कहानी
उजाले की ओर : कीर्ति शर्मा

उजाले की ओर : कीर्ति शर्मा

राजस्थान की चर्चित लेखिका।हिंदी के साथ राजस्थानी में भी लेखन। ‘पिघलते लम्हों की ओट से’ तथा ‘बूंद भर सावन’ (हिंदी कथा संग्रह), ‘दोस्त का जादू’ (हिंदी बाल कथा संग्रह) प्रकाशित।साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित।शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापिका। दुष्यंत की...

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बांस का पौधा : धनंजय चोपड़ा

बांस का पौधा : धनंजय चोपड़ा

पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में विपुल कार्य।इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज के पाठ्यक्रम समन्वयक।हालिया प्रकाशित पुस्तकें, ‘कजरी लोक गायन’ और ‘संचार, शोध और मीडिया’। कहानी सुकेश और शुचि की है।दोनों अपने समय से जूझते हुए जिंदगी को बेहतर बनाने में...

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रैली : लाल बहादुर

रैली : लाल बहादुर

युवा कहानीकार।एक कहानी संग्रह ‘सड़क पर’ प्रकाशित।सामाजिक कार्यों में रुचि। उसे नहीं मालूम उसका क्या नाम है।कोई कागज-पत्र नहीं है उसके पास।वह पढ़ी-लिखी नहीं है।कभी स्कूल नहीं गई है, देखा भर है सड़क पर से।उसका बैंक, पोस्ट-आफिस में खाता नहीं है।न कोई जमीन है, न घर। वह बहुत...

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आखिरी पड़ाव के पहले : सुभाष चंद्र कुशवाहा

आखिरी पड़ाव के पहले : सुभाष चंद्र कुशवाहा

सुपरिचित कथाकार, संपादक और लोक-इतिहास के गंभीर अध्येता और लेखक। ‘लोकरंग’ वार्षिकी का १९९८ से निरंतर संपादन।अद्यतन पुस्तक ‘भील विद्रोह’ (संघर्ष के सवा सौ साल), ‘टंट्या भील’ (द ग्रेट इंडियन मून लाइटर)। ‘पिता जी के दिल के दोनों वाल्व खराब हो गए हैं, ठीक से पंप नहीं कर...

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इनाम : सिरिल मैथ्यू

इनाम : सिरिल मैथ्यू

वरिष्ठ कथाकार।बैंक की नौकरी से सेवानिवृत।दो कथा संग्रह प्रकाशित। १९७२ का ठिठुरता दिन था।घने कोहरे से लिपटा हुआ था मिशन स्कूल।परिसर से सड़क तक रंगीन झंडियां लहरा रही थीं।हाई स्कूल का हॉल लोगों से भरा हुआ था। कैसियो ट्यून के साथ स्टेज का पर्दा हटा।स्टेज के सेंटर में करुण...

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ईमान : जितेन ठाकुर

ईमान : जितेन ठाकुर

वरिष्ठ कथाकार।आठ कथा संग्रह, पांच उपन्यास, एक कविता संग्रह प्रकाशित।हिंदी के अतिरिक्त डोगरी में भी लेखन। रतिराम शाह की आवाज सुनकर चौंक गया हरिया अहीर।सुबह-सुबह दरवाजे पर उल्लू बोल गया।जाने क्या होगा।हड़बड़ाया हुआ हरिया हाथ बांध कर बाहर निकल आया और खुशामदी अंदाज में...

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सोद्देश्य कथाभाग : उन्नी आर, हिंदी अनुवाद : एन आर सेतुलक्ष्मी

सोद्देश्य कथाभाग : उन्नी आर, हिंदी अनुवाद : एन आर सेतुलक्ष्मी

मलयालम पटकथाकार, लेखक।  ‘भूतम’, ‘लीला’, ‘वाङ’, ‘मलयाली मेमोरियल’ आदि (लघु कथाएँ)। ‘प्रती पूवन कोज़ी’ (उपन्यास) आदि रचनाएं। अनुवादक : युवा लेखिका।संप्रति अतिथि प्राध्यापिका एन एस एस हिन्दू कॉलेज,चंगनाशेरी। (१)सच है यह?जी बिलकुल।तुमने देखा है?देखने लायक अब वहां कुछ बचा...

