कहानी
एक सुनहरा पेड़ :अना मारिया मातुते (स्पेनी कहानी), अनुवाद :शाइस्ता प्रवीण

एक सुनहरा पेड़ :अना मारिया मातुते (स्पेनी कहानी), अनुवाद :शाइस्ता प्रवीण

अना  मारिया मातुते (1925-2014)  प्रसिद्ध स्पेनी उपन्यासकार। बच्चों और युवाओं के लिए कई रचनाएँ लिखीं और उनकी रचनाओं में अक्सर बच्चों की दृष्टि से समाज की कठोर वास्तविकताओं को दिखाया गया है। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में ‘मासूम बच्चे’, ‘पहली स्मृति’, ‘भूला हुआ राजा गुदू’ ,...

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शाल-वन की शालभंजिका : पंकज सुबीर

शाल-वन की शालभंजिका : पंकज सुबीर

    चर्चित कथाकार। उपन्यास- ‘ये वो सहर तो नहीं’, ‘अकाल में उत्सव’, ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क पे नाज था’, ‘रूदादे-सफर’। कहानी संग्रह- ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’, ‘महुआ घटवारिन और अन्य कहानियां’, कसाब डॉट गांधी एट यरवदा डॉट इन’ सहित व्यंग्य संग्रह, यात्रा वृत्तांत, कविता...

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राजस्थानी कहानी ‘बांथ’ : मदन गोपाल लढ़ा, अनुवाद : स्वाति

राजस्थानी कहानी ‘बांथ’ : मदन गोपाल लढ़ा, अनुवाद : स्वाति

  मदन गोपाल लढ़ावरिष्ठ कवि, कहानीकार और आलोचक। राजस्थानी और हिंदी में कई किताबें प्रकाशित। साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित। स्वातिराजस्थानी और हिंदी में परस्पर अनुवाद। कुछ रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। आकाशवाणी से जुड़ाव। ‘यहीं था हमारे पूर्वजों...

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सब हो जाएगा : सरोजिनी नौटियाल

सब हो जाएगा : सरोजिनी नौटियाल

    वरिष्ठ लेखिका। ‘अब न नसैहों’, ‘धीरे-धीरे मना’ (कहानी संग्रह), दृष्टि (निबंध संग्रह)। ‘मम्मी, आपको कितना टाइम लगेगा? मुझे भूख लग रही है।’ ‘बेटा, मैं मीटिंग में हूँ...थोड़ी देर रुक जाओ, मैं खुद बात करूंगी’, कहते हुए मेज की साइड में झुकी पल्लवी ने फोन बंद कर...

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अंतिम इच्छा : दामोदर खड़से

अंतिम इच्छा : दामोदर खड़से

    वरिष्ठ लेखक। पांच उपन्यास, नौ कहानी संग्रह, ग्यारह कविता संग्रह, चार भेंटवार्ताएं, दो साक्षात्कार और एक समीक्षा ग्रंथ प्रकाशित। संप्रति स्वतंत्र लेखन।     आज अभिजीत के अस्पताल के उद्घाटन पर शहर के नामी-गिरामी लोगों ने शिरकत की। शहर के मेयर,...

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बांग्ला कहानी ‘डायनासोर के वंशज’ : श्यामल भट्टाचार्य, अनुवाद : कुमार शाश्वत

बांग्ला कहानी ‘डायनासोर के वंशज’ : श्यामल भट्टाचार्य, अनुवाद : कुमार शाश्वत

  श्यामल भट्टाचार्य(जन्म 1964, अगरतला) प्रख्यात बांग्ला लेखक, अनुवादक और भाषाविद। ये अपने विविध बहुभाषी कार्यों के लिए जाने जाते हैं। इनकी पकड़ हिंदी, पंजाबी और डोगरी भाषाओं पर भी है। भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी। ‘बुखारी’ और ‘लोद्रवर कचकची’ जैसे महत्वपूर्ण...

