कहानी
गिदनी : पार्वती तिर्की

गिदनी : पार्वती तिर्की

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से ‘कुड़ुख आदिवासी गीत : जीवन राग और जीवन संघर्ष’ विषय पर शोधरत। बिनको!उसके नाना ने उसे पुकारा।जिस रात बिनको का जन्म हुआ था, उस रात आसमान के तारे खूब चमक रहे थे।तारे मानो खुशी से खिलखिला रहे थे।तब नन्ही बच्ची को गोद में लेते हुए,...

read more
वे गोश्त खाते हैं हांसदा सौवेंद्र शेखर, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

वे गोश्त खाते हैं हांसदा सौवेंद्र शेखर, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

कहानीकार संथाल पृष्ठभूमि के एक महत्वपूर्ण अंग्रेजी कथाकार।कहानी संग्रह ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’।पहले की  झारखंड सरकार द्वारा इस पुस्तक पर प्रतिबंध।एक अन्य चर्चित पुस्तक ‘द मिस्टीरियस एलमेंट ऑफ रूपी अनुवादकआकाशवाणी में उद्घोषणा और कार्यक्रम संचालन। बांग्ला तथा अंगरेजी...

read more
सागोन के दरख्त : उर्मिला शुक्ल

सागोन के दरख्त : उर्मिला शुक्ल

अद्यतन कहानी संग्रह ‘मैं, फूलमती और हिजड़े’, अद्यतन उपन्यास ‘बिन ड्योढ़ी का घर’। गांव में मुर्गा लड़ाई हो रही थी; मगर यहां न तो कोई हाट भरा था और न ही मड़ई।खास बात यह कि लड़ने वाले मुर्गे और इन्हें लड़ाने वाले दोनों एक ही घर से थे, सगे भाई।एक जैसी कदकाठी।फर्क बस आंखों में...

read more
अंतिम गान : तेमसिला आओ, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

अंतिम गान : तेमसिला आओ, अनुवाद : मंजु श्रीवास्तव

कहानीकार पद्मश्री (2007) और साहित्य अकादमी (2013) के पुरस्कार से सम्मानित नगालैंड की कवि और कथाकार।नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी में लंबे समय तक अंग्रेजी की प्रोफेसर रहीं।यह कहानी कुछ दशकों पहले के संघर्ष काल की नगा मानसिकता को प्रतिबिंबित करती है। अनुवादकआकाशवाणी में...

read more
टेबल नंबर 12 : गरिमा संजय दुबे

टेबल नंबर 12 : गरिमा संजय दुबे

सहायक प्राध्यापक। एक कहानी संग्रह ‘दो ध्रुवों के बीच की आस’। ‘एक फ्रेंच फ्राइज, एक कॉफी’ का आर्डर देकर अधिकारी से नजर आते 60-65 साल के वृद्ध व्यक्ति ने एक उड़ती सी नजर आस-पास डाली।अपने में मगन, युवा जोड़े बेफिक्री से बैठे थे।जो अधेड़ थे, यथासंभव अपने हाव-भाव, परिधान और...

read more
पतझड़ के रंग : शोभा नारायण

पतझड़ के रंग : शोभा नारायण

अद्यतन कहानी संग्रह ‘मैं, फूलमती और हिजड़े’, अद्यतन उपन्यास ‘बिन ड्योढ़ी का घर’। खिड़की के बाहर नए देवदार लंबे, घने, छतों से ऊपर निकलने की होड़ लगाते। इनसे होकर बराबर के घर को नजर में लाना मुश्किल होता। अभी हाल में रोपे गए हैं, अपनी जगहों से निकाल कर यहां काफी गहरे गड्ढे...

