धनग्न फकीर’ कहता था, आंग्ल औपनिवेशिक सत्ता कभी उसी व्यक्ति से इतना त्रस्त हुई थी कि दक्षिण अफ्रीका में भी वह उसका सामना नहीं कर पाई...

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नज़ीर अकबराबादी की हिंदी परंपरा : एस के साबिरा

नज़ीर अकबराबादी की हिंदी परंपरा : एस के साबिरा

    पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च स्कालर। ‘चौथा आदमी’ और ‘रोल नंबर’ उर्दू से हिंदी में अनूदित कहानी संग्रह। ‘हम भी दीया जलाएंगे’ सद्यः प्रकाशित पुस्तक। नज़ीर अकबराबादीका जन्म १७३५ में दिल्ली में हुआ।सैयद वली मुहम्मद इनका नाम रखा गया था।मां दिल्ली से आगरा चली गई, साथ...

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आम आदमी की खासियत और बुद्धिजीवी : सतीश देशपांडे

आम आदमी की खासियत और बुद्धिजीवी : सतीश देशपांडे

    दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजविज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर।हाल की पुस्तक  ‘कंटेम्पररी इंडिया : ए सोशियोलॉजिकल व्यू’। हमारा समाज दिन-ब-दिन अंधकारमय होता चला जा रहा है, वह इंसानियत के सनातन उसूलों से मुंह फेर रहा है।देश नफरत, हिंसा, विचारहीनता और...

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आधुनिक जीवन-मूल्य और कहानीकार मन्नू भंडारी : शशिकला त्रिपाठी

आधुनिक जीवन-मूल्य और कहानीकार मन्नू भंडारी : शशिकला त्रिपाठी

    आचार्य एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट फोर्ट, वाराणसी। ‘राजेंद्र जी गोष्ठियों में खूब जाते हैं, आप क्यों नहीं?’ हौजख़ास के राजेंद्र दंपती-आवास पर हुई एक भेंट में मैंने मन्नू जी से पूछा था।उनका उत्तर था- ‘राजेंद्र जी का अपना एक...

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लोक का सामर्थ्य : सेवा राम त्रिपाठी

लोक का सामर्थ्य : सेवा राम त्रिपाठी

वरिष्ठ आलोचक। ‘वसुधा’ पत्रिका से जुड़े हुए थे लोक के विश्वास और जातीय स्मृतियां आश्चर्यजनक तरीके से हमें अपनी ओर आकर्षित करती हैं।लोक आख्यान है, जीवन भी है और जीवन का सच भी है।इससे आंखें फेर कर कोई आगे की यात्रा नहीं कर पाएगा।इस दौर में लोक को याद करते हुए मुझे बहुत...

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