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हादसे के बाद : अनामिका प्रिया

हादसे के बाद : अनामिका प्रिया

    कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तक- ‘हिंदी कथा साहित्य और झारखंड’ संप्रति झारखंड के रामगढ़ कॉलेज के हिंदी विभाग में अध्यक्ष।     हाउस लोन का अंतिम इंस्टॉलमेंट जमा कर बैंक से नो ड्यूज लेकर निधि प्रकाश गाड़ी की तरफ बढ़ी। वह...

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सही या गलत : कैलाश बनवासी

सही या गलत : कैलाश बनवासी

सुपरिचित कहानीकार। आठ कहानी संग्रह और दो उपन्यास सहित सिनेमा पर भी एक पुस्तक ‘सिनेमा भीतर सिनेमा’ प्रकाशित। संप्रति अध्यापन।   ऑफिस से शाम में घर पहुंचा ही था कि विवेक, मेरे बेट का फोन आ गया, ‘हां पापा, हमलोग थोड़ी देर हुए कोलकाता पहुंच गए हैं और अपने होटल में...

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आप निगरानी में हैं (मलयालम) : चंद्रमती, अनुवाद : सुमित पी. वी.

आप निगरानी में हैं (मलयालम) : चंद्रमती, अनुवाद : सुमित पी. वी.

चंद्रमतीकेरल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित मलयालम की वरिष्ठ कहानीकार। प्रमुख रचनाएं - स्वयं-स्वंतम, तट्टाराक्कुटियिले विग्राहंगल, वेताला कथाकल (उपन्यासिका), ओषुकाते ओरु पुषा (उपन्यास), ञन्डुकालुटे नाट्टिल ओरिटावेला, निंगल निरीक्षणात्तिलानु...

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टिटकी : जयमाला

टिटकी : जयमाला

    विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। कुछ वर्षों तक पत्रकारिता के बाद पूर्णकालिक लेखन। ट्रेंच ट्रेंच ट्रेंच... ट्रेंच ट्रेंच ट्रेंच जानी-पहचानी-सी ध्वनि ने मेरी नींद में दखल दिया तो चौंककर मैं चारों ओर देखने लगी। किसी अनाम-सी जगह पर ट्रेन रुकी हुई...

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शाख़सार : दिव्या विजय

शाख़सार : दिव्या विजय

    युवा और चर्चित लेखिका। तीन कहानी संग्रह ‘अलगोज़े की धुन पर’, ‘सगबग मन’ और ‘तुम बारहबानी’। डायरी ‘दराज़ों में बंद जिंदगी’। नाटकों में अभिनय। संप्रति स्वतंत्र लेखन।   सुस्त दुपहरी में मुहल्ले की संकरी सड़कें चुप पड़ी थीं। इक्का-दुक्का बाइक सन्नाटे को कुछ...

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उबाल : शिवेंदु श्रीवास्तव

उबाल : शिवेंदु श्रीवास्तव

      कवि तथा कहानीकार। एक कविता संग्रह ‘यहां से इस तरह’ और एक कहानी संग्रह ‘पीली पर्ची’ प्रकाशित। जैव विविधता विषय पर एक पुस्तक।   कजरी आज देर से सोकर उठी। फर्श, बिस्तर, सब गंदे हो गए थे, देर रात तक वह सफाई करती रही, सड़ी-सी महक जा ही नहीं रही थी।...

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जहर (ओड़िया) : ममतामयी चौधरी, अनुवाद : प्रदीप कुमार राय

जहर (ओड़िया) : ममतामयी चौधरी, अनुवाद : प्रदीप कुमार राय

ममतामयी चौधरीओड़िआ के प्रतिष्ठित कथाकार और कवयित्री। साहित्य की विभिन्न विधाओं में कई पुस्तकें प्रकाशित।ओड़िशा साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा अन्य कई पुरस्कारों से सम्मानित। प्रदीप कुमार रायबैंक से सेवानिवृत्त अधिकारी। अनूदित रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।...