read more
उसके हिस्से का आसमान : अंजू शर्मा

उसके हिस्से का आसमान : अंजू शर्मा

स्वतंत्र लेखन।दो कहानी संग्रह, ‘एक नींद हज़ार सपने’, ‘सुबह ऐसे आती है’। आज भी मेट्रो में बहुत भीड़ है।वैसे कश्मीरी गेट आने से पहले भीड़ तो हो ही जाती है।यहां से कई लाइन्स जो जुड़ी हैं।जहां तक देखो अपने सपनों का पीछा करते चेहरों की भीड़ नजर आती है।वह अब तक मोबाइल में न्यूज...

read more
मैं लड़का हूँ : अर्चना पैन्यूली

मैं लड़का हूँ : अर्चना पैन्यूली

विगत तेईस वर्षों से डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में।अब तक चार उपन्यास, तीन कहानी संग्रह तथा एक अनुवाद प्रकाशित।उनका उपन्यास ‘वेयर डू आई बिलांग’ डेनिश समाज पर हिंदी में लिखा पहला उपन्यास है।‘इडा कैसी है?’ ‘इवान!’ जूलिया ने तुरंत पूछने वाले को याद दिलाया। ‘हां भई,...

read more
पुराना चावल : हंसा दीप

पुराना चावल : हंसा दीप

यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में लेक्चरार के पद पर कार्यरत।पूर्व में यॉर्क यूनिवर्सिटी, टोरंटो में हिंदी कोर्स डायरेक्टर एवं भारतीय विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक।तीन उपन्यास और चार कहानी संग्रह प्रकाशित। टोरंटो के नॉर्थ यॉर्क इलाके की व्यस्ततम रियल इस्टेट एजेंट लोरेन...

read more
काठ का घोड़ा : दामोदर खड़से

काठ का घोड़ा : दामोदर खड़से

कवि कथाकार।  चार उपन्यास, आठ कथा संग्रह, नौ कविता संग्रह, समीक्षा व साक्षात्कार की पुस्तकें प्रकाशित।  मराठी के चर्चित उपन्यास बारोमास के अनुवाद के लिए उन्हें केंद्रीय साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त। वह रोज पिछले हिस्से में लगी सीढ़ियों से ऊपर अपने हॉल तक पहुंचता।...

read more
कर्ज : अखिलेश मिश्रा

कर्ज : अखिलेश मिश्रा

कहानी संग्रह ‘इस पथ का अंत कहाँ’।संप्रति-भारतीय रेल में अधिकारी। वातावरण में इतनी वीरानी छाई हुई थी कि सांस की आवाज स्पष्ट सुनी जा सकती थी।कीट पतंगों और अन्य जंगली जानवरों की आवाज इस वीरान वातावरण को और भयावह बना रही थी।अभी तीन चार दिन पहले ही दस पुलिस जवानों से भरी...

read more
योद्धा : रविशंकर सिंह

योद्धा : रविशंकर सिंह

वरिष्ठ कथाकार। कहानी संग्रह 'तुमको नहीं भूल पाएंगे'। तालाब के निथरे जल में रात्रि के अंतिम पहर का नीम अंधेरा धीरे-धीरे घुल रहा था। भोर का उजास साइबेरियन पक्षी की तरह पंख फैलाकर पेड़ों की फुनगियों पर उतर रहा था। नीड़ों में पखेरू कलरव  करने लगे थे। कोयल की कूक वातावरण...

read more
एक कैदी से मुलाकात : संजय सिंह

एक कैदी से मुलाकात : संजय सिंह

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। संप्रति अध्यापन। वह जून महीने का पहला पखवाड़ा था। काफी गर्मी और उमस थी। मुखिया जी से मेरी मुलाकात जेल में हुई। शांत, सौम्य और सहज। बातचीत में निहायत शालीन। उनका चेहरा काफी सुंदर था। प्रभावशाली! धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई, तो...

read more
शामिल फैसला : सुषमा मुनींद्र

शामिल फैसला : सुषमा मुनींद्र

चर्चित लेखिका। अद्यतन कहानी संग्रह 'न नजर बुरी न मुँह काला'। कम रोशनी वाला किराए का कमजोर घर। कमजोर घर में व्याप्त कमजोर बाबू की खांसी और दिव्यांग गीता की सिलाई मशीन की खड़खड़ की आपसदारी। सदर कमजोर द्वार वाले छोटे कमरे में खाट पर पहरेदार की तरह पड़ा खांसता बाबू। इस कमरे...

