बहस
दलित आंदोलन की दिशाएं : प्रस्तुति – प्रदीप ठाकुर

दलित आंदोलन की दिशाएं : प्रस्तुति – प्रदीप ठाकुर

कवि और आलोचक। ‘कुसुम वियोगी की चुनिंदा कविताएं’ संपादित पुस्तक।है।तृतीय ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान से सम्मानित।केंद्रीय हिंदी निदेशालय, दिल्ली में मूल्यांकक के पद पर कार्यरत।भूमंडलीकरण के बाद से दुनिया तेजी से बदली है।समाज में रहने वाला मनुष्य अपनी-अपनी...

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साहित्य उत्सव का नया दौर, प्रस्तुति :मनोज मोहन

साहित्य उत्सव का नया दौर, प्रस्तुति :मनोज मोहन

कवि और पत्रकार।सीएसडीएस की पत्रिका ‘प्रतिमान’ से संबद्ध।साहित्य का भविष्य धीरे-धीरे गंभीर चिंतन का विषय बन गया है।बड़े साहित्य उत्सवों ने इसके भविष्य के संबंध में कुछ नए संकेत दिए हैं, जिनपर विस्तृत चर्चा जरूरी है।मैंने प्रयास किया, पर फेस्टिवल में जाने के अवसर और...

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भारतीय बुद्धिजीवियों का संकट प्रस्तुति :मनोज मोहन

भारतीय बुद्धिजीवियों का संकट प्रस्तुति :मनोज मोहन

कवि और पत्रकार।सीएसडीएस की पत्रिका ‘प्रतिमान’ से संबद्ध। भारतीय बुद्धिजीवी और देश के आम लोगों के बीच कितना संबंध बचा हुआ है, यह चिंता का विषय होना चाहिए।भारतीय बुद्धिजीवी समुदाय के साथ-साथ हिंदुस्तानी बौद्धिक समाज के बारे में सोचा जाना चाहिए कि वह किस संकट से गुजर रहा...

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संस्कृत साहित्य का समकाल : प्रस्तुति – प्रवीण पंड्या

संस्कृत साहित्य का समकाल : प्रस्तुति – प्रवीण पंड्या

संस्कृत कवि एवं समीक्षक।चार काव्य संग्रह सहित २५ पुस्तकें प्रकाशित। ‘संस्कृत काव्यशास्त्र और विमर्श’ हाल में प्रकाशित एक चर्चित पुस्तक। भारतीय भाषाओं में संस्कृत भाषा का अपना महत्व इसके साहित्य के कारण है।संस्कृत साहित्य उत्तर और दक्षिण भारत में समान रूप से रचित...

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हिंसा की सभ्यता, प्रस्तुति : रूपेश कुमार यादव

हिंसा की सभ्यता, प्रस्तुति : रूपेश कुमार यादव

विद्यासागर विश्वविद्यालय में शोधार्थी और संस्कृतिकर्मी। हिंसा एक आदिम प्रवृत्ति है।इसका लक्ष्य है, सामने वाले में वर्चस्व के लिए भय और आतंक पैदा करना।हिंसा की परिभाषा देते हुए कहा गया है कि हिंसा किसी व्यक्ति या समूह के विरुद्ध शारीरिक शक्ति का साभिप्राय उपयोग है।यह...

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हिंदी की भारतीयता, प्रस्तुति :आनंद गुप्ता

हिंदी की भारतीयता, प्रस्तुति :आनंद गुप्ता

युवा कवि।कई कविता संकलनों तथा प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।संप्रति उत्तर 24 परगना में अध्यापन।भाषा की अपनी राजनीति और संस्कृति होती है।वह इसी रास्ते पर चलकर अपना वर्चस्व बनाती है।भाषा भारतीय जनता को आपस में जोड़ने के लिए पुल का काम करती आई है।राष्ट्रीय...

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विश्व में हिंदी, प्रस्तुति : संजय जायसवाल

विश्व में हिंदी, प्रस्तुति : संजय जायसवाल

कवि, समीक्षक और संस्कृति कर्मी।विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर।आज दुनिया के लगभग 150 विश्वविद्यालयों और संस्थानों में हिंदी में पठन-पाठन एवं शोध के कार्य हो रहे हैं।विदेशों से कई हिंदी पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है।हाल में अबू धाबी के...

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नया विश्व : लोकतंत्र की संस्कृति, प्रस्तुति : मधु सिंह

नया विश्व : लोकतंत्र की संस्कृति, प्रस्तुति : मधु सिंह

विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में पीएच.डी. की शोध छात्रा।कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण।स्वतंत्रता के 75वें वर्ष पर यह परिचर्चा है।स्वतंत्रता और लोकतंत्र के बीच एक संबंध है।गांधी ने इनके संबंध की व्याख्या तरह-तरह से की है।उन्होंने किसानों, स्त्रियों और...

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युध्द और आज का विश्व प्रस्तुति : जीतेश्वरी

युध्द और आज का विश्व प्रस्तुति : जीतेश्वरी

शोध छात्रा, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग।विश्व में आज तक जितने युद्ध हुए हैं, उनके दुष्प्रभाव से कोई अछूता नहीं रहा है।सबसे ज्यादा महिलाएं, युवा और बच्चे इसके शिकार हुए हैं।आज  युद्ध का निहितार्थ केवल सत्ता और पूंजी पर अपना अधिकार बढ़ाते जाना है।सदियों से युद्ध ने...

