कहानी
बदलाव : धीरज कुमार

बदलाव : धीरज कुमार

प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य एवं लेखन।पहले गांव में ऊंची जाति वालों के घरों में विवाहोत्सव के समय अन्य जातियों के लोगों के लिए कोई न कोई काम जरूर हुआ करता था। जैसे कहार जाति उनके घरों में पानी भरते थे। कहारिन घर के कामों में मदद करती थी। लोहार घर से विदा हो रही...

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जापानी कहानी : फैक्टरी टाउन

जापानी कहानी : फैक्टरी टाउन

बेत्सुयाकू मिनोरु युद्धोपरांत जापान के एक प्रमुख नाटककार, उपन्यासकार और लेखक। जापान में ‘एब्सर्ड थियेटर की स्थापना में सहायक।अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण : विजय शर्मा प्रमुख समीक्षक और अनुवादक। आलोचना पुस्तक  : ‘क्षितिज के उस पार से’ एक दिन, बस यूं ही, एक छोटी-सी...

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तूफानी के बाद दुनिया : सुभाष चंद्र कुशवाहा

तूफानी के बाद दुनिया : सुभाष चंद्र कुशवाहा

सुपरिचित कहानीकार। किसानों और आदिवासियों पर विशेष शोधपरक कार्य। अद्यतन प्रकाशित कहानी संग्रह, लाला हरपाल और अन्य कहानियां।यह कहानी सुल्तानपुर गांव के तूफानी मास्टर और परमेश्वरपुर के पुराने तालुकेदार, भरत सेठ की अनूठी दोस्ती वृत्तांत से शुरू की जा रही है। तूफानी मास्टर...

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कंधे : विवेक द्विवेदी

कंधे : विवेक द्विवेदी

वरिष्ठ कहानीकार। चार कहानी संग्रह, तीन उपन्यास। अद्यतन कहानी संग्रह ‘रोहिनी राग’। पूरे गांव में कंक्रीट की सड़कें बन गई थीं। पांच हजार जनसंख्या वाले इस नेबूहा गांव में छोटी और बड़ी सभी प्रकार की जातियाँ वर्षों से रहती चली आ रही हैं। परंतु सारी छोटी जातियाँ तो ब्राह्मण...

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ठांव : शंकर

ठांव : शंकर

साहित्यिक पत्रकारिता और कथा-लेखन के सुप्रतिष्ठित व्यक्तित्व। पहले ‘अब’ के बाद अभी ‘परिकथा’ का संपादन। कृतियां, ‘थोड़ी सी स्याही’ (कविता-संग्रह), ‘पहिये’, ‘मरता हुआ पेड़’, ‘जगो देवता, जगो (सभी कहानी-संग्रह) ‘सड़क पर मोमबत्तियां’ (संपादकीय टिप्पणियों का संग्रह), ‘कहानी :...

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ईरानी कहानी इंतजार : सईद यवाकोल

ईरानी कहानी इंतजार : सईद यवाकोल

अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण : विजय शर्मा प्रमुख समीक्षक और अनुवादक। आलोचना पुस्तक  : ‘क्षितिज के उस पार से’ हर महीने की तरह वह अपने बेटे के पास आया है। खाली कमरे में अकेले बैठे हुए वह अपने मोटे शीशे के चश्में से ईरानी कालीन की पुरानी आत्मा में बुने हुए बदरंग फूलों को...

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लालटेन मार्च : उर्मिला शिरीष

लालटेन मार्च : उर्मिला शिरीष

वरिष्ठ कथाकार। कहानी संग्रहों के अलावा जीवनी तथा साक्षात्कार भी प्रकाशित। शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल में प्राध्यापक।धूप... गरमी और भीड़। बीमार लोगों की भीड़! भीड़ की चीख-चिल्लाहट। कूलना-कराहना। कितना भी मना करो पर सब एक दूसरे...

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सरई फूल : अनिता रश्मि

सरई फूल : अनिता रश्मि

सुपरिचित कथाकार। अद्यतन काव्य संग्रह ‘अब ख्वाब नए हैं’।‘मुझे तुम अपनी पूरी बस्ती दिखलाओगी?’ ‘हाँ बाबू, आपको घूमने का बहुत सौख है ना? चलो।’ उसके नूपुर की गूंज आगे-आगे, मैं पीछे-पीछे। पहाड़ी के ऊपर से दिखते उसके घर एवं आस-पास के घरों की लघुता देख मुझे हँसी आ गई। मैं जोर...

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बस एक फोटो : क्षमा शर्मा

बस एक फोटो : क्षमा शर्मा

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार। बाल पत्रिका ‘नंदन’ की कार्यकारी संपादक रहीं।ठंड की कड़-कड़ और कंपकपी और ऊपर से दौड़ती मेट्रो। मेट्रो की लाइन बीच में आ गई वरना तो बाल्कनी से ही खेतों में फैली हरियाली, उगता सूरज, यमुना की एक पतली-सी लकीर, और उसके पार बहुमंजिली इमारतें...

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इनरासन की परी : कमलेश

इनरासन की परी : कमलेश

सुपरिचित कहानीकार और पत्रकार। कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’। संप्रति ‘हिन्दुस्तान’ रांची में समाचार संपादक।कम की दवाई है बेटा, अधिक की दवाई नहीं। सुबह के साढ़े नौ बजे नहीं कि महेसर हलवाई की आवाज गूंज जाती। आवाज भी इतनी तेज कि पूरा रामरेखा घाट जान जाता कि महेसर हलवाई के...

