कहानी
सरई फूल : अनिता रश्मि

सरई फूल : अनिता रश्मि

सुपरिचित कथाकार। अद्यतन काव्य संग्रह ‘अब ख्वाब नए हैं’।‘मुझे तुम अपनी पूरी बस्ती दिखलाओगी?’ ‘हाँ बाबू, आपको घूमने का बहुत सौख है ना? चलो।’ उसके नूपुर की गूंज आगे-आगे, मैं पीछे-पीछे। पहाड़ी के ऊपर से दिखते उसके घर एवं आस-पास के घरों की लघुता देख मुझे हँसी आ गई। मैं जोर...

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बस एक फोटो : क्षमा शर्मा

बस एक फोटो : क्षमा शर्मा

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार। बाल पत्रिका ‘नंदन’ की कार्यकारी संपादक रहीं।ठंड की कड़-कड़ और कंपकपी और ऊपर से दौड़ती मेट्रो। मेट्रो की लाइन बीच में आ गई वरना तो बाल्कनी से ही खेतों में फैली हरियाली, उगता सूरज, यमुना की एक पतली-सी लकीर, और उसके पार बहुमंजिली इमारतें...

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इनरासन की परी : कमलेश

इनरासन की परी : कमलेश

सुपरिचित कहानीकार और पत्रकार। कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’। संप्रति ‘हिन्दुस्तान’ रांची में समाचार संपादक।कम की दवाई है बेटा, अधिक की दवाई नहीं। सुबह के साढ़े नौ बजे नहीं कि महेसर हलवाई की आवाज गूंज जाती। आवाज भी इतनी तेज कि पूरा रामरेखा घाट जान जाता कि महेसर हलवाई के...

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झब्बू : उन्मेष कुमार सिन्हा

झब्बू : उन्मेष कुमार सिन्हा

युवा रचनाकार। एक आलोचना पुस्तक ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास और भारतीय राजनीति’। लोग उसे झब्बू कहते थे। दस-ग्यारह साल का रहा होगा। सुबह-सुबह ही वह छतरीवाले विशाल मकान के गेटमैन के पास पहुंच गया था। भूरे रंग की मैली शर्ट, देह की जामुनी रंगत से मिली हुई। दो बटन छोड़कर...

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बांग्ला कहानी : पिता

बांग्ला कहानी : पिता

तमाल बंद्योपाध्याय, बांग्ला के प्रसिद्ध कथाकार। चर्चित उपन्यास - ‘उत्तरपुरुष’ और ‘कम्पासवाला’।अनुवाद : संजय राय    पिता कभी नहीं मरते। वे अपनी संतानों में बचे रहते हैं। बचे रहते हैं उनकी बुरी आदतों में। विशेष भाव-भंगिमाओं में भी बचे रहते हैं। मैं बिलकुल अभी जिस तरह...

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लकड़ी का घोड़ा : आयशा आरफीन

लकड़ी का घोड़ा : आयशा आरफीन

युवा कहानीकार और पत्रकार सफर धनबाद तक का है। वहाँ तक मेरे घर से डायरेक्ट कोई फ्लाइट नहीं जाती। ट्रेन से रिजर्वेशन कराया है। कोई ख़ास दूर नहीं है धनबाद। आराम से जाया जा सकता है ट्रेन से। मगर मसला ये है कि ट्रेन का नाम सुनते ही मुझे घबराहट होने लगती है। ट्रेन को, रेलवे...

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कालू कलबंसिया : पानू खोलिया

कालू कलबंसिया : पानू खोलिया

(1939-2020) साठोत्तरी दौर के एक चर्चित कथाकार।  तीन कहानी-संग्रह और चार उपन्यास प्रकाशित। कुमाऊँ अंचल से संबद्ध होने के कारण पहाड़ी जीवन की संस्कृति और भाषा की समृद्ध झलक उनकी कहानियों में है। ‘पनचक्की’, ‘तुन महाराज’, ‘सीसकटी’, ‘गुनो लौट गई’ जैसी कहानियों के लिए विशेष...

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डायरी में नीलकुसुम : पंकज सुबीर

डायरी में नीलकुसुम : पंकज सुबीर

चर्चित कथाकार। अद्यतन उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था’ और अद्यतन कहानी संग्रह- ‘अभी तुम इश्क़ में हो।’ संप्रति : संपादक - विभोम स्वर, शिवना साहित्यिकी ‘वसंत किसी मौसम का नाम नहीं है, वसंत जीवन की एक अवस्था का नाम है...’ डायरी के पहले ही पन्ने पर यह लिखा हुआ है।...

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जश्न : अनंत कुमार सिंह

जश्न : अनंत कुमार सिंह

वरिष्ठ कथाकार और ‘जनपथ’ पत्रिका के संपादक। घंटों, दिनों, महीनों ही नहीं, वर्षों से जकड़ा तनाव बिलकुल सामान्य हो गया। यह तो सच है कि किसी का लड़का अगर नौकरी पाकर अपने घर की समस्याओं से पाला झाड़कर विदेश, महानगर या फिर घर से दूर बस गया है तब भी पीड़ा और अगर नौकरी की तलाश...

