कविता
गोविंद निषाद

गोविंद निषाद

    युवा कवि।गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज में शोधकार्य। नदी का दुख देखते हुए लोगनहीं देख पाते हैं नदीआए हुए लोगनही पहुंच पाते हैं नदी तकनहाते हुए लोगसूखे रह जाते हैं नदी के किनारे कोई नहीं जान पाता हैनदी का दुखजो समेट रखा है उसने अपने...

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एकांत श्रीवास्तव

एकांत श्रीवास्तव

      सुपरिचित कवि।‘वागर्थ’ का लंबे समय तक संपादन।अद्यतन पुस्तकें ‘पंखुड़ी पंखुड़ी प्रेम’ (उपन्यास), ‘चल हंसा वा देश’ (यात्रा निबंध)।संप्रति दिल्ली में शासकीय सेवा में। लुवाई के दिन ये दिन लुवाई केभरी-भरी बैलगाड़ीतपे सोने-सा रंगधान काधरती हुई फिर...

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संजीव प्रभाकर

संजीव प्रभाकर

    युवा गजलकार. रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित. भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत ग़ज़ल बिला वजह के वजह बताकर उथल-पुथल जो मचा रहे हैंनहीं किसी की उन्हें है परवाह जो खाया उसको पचा रहे हैं सभी हैं नंगे हमाम में तो किसे गलत या सही कहेंगेन राज़ अपना खुले ये डर है,...

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कंचन कुमारी

कंचन कुमारी

    युवा कवयित्री।अतिथि प्राध्यापक, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, दरभंगा हाउस, पटना विश्वविद्यालय। उसकी आग टूट करजी रही हूँजैसे डाली से टूट करजीता है कोई पत्ताऔरकिसी चूल्हे में एक दिनजल जाता हैताकि कोईउसकी आग कोरोटियों में दबाकर खा सके। मेरे सपने रात के आखिरी पहर...

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संजय छीपा

संजय छीपा

    सुपरिचित कवि।विभिन्न पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित।जिला एवं सेशन न्यायालय, भीलवाड़ा में वकालत का कार्य। प्रेम क्या है प्रेम क्या हैमैंने उससे पूछावह मौन होकर सोचती रहीतभी एक फूल खिलकर झुक गया मैंने उससे फिर पूछाप्रेम क्या है वह मुस्कराती रहीएकाएक कोयल गा...

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प्रतिभा चौहान

प्रतिभा चौहान

    वरिष्ठ कवयित्री।कविता संग्रह ‘जंगलों में पगडंडियाँ’, ‘पेड़ों पर हैं मछलियाँ’, ‘बारहखड़ी से बाहर’।संप्रति न्यायाधीश, बिहार न्यायिक सेवा। उम्मीद पतझड़ के बादपेड़ की उम्मीदें खत्म नहीं होतींपर युद्धखत्म कर देता हैउम्मीदों की भी उम्मीद। युद्ध से परे युद्ध...

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राहुल राजेश

राहुल राजेश

    युवा कवि।अद्यतन कविता-संग्रह ‘मुस्कान क्षण भर’ और गद्य-संग्रह ‘आखिर कैसी हिंदी चाहते हैं हम?’ संप्रति भारतीय रिज़र्व बैंक मुंबई में प्रबंधक (राजभाषा)। इंतजार दीवार की दरार सेफूटती हैं जड़ें हरियाली की चट्टान से फूटता है सोता वक्त की बेरुखी सेशुष्क हुआ हृदय...

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पन्ना त्रिवेदी

पन्ना त्रिवेदी

    गुजराती की प्रसिद्ध कथाकार और कवयित्री।हिंदी में भी लेखन।कई कहानी संग्रह।एक कविता संग्रह ‘एकांतनो आवाज’।दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर। घोड़ा एक घोड़ारास्ता भटककरदौड़ता-भागता आ पहुंचा हैशहर के चौराहे पर कहते हैंयह घोड़ा युगों से दौड़ रहा...

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चंद्र मोहन

चंद्र मोहन

    युवा कवि।अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।फिलहाल खेती बाड़ी, इधर-उधर काम। ये गेहूं के उगने का समय है हर रोज की तरह सूरज पूरब से उगेगाखुला आसमान रहेगा और दूर-दूर से पंडुक आएंगेमैनी चिरैया आएंगीदेसी परदेसी पंछी आएंगेगेहूं की निकली हुई पहली पहली डिभी...

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पंकज कुमार

पंकज कुमार

    युवा कवि।काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में अध्ययन। खेतिहर स्त्रियां खेत पर जाती औरखेत से लौटती हुईंदिख जाती हैं स्त्रियांमेरे घर की छत से उन्हें देखते ही मुझे लगता हैखेत पर जाती स्त्रियां लिए जाती हैंबीज में संभावनाएंऔर खेत से लौटती स्त्रियांलाती...

