कहानी
कहो हां या ना : तोबियस वुल्फ़, अनुवाद : उपमा ऋचा

कहो हां या ना : तोबियस वुल्फ़, अनुवाद : उपमा ऋचा

पिछले एक दशक से लेखन में सक्रिय। संप्रति स्वतंत्र पत्रकार और अनुवादक तोबियस वुल्फ 19 जून 1945 को जन्मे तोबियस वुल्फ़ एक अमेरिकन राइटर और क्रिएटिव राइटिंग टीचर हैं। कहानियों लिखने के साथ-साथ वुल्फ़ ने संस्मरण और उपन्यास भी लिखे हैं। लेकिन ख़ासतौर पर वे अपने संस्मरणों के...

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कॉफिन : सुमंत रावल, अनुवाद : राजेंद्र निगम

कॉफिन : सुमंत रावल, अनुवाद : राजेंद्र निगम

        जन्म 14 नवंबर 1945। शासकीय सेवा में राजपत्रित अधिकारी रहे।कहानियाँ, उपन्यास, फिल्म-आलेख आदि पर सतत लेखन जारी रहा। कुल बाईस उपन्यास, दो कहानी संग्रह गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हुए।पिछले 24 अप्रैल 2021 कोकोरोना के कारण गुजरात के...

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अनबीता व्यतीत : हुस्न तबस्सुम निंहां

अनबीता व्यतीत : हुस्न तबस्सुम निंहां

चर्चित लेखिका। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्व विद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र में शोधरत।कहानी संग्रह-‘नीले पँखों वाली लड़कियाँ’,‘नर्गिस फिर नहीं आएगी’,‘सुनैना! सुनो ना....’, ‘गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता’। दो कविता संग्रह, दो उपन्यास। ‘जाने क्यों लगता है कि मैं...

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औरत का घर : जसिंता केरकेट्टा

औरत का घर : जसिंता केरकेट्टा

युवा लेखिका,स्वतंत्र पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता। ‘यह किसका बच्चा है?’ आम के पेड़ के नीचे बैठे पंच सलगो से पूछ रहे हैं। सलगो दो बेटों की मां है। पति मर चुका है। अब वह फिर पेट से है। गांव में पंचायत बैठी है। गांव के लोग कभी सलगो तो कभी पंच का चेहरा ताक रहे हैं। सलगो...

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दर-ब-दर : ज़हीर कुरेशी

दर-ब-दर : ज़हीर कुरेशी

5अगस्त 1950को चन्देरी (म.प्र.) में जन्म। गजलकार के रूप में अधिक परिचित। कुल ग्यारह गजल संग्रह प्रकाशित। ‘एक टुकड़ा धूप’, ‘भीड़ में सबसे अलग, ‘पेड़ तनकर भी नहीं टूटा’ जैसे गजल संग्रह काफी चर्चित हुए। हाल ही में कोरोना से अकाल मृत्यु। 1 जून, 2020 से अनलॉक-1 घोषित हो...

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कीचड़ : सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव

कीचड़ : सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव

तीन दशक से पत्रकारिता में सक्रिय रहते हुए हाल तक आजतक ग्रुप के वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे। कवि के रूप में इनके दो कविता संग्रह ‘रोटियों के हादसे’, ’अंधेरे अपने-अपने’ प्रकाशित। कोरोना की चपेट में आकर अकाल मृत्यु। पूरा जूता कीचड़ में सन गया। बारिश तो हुई नहीं थी, इसलिए उसे...

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बरगद एक नन्हा पौधा है : श्रीधर करुणानिधि

बरगद एक नन्हा पौधा है : श्रीधर करुणानिधि

युवा कथाकार। प्रकाशित पुस्तकें, ‘वैश्वीकरण और हिंदी का बदतलता हुआ स्वरूप’(आलोचना) और ‘खिलखिलाता हुआ कुछ’ (कविता-संग्रह)। गया कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर।उनका नाम इतना जवान था कि उन्हें बाबा कहने की इच्छा नहीं होती। यद्यपि थे वे बाबा ही। एक उम्र के बाद दाढ़ी-मूंछ और...

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अध्यापक जी : ज्ञानप्रकाश विवेक

अध्यापक जी : ज्ञानप्रकाश विवेक

गजल लेखन में सक्रिय। गजल, उपन्यास, कहानी, आलोचना आदि की तीस पुस्तकें प्रकाशित। अद्यतन गजल संग्रह ‘घाट हजारों इस दरिया के’।वो किसी प्राइवेट स्कूल से रिटायर हुए अध्यापक थे। उम्र साठ-बासठ, लेकिन तंगदस्ती और तंगहाली ने उन्हें ज्यादा बूढ़ा बना दिया था। उनके दोनों कंधे थोड़ा...

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शतरंज की एक बाजी : मिर्जा हफीज बेग

शतरंज की एक बाजी : मिर्जा हफीज बेग

अद्यतन कहानी संग्रह, ‘मेरी कहानियां आभासी दुनिया से - 1’। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत। बाजी दाऊ हीरालाल ने बादशाह के सामने के प्यादे को दो घर आगे बढ़ाया। चोवाराम ने दाऊ जी की तरफ देखा मानो वह दाऊ जी के दिमाग को पढ़ने की कोशिश कर रहा हो। फिर वह मुस्कराया जैसे वह जान...

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ढलती शाम का सूरज : निशि रंजन ठाकुर

ढलती शाम का सूरज : निशि रंजन ठाकुर

कहानीकार के अलावा पत्रकार। प्रभात खबर, भागलपुर में न्यूज एडिटर।वहां बिलकुल नर्म धूप थी। ठंड की शुरुआत में इस नर्म धूप से सुखद कुछ नहीं हो सकता था। जेपी चबूतरे पर और पसर कर बैठ गया। सैंडिस कंपाउंड के इस हिस्से से जेपी को गजब का प्यार था। गुलमोहर व अमलताश के पेड़ों से...