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झब्बू : उन्मेष कुमार सिन्हा

झब्बू : उन्मेष कुमार सिन्हा

युवा रचनाकार। एक आलोचना पुस्तक ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास और भारतीय राजनीति’। लोग उसे झब्बू कहते थे। दस-ग्यारह साल का रहा होगा। सुबह-सुबह ही वह छतरीवाले विशाल मकान के गेटमैन के पास पहुंच गया था। भूरे रंग की मैली शर्ट, देह की जामुनी रंगत से मिली हुई। दो बटन छोड़कर...

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बांग्ला कहानी : पिता

बांग्ला कहानी : पिता

तमाल बंद्योपाध्याय, बांग्ला के प्रसिद्ध कथाकार। चर्चित उपन्यास - ‘उत्तरपुरुष’ और ‘कम्पासवाला’।अनुवाद : संजय राय    पिता कभी नहीं मरते। वे अपनी संतानों में बचे रहते हैं। बचे रहते हैं उनकी बुरी आदतों में। विशेष भाव-भंगिमाओं में भी बचे रहते हैं। मैं बिलकुल अभी जिस तरह...

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लकड़ी का घोड़ा : आयशा आरफीन

लकड़ी का घोड़ा : आयशा आरफीन

युवा कहानीकार और पत्रकार सफर धनबाद तक का है। वहाँ तक मेरे घर से डायरेक्ट कोई फ्लाइट नहीं जाती। ट्रेन से रिजर्वेशन कराया है। कोई ख़ास दूर नहीं है धनबाद। आराम से जाया जा सकता है ट्रेन से। मगर मसला ये है कि ट्रेन का नाम सुनते ही मुझे घबराहट होने लगती है। ट्रेन को, रेलवे...

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कालू कलबंसिया : पानू खोलिया

कालू कलबंसिया : पानू खोलिया

(1939-2020) साठोत्तरी दौर के एक चर्चित कथाकार।  तीन कहानी-संग्रह और चार उपन्यास प्रकाशित। कुमाऊँ अंचल से संबद्ध होने के कारण पहाड़ी जीवन की संस्कृति और भाषा की समृद्ध झलक उनकी कहानियों में है। ‘पनचक्की’, ‘तुन महाराज’, ‘सीसकटी’, ‘गुनो लौट गई’ जैसी कहानियों के लिए विशेष...

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डायरी में नीलकुसुम : पंकज सुबीर

डायरी में नीलकुसुम : पंकज सुबीर

चर्चित कथाकार। अद्यतन उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था’ और अद्यतन कहानी संग्रह- ‘अभी तुम इश्क़ में हो।’ संप्रति : संपादक - विभोम स्वर, शिवना साहित्यिकी ‘वसंत किसी मौसम का नाम नहीं है, वसंत जीवन की एक अवस्था का नाम है...’ डायरी के पहले ही पन्ने पर यह लिखा हुआ है।...

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जश्न : अनंत कुमार सिंह

जश्न : अनंत कुमार सिंह

वरिष्ठ कथाकार और ‘जनपथ’ पत्रिका के संपादक। घंटों, दिनों, महीनों ही नहीं, वर्षों से जकड़ा तनाव बिलकुल सामान्य हो गया। यह तो सच है कि किसी का लड़का अगर नौकरी पाकर अपने घर की समस्याओं से पाला झाड़कर विदेश, महानगर या फिर घर से दूर बस गया है तब भी पीड़ा और अगर नौकरी की तलाश...

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कंजिया : नरेश कौशिक

कंजिया : नरेश कौशिक

समाचार संपादक/ प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया (पीटीआई) की हिंदी सेवा ‘भाषा’  कंजिया ने सिर पर बंधा मुरैठा उतारा और सड़क पर खड़े हाथ ठेले का सहारा लेकर माथे का पसीना पोंछा। पजामे की जेब से खैनी की डिब्बी निकाली और हथेली पर मसलने लगा। खैनी को चुटकी में भरा और मुंह में एक ओर दबा...

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विद्रोही : सुशीला गुप्ता

विद्रोही : सुशीला गुप्ता

‘हिंदुस्तानी ज़बान’ की पूर्व संपादक। संप्रति स्वतंत्र लेखन।‘मम्मी, कानपुर से पापा ने वाट्सएप पर मेसेज भेजा है।’‘.............’‘पूछोगी नहीं कि क्या मेसेज है?’‘बता।’‘पढ़ती हूँ, लो सुनो- प्रिय बेटी श्वेता,एक युग बीत गया तुमसे जुदा हुए। तुम पूछोगी, क्या कभी मेरी याद आती...

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कन्नड़ कहानी : गंध

कन्नड़ कहानी : गंध

कर्कि कृष्णमूर्ति पेशे से इंजीनियर। कन्नड के हाल के कहानीकारों में नए तेवर के रचनाकार के रूप में पहचान। अब तक दो कहानी-संग्रह प्रकाशित।डी.एन.श्रीनाथ कन्नड-हिन्दी में परस्पर अनुवाद। अब तक 80 पुस्तकें प्रकाशित। साहित्य अकादमी का अनुवाद पुरस्कार.शृंग की उम्र तीन साल की...

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कन्नड़ कहानी : छोटे स्वामी की गलती

कन्नड़ कहानी : छोटे स्वामी की गलती

के.वी. तिरुमलेश कन्नड कवि, कहानीकार और समीक्षक। कन्नड़ में तिरुमलेश नव्य कवि और कहानीकार के रूप में परिचित। मुखवाड़गलू, वठारा, अवधा, सम्मुख आदि इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। डी.एन.श्रीनाथ कन्नड-हिन्दी में परस्पर अनुवाद। अब तक 80 पुस्तकें प्रकाशित। साहित्य अकादमी का अनुवाद...

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