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दो घरों का एक घर : दिनेश पाठक

दो घरों का एक घर : दिनेश पाठक

    वरिष्ठ रचनाकार। अब तक दस कहानी संग्रह, तीन उपन्यास और एक संपादित पुस्तक। नवीनतम कहानी संग्रह-‘एक नदी थी यहां’। एसोसिएट प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त। दिन खाली था और सन्नाटा भरा था। कुछ भी काम करने का मन नहीं हुआ तो उन्होंने एक बहुत पुरानी अलबम उठा ली। उसे...

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तिरिल : चाहत अन्वी

तिरिल : चाहत अन्वी

    युवा कवयित्री।दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया में शोधार्थी। 97 की गर्मियों की धूप में सोमा ने तिरिल को पहली बार देखा था। अपने नए स्कूल में। उसके पिता का ट्रांसफर हर तीन साल में होता रहता था। हर तीन साल में उसकी नन्ही जड़ें जमीन में नमी की तलाश...

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आत्मक्षरण : अरुणेंद्र नाथ वर्मा

आत्मक्षरण : अरुणेंद्र नाथ वर्मा

    वरिषठ कथाकार। अंग्रेज़ी में उपन्यास ‘द लूपहोल’ तथा कहानी संग्रह ‘इकोज़ फ्रॉम द स्काई’। हिंदी में हास्य-व्यंग्य उपन्यास ‘जो घर फूंके आपना’, कहानी संग्रह ‘इन्द्रधनुषी जाल में एक जलपरी’, ‘नहीं, मैं तुम्हारी बेटी नहीं हूँ’, ‘तृप्ति और अन्य कहानियां’ आदि। भारतीय...

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हशमत चाचा (पंजाबी) : मुहम्मद इम्तियाज, अनुवाद : तरसेम

हशमत चाचा (पंजाबी) : मुहम्मद इम्तियाज, अनुवाद : तरसेम

मुहम्मद इम्तियाजयुवा लेखक। कहानी संग्रह की दो किताबें। संप्रति आकाशवाणी पटियाला में कार्यरत। तरसेमकथाकार और अनुवादक। हिंदी और पंजाबी में लेखन। अद्यतन कविता संग्रह ‘हाशिए पर एक कोना’।     विश्वविद्यालय का सत्र समाप्त होने पर मैं मलेरकोटला आ गया। चाय-पानी के...

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दादी के ठुमके : सत्यनारायण पटेल

दादी के ठुमके : सत्यनारायण पटेल

    चर्चित कथाकार। प्रकाशित कृतियां ‘गांव भीतर गांव’ (उपन्या), ‘भेम का भेरू मांगता कुल्हाड़ी ईमान’, ‘लाल छींट वाली लूगड़ी का सपना’, ‘काफ़िर बिजूका उ़र्फ इब्लीस, ‘तीतर फांद’। प्रेमचन्द स्मृति कथा सम्मान से सम्मानित।   मैंने स्कूल में अपने दोस्त अनेय के पास...

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तुम्हारी मां जैसी : सुभाष चंद्र कुशवाहा

तुम्हारी मां जैसी : सुभाष चंद्र कुशवाहा

    सुपरिचित कथाकार, संपादक और लोक-इतिहास के गंभीर अध्येता और लेखक। ‘लोकरंग’ वार्षिकी का 1998 से निरंतर संपादन। अद्यतन पुस्तक ‘भील विद्रोह’ (संघर्ष के सवा सौ साल), ‘टंट्या भील’ (द ग्रेट इंडियन मून लाइटर)। ‘मॉम! आर यू हिअर?’ नूतन की आवाज में तल्खी थी। सोनिया...

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रेत का टीला : पूनम सिंह

रेत का टीला : पूनम सिंह

    वरिष्ठ कवयित्री, कथाकार और आलोचक। चार कविता संग्रह, पांच आलोचना पुस्तकें और कहानी संग्रह ‘कोई तीसरा’,  ‘कस्तूरीगंध तथा अन्य कहानियां’, ‘सुलगती ईंटों का धुआं’ और ‘खरपतवार’ प्रकाशित। गिरधर महतो के पास पुरखों की अर्जित दस बीघा जमीन एक ऐसी थाती थी, जिसपर...

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