कविता
कविताएं / प्रेम रंजन अनिमेष

कविताएं / प्रेम रंजन अनिमेष

प्रेम रंजन अनिमेष, सुपरिचित कवि अद्यतन कविता संग्रह ‘बिन मुँडेर की छत’। मुंबई में बैंक अधिकारी। 1- सर्वांगिनी एक लुगरी वाली लुगाई आधा धोती आधा सुखाती आधा ओढ़ती आधा बिछाती आधी ढँकी आधी खुली बादलों के आरपार सूरज चाँद झलकाती आधा संसार कहाती पर सच तो यह सच में पूरा इसको...

read more
स्वयंप्रभा/ अनुजीत इक़बाल

स्वयंप्रभा/ अनुजीत इक़बाल

अनुजीत इकबाल, युवा कवयित्री उपन्यास ‘द इनर श्राइन’।   निरर्थक साधनाओं में कैद होता संसार तुमको तलाशता सुदूर तीर्थों में और मैं लिखती हूँ तुम्हारी विस्तृत हथेली पर वे तमाम प्रणयगीत जो मेरा हृदय गाता है व्यर्थ कर्मकांडों के वशीभूत होता संसार तुम को ढूंढता बेमतलब...

read more
रचना है निरंतर/ भारत यायावर

रचना है निरंतर/ भारत यायावर

भारत यायावर निबंधकार और कवि। रेणु विशेषज्ञ के रूप में परिचित। फणीश्वरनाथ रेणु और महावीर प्रसाद द्विवेदी की रचनावली का संपादन।  रचना ही रहना है गढ़ना ही बचना है अपने होने को दिखाना मौन को प्रकट करना भाव को शब्द देना विचार को चलना सिखाना एक अरूप को रूप में बदलना...

read more
अफ्रीका की कविता/ सिद्धार्थ वाजपेयी

अफ्रीका की कविता/ सिद्धार्थ वाजपेयी

सिद्धार्थ वाजपेयी बैंक से सेवा निवृत्ति के बाद कविता लेखन में सक्रिय।   अफ्रीका की कविता बहुत पहले लाखों साल पहले अफ्रीका के घने जंगलों में पहली माँ ने गाया था  एक गीत अपने एक  बेचैन शिशु के लिए जो सो नहीं रहा था रात की  डरावनी  और क्रूर आवाज़ों से घबरा कर पर पता...

read more
जेबें/ राजेंद्र उपाध्याय

जेबें/ राजेंद्र उपाध्याय

राजेन्द्र उपाध्याय सुपरिचित कवि, अद्यतन कविता संग्रह ‘ईश्वर एक अनाड़ी फोटोग्राफर है’जेबें होती हैं हरेक के पॉकेट में शर्ट में, कोट में, पतलून में, पाजामे में, ओवरकोट में, कुर्ते में, छतरी में, पर्स में, झोले में   जेब के भीतर जेब होती है एक नहीं कई जेबें होती हैं।...

read more
दो कविताएं / भाष्कर चौधरी

दो कविताएं / भाष्कर चौधरी

भाष्कर चौधरी काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन ‘बस्तर में तीन दिन’(यात्रा वृतांत) प्रकाशित 1- सीरिया सीरिया में बच्चों को हँसना सिखा रहे हैं पिता इधर फूटता है बम उधर हँसता है बच्चा   बच्चों का हँसना एक सामान्य क्रिया है जो हर किसी को आकर्षित...

read more
बच्चे स्कूल जा रहे हैं/ नीलोत्पल रमेश

बच्चे स्कूल जा रहे हैं/ नीलोत्पल रमेश

नीलोत्पल रमेश ‘हिंदी के विकास में आरा नागरी प्रचारिणी सभा का योगदान’ पर शोधकार्य। शिक्षण कार्य से जुड़े।बच्चे स्कूल जा रहे हैं अपनी पीठ पर लादे हुए - कुरान की आयतें गीता के श्लोक बाइबल की सूक्तियाँ और-और धर्मों की अनेक विचारधाराएँ   बच्चे स्कूल जा रहे हैं उनकी...

read more
माँ, बेटा और क्रांति/ मोहनदास नैमिशराय

माँ, बेटा और क्रांति/ मोहनदास नैमिशराय

मोहनदास नैमिशराय सुपरिचित दलित साहित्यकार और ‘बयान’ के संपादक माँ, बेटा और क्रांति माँ बीमार है और घर में अंधेरा न माँ के चेहरे पर तेज है और ना घर में उजाला जब से बेटे ने क्रांतिकारी झंडा उठा लिया था उसी समय से माँ ने चारपाई पकड़ ली थी माँ के सपने दफन हो गए थे उसी...

read more
स्वप्न और यथार्थ के बीच/ अंजन कुमार

स्वप्न और यथार्थ के बीच/ अंजन कुमार

अंजन कुमार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं एवं समीक्षाएं प्रकाशित। शिक्षण से जुड़े।   1-स्वप्न और यथार्थ के बीच कुत्तों के रूदन में गहरी हो चुकी रात गूंज रही है सूखे पत्तों पर   चांद अटका हुआ है पेड़ की शाख पर किसी उदास गेंद की तरह और तारे धुंध में कहीं...

read more