कहानी
समझौता नहीं : सिद्धेश

समझौता नहीं : सिद्धेश

वरिष्ठ कहानीकार। कई कहानी संग्रह और बांग्ला से कई पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित। सामने वाले घर में दो युवक सुबह से काम पर लग जाते थे।एक बाहर के चबूतरे पर झाड़ू लगाता, दूसरा पानी से धोता।घर में औरतें नजर नहीं आतीं।दोनों जवान थे।मगर शादी नहीं की।एक मां थी जो...

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सुरंग : नितिन यादव

सुरंग : नितिन यादव

युवा लेखक।वर्तमान निवास - जयपुर में। संप्रति स्वतंत्र लेखन।   ‘पता है, तुम आजाद भाला हो!’ मोहित ने दही-चीनी खिलाते हुए उससे कहा।  ‘आजाद भाला!’  उसने रुमाल से मुंह साफ करते हुए पूछा।मोहित ने कहा, ‘प्राचीन यूनान में कुछ सैनिक सोते समय सिरहाने भाला रखकर सोते थे।वे...

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अधूरी रात : प्रबोध कुमार गोविल

अधूरी रात : प्रबोध कुमार गोविल

पूर्व प्रो़फेसर व निदेशक, ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय, जयपुर।अब स्वतंत्र लेखन।ग्यारह उपन्यासों सहित लगभग 40 किताबें प्रकाशित। वर्तमान में एनजीओ राही सहयोग संस्थान का संचालन। आज वह कुछ अलग-सा दिख रहा था।वह लंबा है, यह तो दिखता ही है।मगर उसके बाजू मछलियों से...

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देर कभी नहीं होती : आशा पांडेय

देर कभी नहीं होती : आशा पांडेय

वरिष्ठ कथाकार।तीन कहानी संग्रह, एक कविता संग्रह, तीन बाल कविता संग्रह प्रकाशित। ‘तू तेरह साल की थी, जब मैं यहां आई।’ वह बोली ‘हां, खेत पर ही तो गई थी मैं।लौटी तो पता चला कि तेरी काकी नहीं रहीं, इसलिए तू कुछ दिन के लिए नाना के घर गई है।’ मैं बोली। ‘मेरे जनम के पहले ही...

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शक : वंदना शुक्ल

शक : वंदना शुक्ल

वरिष्ठ कथाकार।पांच कहानी संग्रह और दो उपन्यास अब तक प्रकाशित। ऐसा नहीं है कि इससे पहले मैंने रेलगाड़ी के इस कूपे में यात्रा नहीं की।पहली बार फर्स्ट क्लास में यात्रा करना अजीब-सा लगा था।बंद-बंद सा।न खिड़की से बाहर झांक सको, न चाय वालों का हो हल्ला, न खुली हवा।बस बंद कमरे...

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नीड़ का सपना बुनती चिड़िया : बिंदु मारंगाड, अनुवाद : विजयकुमारन सी. पी. वी.

नीड़ का सपना बुनती चिड़िया : बिंदु मारंगाड, अनुवाद : विजयकुमारन सी. पी. वी.

मलयालम कथाकार और सामाजिक कार्यकर्ता।एक कहानी संग्रह प्रकाशित| संप्रति रेलवे सेवा में। छुट्टी की सारी अलसता माथे पर मढ़कर चाय का प्याला लिए मैंने अखबार पर नज़र डाली।महामारी के फैलाव से बचाने के लिए बंद तालों के क्रमशः खुलते जाने का समाचार पढ़ रही थी कि उन परिंदों की...

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वायरस : मनोज कुमार गोस्वामी

वायरस : मनोज कुमार गोस्वामी

असमिया से बांग्ला अनुवाद : वासुदेव दासबांग्ला से हिंदी अनुवाद : संजय राययुवा कवि।एक पुस्तक ‘कुंवर नारायण का कविता लोक’। रात में अनादि के शरीर के ऊपर से एक चूहा दौड़कर भागा।घबराकर उसने बत्ती जलाई और उठ बैठा।रात में अकसर रसोई और बरामदे से उसे उन छोटे-छोटे चूहों की...