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भूख : हबीब कैफी

भूख : हबीब कैफी

पिछले पांच दशकों से उर्दू-हिंदी में लेखन।चार कथा संग्रह, नौ उपन्यास और एक शायरी संकलन ‘रास्ता मिल जाएगा’। लड़की यों महसूस करने लगी थी जैसे वह किसी गहरी अंधेरी गुफा में फिसलने की तरह उतरती चली जा रही है।अपनी हालत से वह आतंकित थी।वह चाहने लगी थी कि कोई सहारा मिले तो ठहर...

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मोमो वाली स्त्री : शेखर मल्लिक

मोमो वाली स्त्री : शेखर मल्लिक

युवा लेखक।कहानी संग्रह : ‘अस्वीकार और अन्य कहानियां’, ‘कस्बाई औरतों के किस्से’, ‘आधी रात का किस्सागो’ उपन्यास : ‘कालचिती’, ‘बापा की बेटी’।भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का युवा पुरस्कार- २०१९ से सम्मानित। छोटी-सी खिड़की पर उनका चेहरा झलका।गोरा, चौड़ा, बाएं नथुने पर बड़ी सी...

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पानी : उर्मिला शुक्ल

पानी : उर्मिला शुक्ल

अद्यतन कहानी संग्रह ‘मैं, फूलमती और हिजड़े’, अद्यतन उपन्यास ‘बिन ड्योढ़ी का घर’। लगातार पानी बहने से लान से होकर सड़क पर पानी रेला सा बह आया था।वे बेचैन हो उठीं।उठकर उनके गेट तक गईं।भीतर झांककर देखा, कोई सुगबुग दिखे तो बता दें कि... मगर भीतर कोई हलचल नहीं।हार कर लौट आईं,...

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सिंगरीली : पार्वती तिर्की

सिंगरीली : पार्वती तिर्की

रांची विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (हिंदी) के तौर पर कार्यरत। आषाढ़ की धनरोपनी का समय आ चुका था।धान के बीज रोपा के लिए निकाले जा रहे थे।लोग अपने बैलों को तैयार कर रहे थे।खेतों में डोभा का काम किया जा रहा था।सोसो गांव में धान की रोपाई लगभग शुरू हो चुकी थी।बिनको...

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बाज मर्तबा जिंदगी : प्रियंका ओम

बाज मर्तबा जिंदगी : प्रियंका ओम

तंज़ानिया (अफ्रीका) में रहवास।कहानी संग्रह ‘वो अजीब लड़की’ और ‘मुझे तुम्हारे जाने से नफ़रत है’  प्रकाशित। सुबह की मीटिंग में व्यस्त महेश के साइलेंट फ़ोन स्क्रीन पर उमा की तस्वीर कौंध-कौंध कर आ रही थी।वह फोन तभी करती है जब महेश कुछ भूल जाता है।घड़ी उसकी कलाई में बंधी है,...

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मुझ जैसी कोई : जयश्री रॉय

मुझ जैसी कोई : जयश्री रॉय

    दस कहानी संकलन, ५ उपन्यास, एक कविता संकलन प्रकाशित तथा ४ कहानी संकलनों का संपादन।अद्यतन उपन्यास ‘थोड़ी सी जमीन थोड़ा आसमान’। मैं उसे देखती रही थी, न जाने क्यों! कोई खास बात नहीं थी उसमें- व्हील चेयर पर बैठी एक उम्रदराज औरत, उतनी ही उदास जितनी कि शायद उसे...

