बहस
दलित चेतना की नई मंजिलें : मधु सिंह

दलित चेतना की नई मंजिलें : मधु सिंह

प्रस्तुति : मधु सिंह विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में एम.फिल. की शोध छात्रा। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण।आधुनिक युग विमर्शों का युग है। इस काल में शिक्षा और विज्ञान की प्रगति ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया है। फलस्वरूप साहित्य में...

read more
राष्ट्रवाद और संकटग्रस्त भाषाएं : अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी

राष्ट्रवाद और संकटग्रस्त भाषाएं : अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी

प्रस्तुति : अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी युवा भाषाविद। विगत एक दशक से भाषा-तकनीक से जुड़े विषयों पर लेखन। विश्वभारती, शांतिनिकेतन में कार्यरत। भारतीय ‘राष्ट्रवाद’ एक संरचना के रूप में स्वतंत्रता-संघर्षों से मुखर हुआ है, जिसमें उदारता, सहिष्णुता और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना...

read more
परिचर्चा : फणीश्वरनाथ रेणु का महत्व

परिचर्चा : फणीश्वरनाथ रेणु का महत्व

प्रस्तुति : संजय जायसवाल कवि और समीक्षक। विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर।   फणीश्वरनाथ रेणु आंचलिक उपन्यास और नई कहानी दौर के विशिष्ट कथाकार हैं। वे हिंदी के पहले कहानीकार हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान और टेक्नोलॉजी के प्रवेश का...

read more
बहस : वर्तमान विश्व में विज्ञान का हाल

बहस : वर्तमान विश्व में विज्ञान का हाल

प्रस्तुति : मनोज मोहन हिंदी के साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया में निरंतर सक्रिय। वर्तमान में सीएसडीएस की पत्रिका 'प्रतिमान : समय समाज संस्कृति'  के संपादकीय विभाग से संबद्ध। दुनिया में विज्ञान की जगह टेक्नोलॉजी का महत्व बढ़ा है और जैसे पश्चिमी देश ही एक बार फिर अपनी...

read more
बहस : नई शिक्षा – कैसा प्रस्थान चाहिए

बहस : नई शिक्षा – कैसा प्रस्थान चाहिए

प्रस्तुति : मनोज मोहन हिंदी के साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया में निरंतर सक्रिय। वर्तमान में सीएसडीएस की पत्रिका 'प्रतिमान : समय समाज संस्कृति'  के संपादकीय विभाग से संबद्ध।भारतीय शिक्षा की बात करें तो उसके तीन स्तर उभर कर आते है–स्कूली शिक्षा, उच्चशिक्षा और व्यावसायिक...

read more
बहस : बच्चों की दुनिया का हाल

बहस : बच्चों की दुनिया का हाल

प्रस्तुति : प्रतिभा सिंह शोध छात्रा, विकास अध्ययन केंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज।   पिछले अंक में हमने एक बहस शुरू की थी कि तेज़ी से बदलती इस दुनिया में क्या है बच्चों की दुनिया का हाल? ज्ञान, मूल्य, संवेदना, शक्ति की अपेक्षा करते बचपन की ‘पोलिटीकल...

read more