बहस
स्त्री विमर्श – नए मुद्दे प्रस्तुति : रूपेश कुमार यादव

स्त्री विमर्श – नए मुद्दे प्रस्तुति : रूपेश कुमार यादव

स्त्री विमर्श आधी आबादी के संघर्ष और उत्थान का विमर्श है।फ्रांसीसी राज्य क्रांति (1789) के तीन प्रमुख बिंदु थे- समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व।ये किसी भी देश में मानवता के हक में जरूरी हैं।पश्चिमी देश और भारत के इसी समानता के सिद्धांत के तहत स्त्री के हक और स्त्री...

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21 वीं सदी में लोक, प्रस्तुति :धीरेंद्र प्रताप सिंह

21 वीं सदी में लोक, प्रस्तुति :धीरेंद्र प्रताप सिंह

कवि, लेखक और संपादक।पोस्ट डॉक्टोरल फेलो, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।कथा-आलोचना, साहित्यिक समीक्षा के अलावा ‘धवल’ उपनाम से कविताएं भी लिखते हैं।दूरदर्शन और आकाशवाणी, प्रयागराज से वार्ता प्रसारित। इस आभासी संसार में लोक की बात करना सरासर अतीतजीविता की बात लगती है।आज जब हम...

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आदिवासी जीवन और साहित्य-नए मुद्दे प्रस्तुति :अनिता रश्मि

आदिवासी जीवन और साहित्य-नए मुद्दे प्रस्तुति :अनिता रश्मि

वरिष्ठ कथाकार।कहानी संग्रह ‘सरई के फूल’। आज विश्व भर में आदिवासी, आदिवासी साहित्य और आदिवासियत की चर्चा होती है।आदिवासी साहित्य अर्थात वह साहित्य जिसमें आदिवासियों का जीवन, समाज और दर्शन अभिव्यक्त हो।आदिवासी साहित्य तीन प्रकार का है- (1) आदिवासी विषय पर गैर-आदिवासी...

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स्त्री की कहानियां-जीवन, संघर्ष और स्वप्न : प्रस्तुति जीतेश्वरी

स्त्री की कहानियां-जीवन, संघर्ष और स्वप्न : प्रस्तुति जीतेश्वरी

शोध छात्रा, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग।आज की हिंदी कहानियों में स्त्री का जीवन, संघर्ष और स्वप्न मुखर रूप में व्यक्त हो रहा है।भूमंडलीकरण और बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव का भी चित्रण अपने बदलते स्वरूप में मौजूद है।यह सच है कि आज स्त्रियां पहले की तरह बेड़ियों में जकड़ी...

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नई कविता आंदोलन और नरेश मेहता : प्रस्तुति मधु सिंह

नई कविता आंदोलन और नरेश मेहता : प्रस्तुति मधु सिंह

प्रस्तुति : मधु सिंह विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में एम.फिल. की शोध छात्रा। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण। नई कविता में परंपरागत कविता से आगे नए भावबोध की अभिव्यक्ति के साथ ही नए मूल्यों और नए शिल्प विधानों का अन्वेषण किया गया है।भाव, विचार और भाषा...

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गांधी की चेतावनियां और नया भारत प्रस्तुति : सुशील कान्ति

गांधी की चेतावनियां और नया भारत प्रस्तुति : सुशील कान्ति

प्रस्तुति : सुशील कान्ति नाट्यकर्मी, वागर्थ के सहायक संपादक आज हम गांधी-सोच विहीन भारत के निवासी हैं।हम बचपन में पाठ पढ़ते हैं- झूठ बोलना अपराध है, चोरी करना पाप है, सदा सत्य बोलो, अहिंसा परमो धर्मः।लेकिन इन सबका नतीजा पूरी तरह उलटा है।बस हम गांधी के चश्मे को याद रख...

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जायसी का पद्मावत : पंचशती चर्चा / प्रस्तुति : अनूप कुमार

