बहस
राजनीतिज्ञों और साहित्यकारों के बीच संबंध क्यों टूटते गए? प्रस्तुति : संजय जायसवाल

राजनीतिज्ञों और साहित्यकारों के बीच संबंध क्यों टूटते गए? प्रस्तुति : संजय जायसवाल

कवि, समीक्षक और संस्कृति कर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर। हर युग में साहित्य के जरिए उस युग के सत्य को देखने, समझने और जानने का प्रयास होता रहा है। साहित्य ने हमेशा अपने युग को परिष्कृत करने का महत्वपूर्ण काम किया। एक समय राज दरबार में...

read more
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कला-साहित्य प्रस्तुति : जीतेश्वरी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कला-साहित्य प्रस्तुति : जीतेश्वरी

    युवा लेखिका। हाल में डॉक्टरेट की उपाधि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समीक्षा, लेख प्रकाशित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उदय हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। यह केवल तकनीकी प्रगति का संकेत नहीं, बल्कि मनुष्य की संवेदना, उसकी रचनात्मकता और...

read more
उत्तर-आधुनिकता : युग और युगांत, प्रस्तुति : मधु सिंह

उत्तर-आधुनिकता : युग और युगांत, प्रस्तुति : मधु सिंह

युवा लेखिका और संस्कृतिकर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय से हाल में डॉक्टरेट की उपाधि। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण।​ आधुनिक काल के मूल्यों से भिन्न उत्तर-आधुनिकता एक सांस्कृतिक और बौद्धिक आंदोलन है जो 20वीं शताब्दी के मध्य में शुरू हुआ था। यह आंदोलन आधुनिकता...

read more
पत्रकारिता से मीडिया बनने की यात्रा प्रस्तुति : संजय जायसवाल

पत्रकारिता से मीडिया बनने की यात्रा प्रस्तुति : संजय जायसवाल

कवि, समीक्षक और संस्कृति कर्मी।विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर। हिंदी पत्रकारिता के मीडिया बनने की यात्रा दो सौ वर्षों के बौद्धिक एवं सामाजिक चेतना के विकास का आख्यान है। ‘उदंत मार्त्तंड’ का प्रकाशन औपनिवेशिक परिवेश में 30 मई 1826 को नवजागरण के...

read more
मोहन राकेश : आधुनिकता का संकट, प्रस्तुति : मृत्युंजय श्रीवास्तव

मोहन राकेश : आधुनिकता का संकट, प्रस्तुति : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी।   मोहन राकेश की ख्याति नई कहानी के एक प्रमुख रचनाकार के रूप में है, मगर उनकी मुकम्मल पहचान उनके नाटकों से बनी है। उनके लिखे नाटक ही हैं, जिनके जीवित पाठ की वजह से मोहन राकेश की उपस्थिति बनी हुई है। 1925 में जन्मे मोहन...

read more
हिंदी में भाषा प्रदूषण का संकटप्रस्तुति : सूर्यदेव राय

हिंदी में भाषा प्रदूषण का संकटप्रस्तुति : सूर्यदेव राय

युवा लेखक, कवि और संस्कृति कर्मी। अध्ययनरत।दुनिया में छोटी-मोटी भाषाओं के मिटने के खतरे के समानांतर इस समय हिंदी जैसी बड़ी भाषाएं आंतरिक विरूपण और सांस्कृतिक विध्वंस के दौर से गुजर रही है। यह मानव भाविष्य पर एक बड़ा खतरा है। इस तरह का संकट सोच और संवेदना को गहराई से...

read more
सिद्ध-नाथ साहित्य का महत्व : प्रस्तुति – आदित्य गिरी

सिद्ध-नाथ साहित्य का महत्व : प्रस्तुति – आदित्य गिरी

युवा लेखक तथा टिप्पणीकार।  संप्रति कोलकाता के सेठ आनंद राम जयपुरिया कॉलेज में शिक्षण। हिंदी साहित्य मुख्यतः प्रतिवाद का साहित्य है। ईसवी 800 से 1000 के बीच का सिद्ध-नाथ साहित्य इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे साहित्य मानने से इंकार कर दिया...