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एबीसीडी विला : अरुण अर्णव खरे

एबीसीडी विला : अरुण अर्णव खरे

‘तुमको गोल्फ खेलते हुए छह माह होने को आए जय, पर अभी तक वहीं हो जहां से शुरू किया था’ - कंधे से गोल्फ-क्लब्स का बैग उतारते हुए चंदन सक्सेना ने कहा। ‘सही कह रहा है चंदू’ - जॉन डि’कोस्टा ने कुर्सी पर पसरते हुए चंदन की बात का अनुमोदन किया - ‘हर होल पर तुम पांच-छह बोगी...

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दातुन वाली बुढ़िया : इम्तियाज गदर

दातुन वाली बुढ़िया : इम्तियाज गदर

प्रतिदिन बाजार जाना मेरी दिनचर्या में शामिल था।बटुवेनुमा झोले में एकाध हरी सब्जी खरीद कर रखता, दो-चार हमउम्र लोगों से यदि भेंट हो जाती, तो उनसे देश-दुनिया में घट रही सामयिक घटनाओं पर हल्की-फुल्की चर्चा करता, फिर एकाध कप शुगर फ्री चाय पी कर घर लौट आता था।हां, इसके साथ...

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मिसेज़ रायजादा की कोरोना डायरी : किंशुक गुप्ता

मिसेज़ रायजादा की कोरोना डायरी : किंशुक गुप्ता

15 जून, 2020 सामने की खिड़की से पलाश का एक पेड़ दिखता है, झुकी डालियों पर लाल दहकते फूल कोनों से जलने लगे हैं; क्या अपनी अल्पायु के आखिरी क्षणों के सरपट खत्म होने का जरा-भी दुख उन्हें नहीं सालता? अल्पायु मैं, कोरोना से ग्रस्त, निपट एकाकी।मुझे कल यहां भर्ती किया गया।बस...

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खिड़की से पार : देवांशु पाल

खिड़की से पार : देवांशु पाल

‘बीड़ी पीती हुई बूढ़ी औरत’ (कविता संग्रह) और ‘बारिश थमने के बाद’ (कहानी संग्रह) प्रकाशित।त्रैमासिक पत्रिका ‘पाठ’ का संपादन। साल की वह आखिरी सुबह थी।दिसंबर की कड़ाके की ठंड वाली सुबह।दो दिन पहले ही शहर में जमकर बारिश हुई थी, ओले भी गिरे थे, जिसकी वजह से शहर का तापमान 4-5...

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गिदनी : पार्वती तिर्की

गिदनी : पार्वती तिर्की

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से ‘कुड़ुख आदिवासी गीत : जीवन राग और जीवन संघर्ष’ विषय पर शोधरत। बिनको!उसके नाना ने उसे पुकारा।जिस रात बिनको का जन्म हुआ था, उस रात आसमान के तारे खूब चमक रहे थे।तारे मानो खुशी से खिलखिला रहे थे।तब नन्ही बच्ची को गोद में लेते हुए,...

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वे गोश्त खाते हैं हांसदा सौवेंद्र शेखर, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

वे गोश्त खाते हैं हांसदा सौवेंद्र शेखर, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

कहानीकार संथाल पृष्ठभूमि के एक महत्वपूर्ण अंग्रेजी कथाकार।कहानी संग्रह ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’।पहले की  झारखंड सरकार द्वारा इस पुस्तक पर प्रतिबंध।एक अन्य चर्चित पुस्तक ‘द मिस्टीरियस एलमेंट ऑफ रूपी अनुवादकआकाशवाणी में उद्घोषणा और कार्यक्रम संचालन। बांग्ला तथा अंगरेजी...