जायसी का पद्मावत : पंचशती चर्चा / प्रस्तुति : अनूप कुमार

प्रस्तुति : अनूप कुमार, युवा लेखक एवं विद्यार्थी जायसी ने अपने महाकाव्य ‘पद्मावत’ की रचना 500 साल पहले शुरू की थी, ‘सन नौ सौ सत्ताइस अहै, कथा आरंभ बैन कवि कहै’| वासुदेव शरण अग्रवाल के अनुसार नौ सौ सत्ताईस हिजरी, अर्थात- 1521 ईसवी| ‘पद्मावत’ की पंचशती के अवसर पर यह...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 2 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 2 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।'हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं' विषय पर आयोजित परिचर्चा के अंतर्गत पाठकों ने पिछले अंक में पढ़े...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 1 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 1 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।हिंदी लोकवृत्त एक जटिल संरचना है जिसमें हिंदीभाषी जन, उनकी भाषा, राजनीति, संस्कृति और इन सभी...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।‘हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं' विषय पर आयोजित बहस के अंतर्गत पाठकों ने अबतक अजय कुमार, अमितेश...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।‘हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं' विषय पर आयोजित बहस के अंतर्गत पाठकों ने अबतक अजय कुमार, अमितेश...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 2 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 2 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।'हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं' विषय पर आयोजित परिचर्चा के अंतर्गत पाठकों ने पिछले अंक में पढ़े...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 1 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।हिंदी लोकवृत्त एक जटिल संरचना है जिसमें हिंदीभाषी जन, उनकी भाषा, राजनीति, संस्कृति और इन सभी...

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उत्तर-कोरोना प्रभाव : समाज और संस्कृति / प्रस्तुति : विनोद कुमार यादव

उत्तर-कोरोना प्रभाव : समाज और संस्कृति / प्रस्तुति : विनोद कुमार यादव

प्रस्तुति : विनोद कुमार यादव शोध छात्र, विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुरकोरोना ने पूरे विश्व को हिला दिया है। अब वैक्सिन आने के बावजूद उसका दूसरा आक्रमण सामने है। दुनिया में जिस एक मुद्दे पर हाल के दशकों में सबसे ज्यादा चर्चा हुई है, वह कोरोना से होनेवाली क्षति और...

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दलित चेतना की नई मंजिलें : मधु सिंह

दलित चेतना की नई मंजिलें : मधु सिंह

प्रस्तुति : मधु सिंह विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में एम.फिल. की शोध छात्रा। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण।आधुनिक युग विमर्शों का युग है। इस काल में शिक्षा और विज्ञान की प्रगति ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया है। फलस्वरूप साहित्य में...

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राष्ट्रवाद और संकटग्रस्त भाषाएं : अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी

राष्ट्रवाद और संकटग्रस्त भाषाएं : अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी

प्रस्तुति : अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी युवा भाषाविद। विगत एक दशक से भाषा-तकनीक से जुड़े विषयों पर लेखन। विश्वभारती, शांतिनिकेतन में कार्यरत। भारतीय ‘राष्ट्रवाद’ एक संरचना के रूप में स्वतंत्रता-संघर्षों से मुखर हुआ है, जिसमें उदारता, सहिष्णुता और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना...

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परिचर्चा : फणीश्वरनाथ रेणु का महत्व

परिचर्चा : फणीश्वरनाथ रेणु का महत्व

प्रस्तुति : संजय जायसवाल कवि और समीक्षक। विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर।   फणीश्वरनाथ रेणु आंचलिक उपन्यास और नई कहानी दौर के विशिष्ट कथाकार हैं। वे हिंदी के पहले कहानीकार हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान और टेक्नोलॉजी के प्रवेश का...

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बहस : वर्तमान विश्व में विज्ञान का हाल

बहस : वर्तमान विश्व में विज्ञान का हाल

प्रस्तुति : मनोज मोहन हिंदी के साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया में निरंतर सक्रिय। वर्तमान में सीएसडीएस की पत्रिका 'प्रतिमान : समय समाज संस्कृति'  के संपादकीय विभाग से संबद्ध। दुनिया में विज्ञान की जगह टेक्नोलॉजी का महत्व बढ़ा है और जैसे पश्चिमी देश ही एक बार फिर अपनी...

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बहस : नई शिक्षा – कैसा प्रस्थान चाहिए

बहस : नई शिक्षा – कैसा प्रस्थान चाहिए

प्रस्तुति : मनोज मोहन हिंदी के साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया में निरंतर सक्रिय। वर्तमान में सीएसडीएस की पत्रिका 'प्रतिमान : समय समाज संस्कृति'  के संपादकीय विभाग से संबद्ध।भारतीय शिक्षा की बात करें तो उसके तीन स्तर उभर कर आते है–स्कूली शिक्षा, उच्चशिक्षा और व्यावसायिक...

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बहस : बच्चों की दुनिया का हाल

बहस : बच्चों की दुनिया का हाल

प्रस्तुति : प्रतिभा सिंह शोध छात्रा, विकास अध्ययन केंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज।   पिछले अंक में हमने एक बहस शुरू की थी कि तेज़ी से बदलती इस दुनिया में क्या है बच्चों की दुनिया का हाल? ज्ञान, मूल्य, संवेदना, शक्ति की अपेक्षा करते बचपन की ‘पोलिटीकल...

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