read more
राष्ट्रीय काव्यधारा में क्रांतिकारी देशप्रेम : जीतेश्वरी

राष्ट्रीय काव्यधारा में क्रांतिकारी देशप्रेम : जीतेश्वरी

युवा लेखिका। हाल में डाक्टरेट की उपाधि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समीक्षा, लेख प्रकाशित।राष्ट्रीय काव्यधारा भारतीय साहित्य का वह स्वर्णिम युग है, जब राष्ट्रीयता की भावना लोगों के मन में हिलोरें मार रही थी और स्वतंत्रता की आकांक्षा जन-जन के हृदय में प्रज्ज्वलित हो रही...

read more
साठोत्तरी साहित्य की खोई आवाजें, प्रस्तुति : मधु सिंह

साठोत्तरी साहित्य की खोई आवाजें, प्रस्तुति : मधु सिंह

युवा लेखिका और संस्कृतिकर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय से हाल में डॉक्टरेट की उपाधि। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण।साहित्य का लक्ष्य हमेशा से खोई आवाजों को नव-स्वर देना रहा है। जिस तरह से वाल्मीकि ने क्रौंच-वध की व्यथा को खोने नहीं दिया था जिस तरह से भक्त...

read more
मनोरंजन उद्योग और भारतीय जनमानस प्रस्तुति : दीप अमन

मनोरंजन उद्योग और भारतीय जनमानस प्रस्तुति : दीप अमन

    शोधार्थी, हिंदी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय। आज के मनोरंजन उद्योग ने भारतीय जनमानस के भीतर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की है। इसका प्रभाव यह हुआ है कि अर्थ ने यहां भी अपने पर्याप्त पैर पसार लिए और यह युवाओं के लिए रोजगार तलाश करने का एक मंच बन गया।...

read more
सोशल मीडिया और घृणा की भाषा : प्रस्तुति – आदित्य गिरी

सोशल मीडिया और घृणा की भाषा : प्रस्तुति – आदित्य गिरी

युवा लेखक तथा टिप्पणीकार।  संप्रति कोलकाता के सेठ आनंद राम जयपुरिया कॉलेज में शिक्षण।देखा जा सकता है कि सोशल मीडिया ने आम जीवन को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। मेले-ठेले की संस्कृति वाले, गली-चौराहों पर बैठकी करने वाले समाज में अब एक गहरी उदासी है। हँसी-खुशी के साथ...

read more
भारतीय भाषाओं के सामने चुनौतियां : प्रस्तुति- अनुपम श्रीवास्तव

भारतीय भाषाओं के सामने चुनौतियां : प्रस्तुति- अनुपम श्रीवास्तव

केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के सूचना एवं भाषा प्रौद्योगिकी विभाग में सहायक प्रोफेसर (भाषाविज्ञान)। भारत का विविधतासंपन्न भाषाई मानचित्र सोच-विचार और काम करने की कुछ न कुछ गुंजाइश हमेशा बनाए रखता है। भारतीय भाषाओं की ऐतिहासिक परंपराएं, उनके परस्पर संबंधित...

read more
विजयदेव नारायण साही और नई कविता आंदोलन : प्रस्तुति : जगन्नाथ दुबे

विजयदेव नारायण साही और नई कविता आंदोलन : प्रस्तुति : जगन्नाथ दुबे

  जगन्नाथ दुबेयुवा आलोचक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आलोचनात्मक लेख प्रकाशित। संप्रति असिस्टेंट प्रोफेसर। विजयदेव नारायण साही(1924-1982) तीसरा सप्तक के कवि और बहुआयामी प्रतिभा से संपन्न। नई कविता की जमीन और उसके मूल्यांकन के प्रतिमान तैयार करने वालों में एक...