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कंजिया : नरेश कौशिक

कंजिया : नरेश कौशिक

समाचार संपादक/ प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया (पीटीआई) की हिंदी सेवा ‘भाषा’  कंजिया ने सिर पर बंधा मुरैठा उतारा और सड़क पर खड़े हाथ ठेले का सहारा लेकर माथे का पसीना पोंछा। पजामे की जेब से खैनी की डिब्बी निकाली और हथेली पर मसलने लगा। खैनी को चुटकी में भरा और मुंह में एक ओर दबा...

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विद्रोही : सुशीला गुप्ता

विद्रोही : सुशीला गुप्ता

‘हिंदुस्तानी ज़बान’ की पूर्व संपादक। संप्रति स्वतंत्र लेखन।‘मम्मी, कानपुर से पापा ने वाट्सएप पर मेसेज भेजा है।’‘.............’‘पूछोगी नहीं कि क्या मेसेज है?’‘बता।’‘पढ़ती हूँ, लो सुनो- प्रिय बेटी श्वेता,एक युग बीत गया तुमसे जुदा हुए। तुम पूछोगी, क्या कभी मेरी याद आती...

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कन्नड़ कहानी : गंध

कन्नड़ कहानी : गंध

कर्कि कृष्णमूर्ति पेशे से इंजीनियर। कन्नड के हाल के कहानीकारों में नए तेवर के रचनाकार के रूप में पहचान। अब तक दो कहानी-संग्रह प्रकाशित।डी.एन.श्रीनाथ कन्नड-हिन्दी में परस्पर अनुवाद। अब तक 80 पुस्तकें प्रकाशित। साहित्य अकादमी का अनुवाद पुरस्कार.शृंग की उम्र तीन साल की...

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कन्नड़ कहानी : छोटे स्वामी की गलती

कन्नड़ कहानी : छोटे स्वामी की गलती

के.वी. तिरुमलेश कन्नड कवि, कहानीकार और समीक्षक। कन्नड़ में तिरुमलेश नव्य कवि और कहानीकार के रूप में परिचित। मुखवाड़गलू, वठारा, अवधा, सम्मुख आदि इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। डी.एन.श्रीनाथ कन्नड-हिन्दी में परस्पर अनुवाद। अब तक 80 पुस्तकें प्रकाशित। साहित्य अकादमी का अनुवाद...

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औरत और पोस्टर : कमल कुमार

औरत और पोस्टर : कमल कुमार

चर्चित लेखिका। कहानी, उपन्यास, कविता, आलोचना, स्त्री-विमर्श पर 33 पुस्तकें।   वह दफ्तर से बाहर निकली तो रात-सी घिर आई थी। सर्दी की शामें छोटी होती हैं। दिन रहते ही अंधेरा छा जाता है। उसने घड़ी देखी, समय ज्‍यादा नहीं हुआ था। वह स्‍कूटर लेगी और दस मिनट में घर पहुंच...

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फरिश्ते : मुकुल जोशी

फरिश्ते : मुकुल जोशी

कहानी संग्रह ‘मैं यहाँ कुशल से हूँ’ प्रकाशित। सेना से कर्नल रैंक से रिटायर।   ‘थैंक्यू वैरी मच! आइ एम ऑनर्ड!’- इतना ही कह पाया था मैं। बहुत-कुछ कह सकता था, कर सकता था मैं उसके लिए। फिर फुर्सत में एकांत मिलते ही मैं अपराधबोध में खुद को दुत्कारता। मन ही मन कह उठता-...

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दलदल : हरियश राय

दलदल : हरियश राय

सुपिरिचित कथाकार। दो उपन्यासों‘नागफनी के जंगल में’और‘मुट्ठी में बादल’ के अलावा  छह  कहानी संकलन। सामयिक विषयों से संबंधित पांच अन्‍य किताबें।   ‘ओ के, बाय बाय बेटा, टेक केयर। स्‍कूल में किसी से झगड़ना नहीं। ममा शाम को आएगी, ठीक से रहना स्‍कूल में’ कहकर अंजुला...

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अम्मी और मम्मी/ हंसा दीप

अम्मी और मम्मी/ हंसा दीप

यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में लेक्चरार के पद पर कार्यरत। दो उपन्यास व दो कहानी संग्रह प्रकाशित।   वे दोनों सातवीं कक्षा में मिली थीं, जब दोनों अपने-अपने देश से आई थीं न्यूयॉर्क के फ्लशिंग हाईस्कूल में। वह स्कूल जहाँ दोनों अंग्रेजी से ही नहीं, बहुत सारे नए बदलावों से...

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इतालवी कहानी : मर्तबान

इतालवी कहानी : मर्तबान

      एल. पिरानदेल्लो/ संदल भारद्वाज  इतावली कहानीकार/ अनुवादक   उस साल एक बार फिर ज़ैतून की फ़सल की भरपूर पैदावार हुई। कुछ मोटे और बूढ़े पेड़ पिछले साल से लदे पड़े थे,बावजूद उस घने कोहरे के, जिसकी वजह से उनमें बौर आने में काफ़ी देर हुई थी। उन सबसे भी इस...

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