कहानी
बांग्ला कहानी नयनतारा : शीर्ष मुखोपाध्याय, अनुवाद : भोला प्रसाद सिंह

बांग्ला कहानी नयनतारा : शीर्ष मुखोपाध्याय, अनुवाद : भोला प्रसाद सिंह

लेखक(1967-2021) बांग्ला साहित्यकार और पत्रकार। ‘आजकाल’ और ‘स्टार आनंद’ मीडिया से जुड़े रहे।पिछले साथ कोरोना से मृत्यु। अनुवादकभोला प्रसाद सिंहवरिष्ठ लेखक और अनुवादक।लघु पत्रिका ‘कण’ निकालते रहे हैं।   कई दिनों से बदन को झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही थी।बाहर...

read more
तीजी : अवधेश प्रसाद सिंह

तीजी : अवधेश प्रसाद सिंह

वरिष्ठ लेखक, भाषाविद और अनुवादक। पीपल की फुनगी से उतरता सूरज अपना पीला चेहरा ईख के सूखे पत्तों में छिपाने की जुगत में था।दिन भर खेत-पथार में खटने के बाद गांव के किसान-मजदूर अब फरागत पाकर हाथ-पैर धो रहे थे।कुछ लोग अपने मवेशियों की नाद में चारे की आखिरी टोकरी डाल चुके...

read more
छतरी : अख़्तर आज़ाद

छतरी : अख़्तर आज़ाद

वरिष्ठ कथाकार।उर्दू और हिंदी दोनों में लेखन। ‘रावी’ पत्रिका का संपादन। जब भी बारिश होती छतरी आबशार के हाथों में चली आती। जिंदगी में पहली बारिश उस दिन हुई जिस दिन वह पैदा हुआ था।यह सब उसे मां ने बताया था कि तूफान के साथ इतनी तेज बारिश हुई थी कि लेडी डॉक्टर नर्सिंग होम...

read more
अज़ाब : विजयश्री तनवीर

अज़ाब : विजयश्री तनवीर

कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।प्रकाशित पुस्तकें - ‘तपती रेत पर’ (काव्य संग्रह), ‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ (कथा संकलन) जाने किसी की मन्नत फली थी या आह पड़ी थी कि आसमान ऐसा टूटकर बरस रहा था जैसे अबके बरसकर फिर बरसना ही न होगा।दोपहर में भी माहौल पर झुटपुटा...

read more
तिल का ताड़ : शिवेन्दु श्रीवास्तव

तिल का ताड़ : शिवेन्दु श्रीवास्तव

कवि तथा कहानीकार।विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। एक कविता संग्रह ‘यहां से इस तरह’। ‘फिस्स....!’ ऐसे ही हँस देता था दुलीचंद।यही उसकी फितरत थी।उस दिन भी वह जिला कचहरी में ऐसे ही हँस पड़ा, जब सफेद कमीज पहने एक नौजवान के कंधे पर किसी पंछी ने बीट कर दिया।नौजवान ने...

read more
फिंगर प्रिंट्स : पवन चौहान

फिंगर प्रिंट्स : पवन चौहान

      ‘शैल सूत्र’ (नैनीताल) त्रैमासिक पत्रिका का बाल साहित्य संपादन।पुस्तकें- ‘किनारे की चट्टान’ (कविता संग्रह), ‘भोलू भालू सुधर गया’ (बाल कहानी संग्रह), ‘वह बिलकुल चुप थी’ (कहानी संग्रह)। आज फिर से दादी सरकारी राशन के डिपो आई थी।दादी के फिंगर प्रिंट्स...

read more
कठघोड़वा : मुक्ता

कठघोड़वा : मुक्ता

      प्रकाशित कहानी संग्रह- ‘पलाश वन के घुँघरू’, ‘सीढ़ियों का बाजार’, ‘किस करवट’ आदि। काठ के घोड़े के ऊपर चढ़ा लाल, पीला, नीला रंगदार लहंगा लहराता तेरसू पैरों में घुंघरू बांधे नाच रहा था।घोड़े को नचाते हुए उसकी आंखें जुगनू-सी चमक उठती थीं।गोलाई में नाचते...

read more
गिफ्ट-विफ्ट : शंकर

गिफ्ट-विफ्ट : शंकर

      साहित्यिक पत्रकारिता और कथा-लेखन के सुप्रतिष्ठित व्यक्तित्व।परिकथा’ का संपादन। कृतियां - ‘थोड़ी सी स्याही’ (कविता-संग्रह), ‘पहिये’, ‘मरता हुआ पेड़’, ‘जगो देवता, जगो (सभी कहानी-संग्रह) ‘सड़क पर मोमबत्तियां’ (संपादकीय टिप्पणियों का संग्रह), ‘कहानी :...

read more
सलीबों का शहर : राजेंद्र राजन

सलीबों का शहर : राजेंद्र राजन

      सद्यः प्रकाशित कहानी संग्रह ‘पापा! आर यू ओके?’।   वे कुल चार थे।बी.एच.यू. के छात्र।अपने एक साथी की लाश को लेकर वे काशी के हरीशचंद्र घाट से कोई पांच सौ मीटर दूर थे।उन्हें यह आभास होने लगा था कि दिवंगत दोस्त की लाश को गंगा किनारे तक पहुंचाना और उसका...

read more
गुलदुपहरिया : शहंशाह आलम

गुलदुपहरिया : शहंशाह आलम

    चर्चित कथाकार।नौ कविता संग्रह और  ‘कवि का आलोचक’, ‘कविता की प्रार्थनासभा’, ‘कविता का धागा’ (आलोचना) प्रकाशित।संप्रति, बिहार विधान परिषद के प्रकाशन विभाग में। यह दोपहर जाड़े के दिनों वाला नहीं था, जून के महीने की गर्मी वाला था।आज सड़क पर यहां-वहां फैली हुई...