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बदलाव : धीरज कुमार

बदलाव : धीरज कुमार

प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य एवं लेखन।पहले गांव में ऊंची जाति वालों के घरों में विवाहोत्सव के समय अन्य जातियों के लोगों के लिए कोई न कोई काम जरूर हुआ करता था। जैसे कहार जाति उनके घरों में पानी भरते थे। कहारिन घर के कामों में मदद करती थी। लोहार घर से विदा हो रही...

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जापानी कहानी : फैक्टरी टाउन

जापानी कहानी : फैक्टरी टाउन

बेत्सुयाकू मिनोरु युद्धोपरांत जापान के एक प्रमुख नाटककार, उपन्यासकार और लेखक। जापान में ‘एब्सर्ड थियेटर की स्थापना में सहायक।अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण : विजय शर्मा प्रमुख समीक्षक और अनुवादक। आलोचना पुस्तक  : ‘क्षितिज के उस पार से’ एक दिन, बस यूं ही, एक छोटी-सी...

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तूफानी के बाद दुनिया : सुभाष चंद्र कुशवाहा

तूफानी के बाद दुनिया : सुभाष चंद्र कुशवाहा

सुपरिचित कहानीकार। किसानों और आदिवासियों पर विशेष शोधपरक कार्य। अद्यतन प्रकाशित कहानी संग्रह, लाला हरपाल और अन्य कहानियां।यह कहानी सुल्तानपुर गांव के तूफानी मास्टर और परमेश्वरपुर के पुराने तालुकेदार, भरत सेठ की अनूठी दोस्ती वृत्तांत से शुरू की जा रही है। तूफानी मास्टर...

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कंधे : विवेक द्विवेदी

कंधे : विवेक द्विवेदी

वरिष्ठ कहानीकार। चार कहानी संग्रह, तीन उपन्यास। अद्यतन कहानी संग्रह ‘रोहिनी राग’। पूरे गांव में कंक्रीट की सड़कें बन गई थीं। पांच हजार जनसंख्या वाले इस नेबूहा गांव में छोटी और बड़ी सभी प्रकार की जातियाँ वर्षों से रहती चली आ रही हैं। परंतु सारी छोटी जातियाँ तो ब्राह्मण...

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ठांव : शंकर

ठांव : शंकर

साहित्यिक पत्रकारिता और कथा-लेखन के सुप्रतिष्ठित व्यक्तित्व। पहले ‘अब’ के बाद अभी ‘परिकथा’ का संपादन। कृतियां, ‘थोड़ी सी स्याही’ (कविता-संग्रह), ‘पहिये’, ‘मरता हुआ पेड़’, ‘जगो देवता, जगो (सभी कहानी-संग्रह) ‘सड़क पर मोमबत्तियां’ (संपादकीय टिप्पणियों का संग्रह), ‘कहानी :...

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ईरानी कहानी इंतजार : सईद यवाकोल

ईरानी कहानी इंतजार : सईद यवाकोल

अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण : विजय शर्मा प्रमुख समीक्षक और अनुवादक। आलोचना पुस्तक  : ‘क्षितिज के उस पार से’ हर महीने की तरह वह अपने बेटे के पास आया है। खाली कमरे में अकेले बैठे हुए वह अपने मोटे शीशे के चश्में से ईरानी कालीन की पुरानी आत्मा में बुने हुए बदरंग फूलों को...

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लालटेन मार्च : उर्मिला शिरीष

लालटेन मार्च : उर्मिला शिरीष

वरिष्ठ कथाकार। कहानी संग्रहों के अलावा जीवनी तथा साक्षात्कार भी प्रकाशित। शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल में प्राध्यापक।धूप... गरमी और भीड़। बीमार लोगों की भीड़! भीड़ की चीख-चिल्लाहट। कूलना-कराहना। कितना भी मना करो पर सब एक दूसरे...

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सरई फूल : अनिता रश्मि

सरई फूल : अनिता रश्मि

सुपरिचित कथाकार। अद्यतन काव्य संग्रह ‘अब ख्वाब नए हैं’।‘मुझे तुम अपनी पूरी बस्ती दिखलाओगी?’ ‘हाँ बाबू, आपको घूमने का बहुत सौख है ना? चलो।’ उसके नूपुर की गूंज आगे-आगे, मैं पीछे-पीछे। पहाड़ी के ऊपर से दिखते उसके घर एवं आस-पास के घरों की लघुता देख मुझे हँसी आ गई। मैं जोर...

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बस एक फोटो : क्षमा शर्मा

बस एक फोटो : क्षमा शर्मा

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार। बाल पत्रिका ‘नंदन’ की कार्यकारी संपादक रहीं।ठंड की कड़-कड़ और कंपकपी और ऊपर से दौड़ती मेट्रो। मेट्रो की लाइन बीच में आ गई वरना तो बाल्कनी से ही खेतों में फैली हरियाली, उगता सूरज, यमुना की एक पतली-सी लकीर, और उसके पार बहुमंजिली इमारतें...

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इनरासन की परी : कमलेश

इनरासन की परी : कमलेश

सुपरिचित कहानीकार और पत्रकार। कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’। संप्रति ‘हिन्दुस्तान’ रांची में समाचार संपादक।कम की दवाई है बेटा, अधिक की दवाई नहीं। सुबह के साढ़े नौ बजे नहीं कि महेसर हलवाई की आवाज गूंज जाती। आवाज भी इतनी तेज कि पूरा रामरेखा घाट जान जाता कि महेसर हलवाई के...

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