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ब्रज माधव

ब्रज माधव

    युवा कवि।झारखंड सरकार में कार्यरत। दो तितलियां तुम्हारी जमीन भी नहीं है उतनीजिसकोतुम रोज रौंदते होतुम्हारे हिस्सेबस उतना ही हैजिस परतुम्हारे कदमों के निशानबाकी रह गए हैं तुम्हारा समय भी नहीं है उतनाजिसकोतुम रोज देखते होबंद मुट्ठी से फिसलतेतुम्हारा समय...

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शिव कुमार यादव

शिव कुमार यादव

    वरिष्ठ लेखक और संस्कृति कर्मी। ‘ईश्वर का हिंदू’, ‘आस्था की परती पर’ और ‘स्वाद भर शब्द’ कविता संग्रह। ‘सहयोग’ पत्रिका के प्रधान संपादक। मातृभाषा जब जब मां की याद आती हैभाषा का बसंतलोरी बनकर मेरे सिरहाने बैठ जाता है रंग बिरंगे फूलों परधूप सी काया खिल उठती...

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विनोद शलभ

विनोद शलभ

    कवि, गजलकार, दो ग़ज़ल संग्रह, एक कविता संग्रह व एक अनुवाद संग्रह प्रकाशित।नवल प्रयास शिमला साहित्यिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष।वर्तमान में नोएडा में निवास। गजल : एक हर किसी की शख़्सियत गुम है तेरे बाज़ार मेंहर तरह का झूठ ही अब छप रहा अख़बार में चील कौए नोच...

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हेमंत देवलेकर

हेमंत देवलेकर

    नाटकों में अभिनय, गीत लेखन, संगीत रचना तथा प्रशिक्षण में सक्रिय।दो कविता संग्रह ‘हमारी उम्र का कपास धीरे धीरे लोहे में बदल रहा है’ और ‘गुल मकई’। हार्मनी स़फेद और काले अलग रहेंगेतो नस्ल कहाएंगेमिलकर रहेंगे तो संगीत हारमोनियमसाहचर्य की एक मिसाल है उंगलियों...

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डर : अनिल विभाकर

डर : अनिल विभाकर

    चार दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता और निरंतर लेखन। ‘शिखर में आग’ और ‘सच कहने के लिए’ कविता संग्रह। झूठ के पांव नहीं होतेबहुत पुरानी कहावत है यहकहावतें हमेशा पुरानी ही होती हैंबहुत ठोक-ठेठा कर बनती हैं वेउन्हें तय करनी पड़ती है लंबी यात्रा झूठ के पांव...

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पूनम सोनछात्रा

पूनम सोनछात्रा

    युवा कवयित्री।कोलकाता के दिल्ली पब्लिक स्कूल में गणित की शिक्षिका। बोलने और न बोलने के बीचबोलने के हजार दुख थेन बोलने के असीमित बावजूद इसके हमने न बोलना चुना बाहर के शोर की बनिस्बतअंदर का तूफानतन, मन और पूरे जीवन कोछिन्न-भिन्न करने के लिए पर्याप्त...

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प्रार्थना : अनिला राखेचा

प्रार्थना : अनिला राखेचा

    युवा कवयित्री।कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।हिंदी के अलावा राजस्थानी में भी लेखन। प्रार्थनाओं का कोई रंग नहीं होतान केसरिया न लाल न हरा न पीलाप्रार्थनाएं होती हैं हमेशा श्वेत रंग में रची बसीहिम आच्छादित पर्वतों पर बिखरे उजाले की तरहरजनीगंधा और...

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मुसाफिर बैठा

मुसाफिर बैठा

    चर्चित कवि।दो काव्य संग्रह ‘बीमार मानस का गेह’ और ‘विभीषण का दुःख’।प्रकाशन विभाग, बिहार विधान परिषद, पटना में कार्यरत। खारिज़ करने के तर्क मुझे उसे समंदर बनाए जाने परगहरा एतराज लगामैंने उसको सही औक़ात दिखाने के लिएउसे रेगिस्तान कहना चाहायाद आया रेगिस्तान...

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दूध के दाँत : किंशुक गुप्ता

दूध के दाँत : किंशुक गुप्ता

    मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ लेखन से जुड़े हुए।अंग्रेज़ी की अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित। ‘मिथिला रिव्यू’, ‘जैगरी लिट’, ‘उसावा लिटरेरी रिव्यू’ के संपादक मंडल के सदस्य। बसंत के अनाम नीले फूलों से ढकी क्यारीलगती...

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कौशल किशोर

कौशल किशोर

    वरिष्ठ कवि और संस्कृतिकर्मी।अद्यतन कविता संग्रह ‘उम्मीद चिनगारी की तरह’।साहित्यिक पत्रिका ‘रेवान्त’ के प्रधान संपादक। सुख-चरम सुख सुख!क्या होता है यह? चरम सुख!क्या है यह बला? मैं कहां जान पाईसुख, चरम सुख और पता नहीं क्या क्या सुख...बचपन से मां-बापू से...

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