कहानी
जश्न : अनंत कुमार सिंह

जश्न : अनंत कुमार सिंह

वरिष्ठ कथाकार और ‘जनपथ’ पत्रिका के संपादक। घंटों, दिनों, महीनों ही नहीं, वर्षों से जकड़ा तनाव बिलकुल सामान्य हो गया। यह तो सच है कि किसी का लड़का अगर नौकरी पाकर अपने घर की समस्याओं से पाला झाड़कर विदेश, महानगर या फिर घर से दूर बस गया है तब भी पीड़ा और अगर नौकरी की तलाश...

read more
कंजिया : नरेश कौशिक

कंजिया : नरेश कौशिक

समाचार संपादक/ प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया (पीटीआई) की हिंदी सेवा ‘भाषा’  कंजिया ने सिर पर बंधा मुरैठा उतारा और सड़क पर खड़े हाथ ठेले का सहारा लेकर माथे का पसीना पोंछा। पजामे की जेब से खैनी की डिब्बी निकाली और हथेली पर मसलने लगा। खैनी को चुटकी में भरा और मुंह में एक ओर दबा...

read more
विद्रोही : सुशीला गुप्ता

विद्रोही : सुशीला गुप्ता

‘हिंदुस्तानी ज़बान’ की पूर्व संपादक। संप्रति स्वतंत्र लेखन।‘मम्मी, कानपुर से पापा ने वाट्सएप पर मेसेज भेजा है।’‘.............’‘पूछोगी नहीं कि क्या मेसेज है?’‘बता।’‘पढ़ती हूँ, लो सुनो- प्रिय बेटी श्वेता,एक युग बीत गया तुमसे जुदा हुए। तुम पूछोगी, क्या कभी मेरी याद आती...

read more
कन्नड़ कहानी : गंध

कन्नड़ कहानी : गंध

कर्कि कृष्णमूर्ति पेशे से इंजीनियर। कन्नड के हाल के कहानीकारों में नए तेवर के रचनाकार के रूप में पहचान। अब तक दो कहानी-संग्रह प्रकाशित।डी.एन.श्रीनाथ कन्नड-हिन्दी में परस्पर अनुवाद। अब तक 80 पुस्तकें प्रकाशित। साहित्य अकादमी का अनुवाद पुरस्कार.शृंग की उम्र तीन साल की...

read more
कन्नड़ कहानी : छोटे स्वामी की गलती

कन्नड़ कहानी : छोटे स्वामी की गलती

के.वी. तिरुमलेश कन्नड कवि, कहानीकार और समीक्षक। कन्नड़ में तिरुमलेश नव्य कवि और कहानीकार के रूप में परिचित। मुखवाड़गलू, वठारा, अवधा, सम्मुख आदि इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। डी.एन.श्रीनाथ कन्नड-हिन्दी में परस्पर अनुवाद। अब तक 80 पुस्तकें प्रकाशित। साहित्य अकादमी का अनुवाद...

read more
औरत और पोस्टर : कमल कुमार

औरत और पोस्टर : कमल कुमार

चर्चित लेखिका। कहानी, उपन्यास, कविता, आलोचना, स्त्री-विमर्श पर 33 पुस्तकें।   वह दफ्तर से बाहर निकली तो रात-सी घिर आई थी। सर्दी की शामें छोटी होती हैं। दिन रहते ही अंधेरा छा जाता है। उसने घड़ी देखी, समय ज्‍यादा नहीं हुआ था। वह स्‍कूटर लेगी और दस मिनट में घर पहुंच...

read more
फरिश्ते : मुकुल जोशी

फरिश्ते : मुकुल जोशी

कहानी संग्रह ‘मैं यहाँ कुशल से हूँ’ प्रकाशित। सेना से कर्नल रैंक से रिटायर।   ‘थैंक्यू वैरी मच! आइ एम ऑनर्ड!’- इतना ही कह पाया था मैं। बहुत-कुछ कह सकता था, कर सकता था मैं उसके लिए। फिर फुर्सत में एकांत मिलते ही मैं अपराधबोध में खुद को दुत्कारता। मन ही मन कह उठता-...

read more
दलदल : हरियश राय

दलदल : हरियश राय

सुपिरिचित कथाकार। दो उपन्यासों‘नागफनी के जंगल में’और‘मुट्ठी में बादल’ के अलावा  छह  कहानी संकलन। सामयिक विषयों से संबंधित पांच अन्‍य किताबें।   ‘ओ के, बाय बाय बेटा, टेक केयर। स्‍कूल में किसी से झगड़ना नहीं। ममा शाम को आएगी, ठीक से रहना स्‍कूल में’ कहकर अंजुला...

read more
अम्मी और मम्मी/ हंसा दीप

अम्मी और मम्मी/ हंसा दीप

यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में लेक्चरार के पद पर कार्यरत। दो उपन्यास व दो कहानी संग्रह प्रकाशित।   वे दोनों सातवीं कक्षा में मिली थीं, जब दोनों अपने-अपने देश से आई थीं न्यूयॉर्क के फ्लशिंग हाईस्कूल में। वह स्कूल जहाँ दोनों अंग्रेजी से ही नहीं, बहुत सारे नए बदलावों से...

read more
इतालवी कहानी : मर्तबान

इतालवी कहानी : मर्तबान

      एल. पिरानदेल्लो/ संदल भारद्वाज  इतावली कहानीकार/ अनुवादक   उस साल एक बार फिर ज़ैतून की फ़सल की भरपूर पैदावार हुई। कुछ मोटे और बूढ़े पेड़ पिछले साल से लदे पड़े थे,बावजूद उस घने कोहरे के, जिसकी वजह से उनमें बौर आने में काफ़ी देर हुई थी। उन सबसे भी इस...

read more