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सागोन के दरख्त : उर्मिला शुक्ल

सागोन के दरख्त : उर्मिला शुक्ल

अद्यतन कहानी संग्रह ‘मैं, फूलमती और हिजड़े’, अद्यतन उपन्यास ‘बिन ड्योढ़ी का घर’। गांव में मुर्गा लड़ाई हो रही थी; मगर यहां न तो कोई हाट भरा था और न ही मड़ई।खास बात यह कि लड़ने वाले मुर्गे और इन्हें लड़ाने वाले दोनों एक ही घर से थे, सगे भाई।एक जैसी कदकाठी।फर्क बस आंखों में...

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अंतिम गान : तेमसिला आओ, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

अंतिम गान : तेमसिला आओ, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

कहानीकार पद्मश्री (2007) और साहित्य अकादमी (2013) के पुरस्कार से सम्मानित नगालैंड की कवि और कथाकार।नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी में लंबे समय तक अंग्रेजी की प्रोफेसर रहीं।यह कहानी कुछ दशकों पहले के संघर्ष काल की नगा मानसिकता को प्रतिबिंबित करती है। अनुवादकआकाशवाणी में...

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टेबल नंबर 12 : गरिमा संजय दुबे

टेबल नंबर 12 : गरिमा संजय दुबे

सहायक प्राध्यापक। एक कहानी संग्रह ‘दो ध्रुवों के बीच की आस’। ‘एक फ्रेंच फ्राइज, एक कॉफी’ का आर्डर देकर अधिकारी से नजर आते 60-65 साल के वृद्ध व्यक्ति ने एक उड़ती सी नजर आस-पास डाली।अपने में मगन, युवा जोड़े बेफिक्री से बैठे थे।जो अधेड़ थे, यथासंभव अपने हाव-भाव, परिधान और...

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पतझड़ के रंग : शोभा नारायण

पतझड़ के रंग : शोभा नारायण

अद्यतन कहानी संग्रह ‘मैं, फूलमती और हिजड़े’, अद्यतन उपन्यास ‘बिन ड्योढ़ी का घर’। खिड़की के बाहर नए देवदार लंबे, घने, छतों से ऊपर निकलने की होड़ लगाते। इनसे होकर बराबर के घर को नजर में लाना मुश्किल होता। अभी हाल में रोपे गए हैं, अपनी जगहों से निकाल कर यहां काफी गहरे गड्ढे...

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उसके हिस्से का आसमान : अंजू शर्मा

उसके हिस्से का आसमान : अंजू शर्मा

स्वतंत्र लेखन।दो कहानी संग्रह, ‘एक नींद हज़ार सपने’, ‘सुबह ऐसे आती है’। आज भी मेट्रो में बहुत भीड़ है।वैसे कश्मीरी गेट आने से पहले भीड़ तो हो ही जाती है।यहां से कई लाइन्स जो जुड़ी हैं।जहां तक देखो अपने सपनों का पीछा करते चेहरों की भीड़ नजर आती है।वह अब तक मोबाइल में न्यूज...

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मैं लड़का हूँ : अर्चना पैन्यूली

मैं लड़का हूँ : अर्चना पैन्यूली

विगत तेईस वर्षों से डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में।अब तक चार उपन्यास, तीन कहानी संग्रह तथा एक अनुवाद प्रकाशित।उनका उपन्यास ‘वेयर डू आई बिलांग’ डेनिश समाज पर हिंदी में लिखा पहला उपन्यास है।‘इडा कैसी है?’ ‘इवान!’ जूलिया ने तुरंत पूछने वाले को याद दिलाया। ‘हां भई,...

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पुराना चावल : हंसा दीप

पुराना चावल : हंसा दीप

यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में लेक्चरार के पद पर कार्यरत।पूर्व में यॉर्क यूनिवर्सिटी, टोरंटो में हिंदी कोर्स डायरेक्टर एवं भारतीय विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक।तीन उपन्यास और चार कहानी संग्रह प्रकाशित। टोरंटो के नॉर्थ यॉर्क इलाके की व्यस्ततम रियल इस्टेट एजेंट लोरेन...

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