read more
क्यों : मिर्ज़ा हफीज़ बेग

क्यों : मिर्ज़ा हफीज़ बेग

    अद्यतन कहानी संग्रह, ‘मेरी कहानियां आभासी दुनिया से -1’।भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत। एकाएक कितने रंगबिरंगी सितारे मेरी आंखों के आगे नाच उठे।एकाएक मुझे कुछ समझ नहीं आया।वह एक सवाल एक धमाके के साथ मेरे दिलो दिमाग में उठ खड़ा हुआ- क्यों? इस सवाल ने मुझे...

read more
सात क्रांतिकारी : राजेंद्र श्रीवास्तव

सात क्रांतिकारी : राजेंद्र श्रीवास्तव

    प्रकाशित कृतियां :  ‘अभी वे जानवर नहीं बने’, ‘कोई तकलीफ़ नहीं’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’, ‘सपनों का गणित’ (कहानी-संग्रह)। ‘सुबह के इन्तज़ार  में’ (नाटक-संग्रह)। ‘काग़ज़ की ज़मीन पर’ (संपादित पुस्तक)। ‘सृजन की वीथिका’, ‘सृजन का उत्सव’ (आलोचना)। हम आठ थे। तब तक...

read more
हांका : मनीष वैद्य

हांका : मनीष वैद्य

    पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव।कहानी संग्रह- ‘टुकड़े-टुकड़े धूप’ और ‘फुगाटी का जूता’ प्रकाशित। पूरे गांव के लोग परेशान थे।उनकी आंखों की कोरों में खौफ टिका रहता।चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ नजर आतीं।डर उनके आसपास हरदम पसरा रहता।उनके दिमाग में...

read more
स्पेस : सुधांशु गुप्त

स्पेस : सुधांशु गुप्त

    30 साल तक पत्रकारिता के बाद स्वतंत्र लेखन।तीन कहानी संग्रह- ‘खाली कॉफी हाउस’, ‘उसके साथ चाय का आख़िरी कप’ और ‘स्माइल प्लीज़’ प्रकाशित। घर में मेरे हिस्से एक छोटा-सा टुकड़ा आया है।पांच फिट गुणा छह फिट होगा।मैं दिन भर यहीं बैठा सांस लेता हूँ।इस हिस्से में...

read more
वे दो : दिनेश पाठक

वे दो : दिनेश पाठक

    वरिष्ठ रचनाकार।अब तक दस कहानी संग्रह, तीन उपन्यास और एक संपादित पुस्तक।नवीनतम कहानी संग्रह-‘एक नदी थी यहां’।एसोसिएट प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त। दोनों को वयोवृद्ध कहा जाना चाहिए।पति की आयु अस्सी वर्ष हो गई है तो पत्नी भी पचहत्तर में चल रही है।एक तरह से...

read more
हाशिए के लोग : सुरेश बाबू मिश्रा

हाशिए के लोग : सुरेश बाबू मिश्रा

    वरिष्ठ लेखक।लगभग 11 पुस्तकें प्रकाशित। ‘वाणी एवं सृजन’ वार्षिक पत्रिका के संपादक। ठाकुर रिपुदमन सिंह बेचैनी से अपने चौपाल पर टहल रहे थे।उनके चेहरे पर चिंता और झुंझलाहट के भाव थे। पुश्तों से रमनगला के लोग उनके खेतों पर मजदूरी करते चले आ रहे थे।जो ठाकुर...

read more
विकास कथा : विनय सिंह

विकास कथा : विनय सिंह

    बैंक कर्मी।एक पुस्तक ‘किसी और देश में जोहांसबर्ग’, दक्षिण अफ्रीका से प्रकाशित।एक कहानी संग्रह ‘सुर्ख़ लाल रंग’ शीघ्र प्रकाश्य। कैशियर प्रवीण ने मोटरसाइकिल पहाड़ी के इस तरफ ही खड़ी कर दी, बमुश्किल एक कच्चा रास्ता वहां तक गया था, जिसपर बहुत संभलकर ही दो-पहिया...

read more
न खोली गई चिट्ठी : प्रेम रंजन अनिमेष

न खोली गई चिट्ठी : प्रेम रंजन अनिमेष

  भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित रचनाकार।कविता, कहानी, गीत, संस्मरण, नाटक आदि कई विधाओं की पुस्तकें प्रकाशित।संप्रति रिजर्व बैंक, मुंबई में अधिकारी। अरसे बाद जा रहे थे गांव साथ-साथ।इसलिए नहीं कि बाबू जी को देखने की इच्छा बलवती थी।संगिनी तो गांव जाना ही...

read more
हवा मिठाई : कुमार विश्वबंधु

हवा मिठाई : कुमार विश्वबंधु

    कवि, कथाकार और समीक्षक।बाल कविता संग्रह ‘इ इत्ता है, उ उत्ता है’  नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित।संप्रति ‘गवर्नमेंट कॉलेज ऑव एडुकेशन, वर्धमान’  पश्चिम बंगाल में एसोसिएट प्रोफेसर। शिवानी को बिस्कुट अच्छे लगते हैं और सोन पापड़ी भी अच्छी लगती है, लेकिन हवा...

read more
समझौता नहीं : सिद्धेश

समझौता नहीं : सिद्धेश

वरिष्ठ कहानीकार। कई कहानी संग्रह और बांग्ला से कई पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित। सामने वाले घर में दो युवक सुबह से काम पर लग जाते थे।एक बाहर के चबूतरे पर झाड़ू लगाता, दूसरा पानी से धोता।घर में औरतें नजर नहीं आतीं।दोनों जवान थे।मगर शादी नहीं की।एक मां थी जो...

read more