read more
पतझड़ अभी औेर भी है : वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’

पतझड़ अभी औेर भी है : वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’

वरिष्ठ आदिवासी कथाकार और पत्रकार।अद्यतन कहानी संग्रह ‘अपना-अपना युद्ध’, उपन्यास ‘लौटते हुए’। दोपहर में बासी भात सनई और बोदी तियन के साथ खाने के बाद सुगनी अम्बा बगीचा आ गई थी।पतझड़ समाप्त होने को है, परंतु अभी भी सूखे पत्तों की कमी नहीं थी।पिछले साल घर के पिछवाड़े अरहर...

read more
फैसला : रूमी लश्कर बोरा, अनुवाद : देवेंद्र कुमार देवेश

फैसला : रूमी लश्कर बोरा, अनुवाद : देवेंद्र कुमार देवेश

सुपरिचित कवि।अद्यतन संपादित कहानी संग्रह ‘कोसी की नई जमीन’।साहित्य अकादेमी पूर्वी क्षेत्र के सचिव। रूमी लश्कर बोरा असमिया की सुपरिचित लेखिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता।एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।जरूरत से कहीं अधिक ही सेवा की थी सिस्टर सुकन्या ने।ड्यूटी के लिए...

read more
पत्थर के डॉलर : ईशमधु तलवार

पत्थर के डॉलर : ईशमधु तलवार

कथा साहित्य और पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम।पिंक सिटी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष।एक उपन्यास ‘रिनाला खुर्द’, प्रसिद्ध संगीतकार दान सिंह के जीवन संघर्ष पर लिखी पुस्तक ‘वो तेरे प्यार का गम’।एक कहानी संग्रह, ‘लाल बजरी की सड़क’ और व्यंग्य संग्रह ‘इशारों-इशारों में’।दो...

read more
नाबो-अश्वेत व्यक्ति जिसने फरिश्तों से प्रतीक्षा करवाई : गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़, अनुवाद : मंजुला वालिया

नाबो-अश्वेत व्यक्ति जिसने फरिश्तों से प्रतीक्षा करवाई : गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़, अनुवाद : मंजुला वालिया

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सेस्वैच्छिक सेवानिवृत्ति। वर्तमान में NGO ‘संवेदना’ और CAGE से संबद्ध। गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ (1928-2014) नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध लैटिन अमेरिकी कथाकार।प्रसिद्ध उपन्यास है ‘एकांत के सौ वर्ष’ (वन हंड्रेड इयर्स ऑफ...

read more
जल रंग : एकांत श्रीवास्तव

जल रंग : एकांत श्रीवास्तव

सुपरिचित कवि। ‘वागर्थ’ का लंबे समय तक संपादन।अद्यतन उपन्यास ‘पानी भीतर फूल’ (उपन्यास), ‘चल हंसा वा देश’ (यात्रा निबंध)।संप्रति दिल्ली में शासकीय सेवा में। पानी का कोई रंग नहीं होता।उसमे जो रंग पड़ता है, वह उसी रंग का हो जाता है।फिर भी कुछ चीजों के रंग को जल रंग या पानी...

read more
इजलास : प्रकाश कांत

इजलास : प्रकाश कांत

वरिष्ठ लेखक। चार उपन्यास और तीन कहानी संग्रह : ‘शहर की आखिरी चिड़िया’, ‘टोकनी भर दुनिया’,  ‘अपने हिस्से का आकाश’। आर.एस.चौधरी, अर्ज़ीनवीस। उनके घर के दरवाज़े पर लगी नेम प्लेट। चौधरी बाबू के अर्ज़ीनवीस होने की घोषणा करती हुई। वे बरसों-बरस अर्ज़ीनवीस रहे। कचहरी में। होलकर...

read more