read more
क्या भारतीय मध्यवर्ग विलुप्त हो रहा है : प्रस्तुति -जीतेश्वरी

क्या भारतीय मध्यवर्ग विलुप्त हो रहा है : प्रस्तुति -जीतेश्वरी

युवा लेखिका और शोधार्थी।विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समीक्षा, लेख प्रकाशित।देश की आजादी से पहले भारतीय मध्यवर्ग दो भागों में बंटा हुआ था। एक तरह का मध्यवर्ग अंग्रेजी राज में अपना हित साधने में लगा था, अंग्रेजों की गुलामी कर सुख-सुविधा जुटाना उसकी प्राथमिकता थी। दूसरी...

read more
साहित्य की जरूरत, प्रस्तुति : राहुल गौड़

साहित्य की जरूरत, प्रस्तुति : राहुल गौड़

युवा लेखक। खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में अध्यापन।साहित्य अपने अनुभवों और विचारों को अभिव्यक्तकरने का सबसे सशक्त रचनात्मक माध्यम है। सदियों से रचनाकारों ने आत्माभिव्यक्ति, सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक संरक्षण, शिक्षा, मनोरंजन आदि के उद्देश्य से साहित्यिक सृजन किया है।...

read more
हिंसा से घिरा विश्व, प्रस्तुति :मधु सिंह

हिंसा से घिरा विश्व, प्रस्तुति :मधु सिंह

  युवा लेखिका और संस्कृतिकर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय से हाल में डॉक्टरेट की उपाधि। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण।हिंसा एक ऐसी समस्या है जो आज पूरे विश्व को प्रभावित कर रही है। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे देश और समाज को...

read more
हिंदी के उच्च शिक्षण में गतिरोध : प्रस्तुति -जीतेश्वरी

हिंदी के उच्च शिक्षण में गतिरोध : प्रस्तुति -जीतेश्वरी

युवा लेखिका और शोधार्थी।विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समीक्षा, लेख प्रकाशित।इन दिनों उच्च शिक्षण संस्थानों में जिस तरह से हिंदी का पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है, वह बहुत सारे प्रश्नों को जन्म देता है। पिछले कई वर्षों से कॉलेज-विश्वविद्यालयों के हिंदी पाठ्यक्रमों के...

read more
महानगर : ऐश्वर्य और विध्वंस – प्रस्तुति : इबरार खान

महानगर : ऐश्वर्य और विध्वंस – प्रस्तुति : इबरार खान

रंगकर्मी, चित्रकार, लेखक एवं अनुवादक। विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं एवं आलेख प्रकाशित। पुस्तक ‘बाल पत्रिका नंदन की कहानियों का मूल्यांकन’ प्रकाशित।वैश्वीकरण के दौर में महानगरों की भूमिका बढ़ चुकी है। महानगरीकरण एक घटना भर नहीं है, बल्कि एक जीवंत बहुआयामी प्रक्रिया है।...

read more
हिंदी कहानी : उत्कृष्टता की खोज, प्रस्तुति : प्रज्ञा

हिंदी कहानी : उत्कृष्टता की खोज, प्रस्तुति : प्रज्ञा

युवा कथाकार और लेखिका। अद्यतन कहानी संग्रह ‘मालूशाही मेरा छलिया बुरांश’ और उपन्यास ‘काँधों पर घर’। नाट्य आलोचना से संबंधित कई किताबें। संप्रति  किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्याल में प्रोफेसर। कथा, उसकी आलोचना और पाठक से वह त्रिकोण पूरा होता है जिसे हम समग्रता में...

read more
उपभोक्तावादी विश्व में ‘कामायनी,’ प्रस्तुति : पूजा गुप्ता

उपभोक्तावादी विश्व में ‘कामायनी,’ प्रस्तुति : पूजा गुप्ता

महावीर प्रसाद द्विवेदी पर शोध कार्य। बंगवासी मॉर्निंग कॉलेज में शिक्षण।जयशंकर प्रसाद आधुनिक युग में लिख रहे थे। वे ‘कामायनी’ के माध्यम से पौराणिक युग के यथार्थ व्यक्त न करके अपने युग के यथार्थ व्यक्त कर रहे थे। अपने युग की अच्छी-बुरी प्रवृत्तियों के आधार पर ही...

read more