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स्त्री विमर्श – नए मुद्दे प्रस्तुति : रूपेश कुमार यादव

स्त्री विमर्श – नए मुद्दे प्रस्तुति : रूपेश कुमार यादव

स्त्री विमर्श आधी आबादी के संघर्ष और उत्थान का विमर्श है।फ्रांसीसी राज्य क्रांति (1789) के तीन प्रमुख बिंदु थे- समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व।ये किसी भी देश में मानवता के हक में जरूरी हैं।पश्चिमी देश और भारत के इसी समानता के सिद्धांत के तहत स्त्री के हक और स्त्री...

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21 वीं सदी में लोक, प्रस्तुति :धीरेंद्र प्रताप सिंह

21 वीं सदी में लोक, प्रस्तुति :धीरेंद्र प्रताप सिंह

कवि, लेखक और संपादक।पोस्ट डॉक्टोरल फेलो, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।कथा-आलोचना, साहित्यिक समीक्षा के अलावा ‘धवल’ उपनाम से कविताएं भी लिखते हैं।दूरदर्शन और आकाशवाणी, प्रयागराज से वार्ता प्रसारित। इस आभासी संसार में लोक की बात करना सरासर अतीतजीविता की बात लगती है।आज जब हम...

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आदिवासी जीवन और साहित्य-नए मुद्दे प्रस्तुति :अनिता रश्मि

आदिवासी जीवन और साहित्य-नए मुद्दे प्रस्तुति :अनिता रश्मि

वरिष्ठ कथाकार।कहानी संग्रह ‘सरई के फूल’। आज विश्व भर में आदिवासी, आदिवासी साहित्य और आदिवासियत की चर्चा होती है।आदिवासी साहित्य अर्थात वह साहित्य जिसमें आदिवासियों का जीवन, समाज और दर्शन अभिव्यक्त हो।आदिवासी साहित्य तीन प्रकार का है- (1) आदिवासी विषय पर गैर-आदिवासी...

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स्त्री की कहानियां-जीवन, संघर्ष और स्वप्न : प्रस्तुति जीतेश्वरी

स्त्री की कहानियां-जीवन, संघर्ष और स्वप्न : प्रस्तुति जीतेश्वरी

शोध छात्रा, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग।आज की हिंदी कहानियों में स्त्री का जीवन, संघर्ष और स्वप्न मुखर रूप में व्यक्त हो रहा है।भूमंडलीकरण और बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव का भी चित्रण अपने बदलते स्वरूप में मौजूद है।यह सच है कि आज स्त्रियां पहले की तरह बेड़ियों में जकड़ी...

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नई कविता आंदोलन और नरेश मेहता : प्रस्तुति मधु सिंह

नई कविता आंदोलन और नरेश मेहता : प्रस्तुति मधु सिंह

प्रस्तुति : मधु सिंह विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में एम.फिल. की शोध छात्रा। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण। नई कविता में परंपरागत कविता से आगे नए भावबोध की अभिव्यक्ति के साथ ही नए मूल्यों और नए शिल्प विधानों का अन्वेषण किया गया है।भाव, विचार और भाषा...

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गांधी की चेतावनियां और नया भारत प्रस्तुति : सुशील कान्ति

गांधी की चेतावनियां और नया भारत प्रस्तुति : सुशील कान्ति

प्रस्तुति : सुशील कान्ति नाट्यकर्मी, वागर्थ के सहायक संपादक आज हम गांधी-सोच विहीन भारत के निवासी हैं।हम बचपन में पाठ पढ़ते हैं- झूठ बोलना अपराध है, चोरी करना पाप है, सदा सत्य बोलो, अहिंसा परमो धर्मः।लेकिन इन सबका नतीजा पूरी तरह उलटा है।बस हम गांधी के चश्मे को याद रख...

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जायसी का पद्मावत : पंचशती चर्चा / प्रस्तुति : अनूप कुमार

जायसी का पद्मावत : पंचशती चर्चा / प्रस्तुति : अनूप कुमार

प्रस्तुति : अनूप कुमार, युवा लेखक एवं विद्यार्थी जायसी ने अपने महाकाव्य ‘पद्मावत’ की रचना 500 साल पहले शुरू की थी, ‘सन नौ सौ सत्ताइस अहै, कथा आरंभ बैन कवि कहै’| वासुदेव शरण अग्रवाल के अनुसार नौ सौ सत्ताईस हिजरी, अर्थात- 1521 ईसवी| ‘पद्मावत’ की पंचशती के अवसर पर यह...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 2 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 2 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।'हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं' विषय पर आयोजित परिचर्चा के अंतर्गत पाठकों ने पिछले अंक में पढ़े...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 1 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 1 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।हिंदी लोकवृत्त एक जटिल संरचना है जिसमें हिंदीभाषी जन, उनकी भाषा, राजनीति, संस्कृति और इन सभी...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।‘हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं' विषय पर आयोजित बहस के अंतर्गत पाठकों ने अबतक अजय कुमार, अमितेश...

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हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं 3 : प्रस्तुति रमाशंकर सिंह

रमाशंकर सिंह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 2018 से 2020 तक फेलो। समाज, संस्कृति, राजनीति पर वायर हिन्दी, क्विंट हिन्दी और जनपथ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लगातार लेखन।‘हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं' विषय पर आयोजित बहस के अंतर्गत पाठकों ने अबतक अजय कुमार, अमितेश...

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