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हाय तितली : सरसुराम, हिंदी अनुवाद :अलमेलु कृष्णन

हाय तितली : सरसुराम, हिंदी अनुवाद :अलमेलु कृष्णन

सरसुरामतमिल भाषा के जाने-माने लेखक। अनुवादक : हिंदी, मलयालम, संस्कृत, तमिल और अंग्रेजी भाषाओं में परस्पर अनुवाद।अखिल भारतीय अनुवाद परिषद का. ‘डा. गार्गी गुप्ता अनुवाद श्री सम्मान’। मैं अपनी ड्यूटी पर थाने के लिए निकल ही रही थी कि हेड कांस्टेबल दुरै का फोन आया। ‘मैडम!...

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दान-पुण्य : उर्मिला शिरीष

दान-पुण्य : उर्मिला शिरीष

    वरिष्ठ कथाकार।कहानी संग्रहों के अलावा उपन्यास, जीवनी तथा साक्षात्कार भी प्रकाशित।संप्रति स्वतंत्र लेखन।अद्यतन पुस्तक ‘उर्मिला शिरीष की लोकप्रिय कहानियां’। ‘तुम दान-पुण्य करती हो या नहीं?’ ‘करते हैं न।’ ‘कहां? क्या?’ ‘गरीबों और जरूरतमंदों को।’ ‘वह तो...

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स्टूल : रश्मि शर्मा

स्टूल : रश्मि शर्मा

  युवा लेखिका। ‘बंद कोठरी का दरवाजा’ (कहानी संग्रह) ‘नदी को सोचने दो’, ‘मन हुआ पलाश’ और ‘वक़्त की अलगनी पर’ (तीनों कविता-संग्रह) प्रकाशित।संप्रति - स्वतंत्र पत्रकारिता। सुनकर कुछ देर के लिए एकदम चुप सी हो गई मैं।फिर लगा, ऐसा भी क्या हो गया कि मां भुनभुना रही हैं...।...

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लौटना : संजय कुंदन

लौटना : संजय कुंदन

    प्रमुख कहानीकार।अद्यतन कहानी संग्रह ‘श्यामलाल का अकेलापन’, उपन्यास ‘तीन ताल’।संप्रति ‘नवभारत टाइम्स’, नई दिल्ली में सहायक संपादक। माथुर साहब ने रिटायर होते ही घोषणा की कि अब वह दिल्ली में नहीं रहना चाहते, वह अपने शहर नजीबाबाद लौट जाएंगे।वहीं...

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बबुआन : कमलेश

बबुआन : कमलेश

    सुपरिचित कहानीकार और पत्रकार।कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’।संप्रति ‘हिन्दुस्तान’, रांची में समाचार संपादक। उनके कई नाम थे। इतने नाम कि वे भी अपना असली नाम भूल गए।बचपन में छोटन सिंह, बबुआ सिंह और सरदार सिंह जैसे नाम।जवानी में नाम पड़ा बबुआन तो बुढ़ौती में बाबू...

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दो सौ गज की दूरी : शैलेंद्र अस्थाना

दो सौ गज की दूरी : शैलेंद्र अस्थाना

    वरिष्ठ रचनाकार। ‘सवाल सिर्फ शब्द नहीं’ (काव्य संकलन) तथा ‘नूरनक्श का मकबरा’ (कहानी संकलन) प्रकाशित।संप्रति : भारत सरकार की सेवा से अवकाशोपरांत स्वतंत्र लेखन, उपाध्यक्ष जनवादी लेखक संघ, झारखंड। यह तब की बात है जब दो गज की दूरी वाला टकसाली मुहावरा लोगों के...

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पथांतर : हरिशंकर राढ़ी

पथांतर : हरिशंकर राढ़ी

    ‘युधिष्ठिर का कुत्ता’ (व्यंग्य संग्रह), ‘दर्शन, दृष्टि और पांव (यात्रा संस्मरण) संप्रति: ‘समकालीन अभिव्यक्ति’ में सह संपादक। केतकी से मेरी मुलाकात पूरे बारह साल बाद हुई थी।बारह वर्ष यानी एक पूरा वनवास।हां, इसे एक पूरा वनवास मानना ही ठीक होगा।वनवास के लिए...

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