कविता
गांधी : पंकज चतुर्वेदी

गांधी : पंकज चतुर्वेदी

      युवा कवि। कविता-संग्रह : ‘एक संपूर्णता के लिए’, ‘एक ही चेहरा’, ‘रक्तचाप और अन्य कविताएँ’।1-गांधी मुस्कराते हैं हत्यारे भी जबसिर झुकाते हैंगांधी मुस्कराते हैं :प्यार ही करोपाखंड मत करो! 2-राष्ट्र की बात अंग्रेजों से जो बराबरमाफी मांगते रहेउनसे...

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लैंग्स्टन ह्यूज की कविता फ्रीडम ट्रेन : अनुवाद बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

लैंग्स्टन ह्यूज की कविता फ्रीडम ट्रेन : अनुवाद बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’

लैंग्स्टन ह्यूज़ (जीवनकाल : 1902-1967) : अमेरिका के प्रसिद्ध लोकप्रिय अश्वेत कवि। उन्होंने अपने विजन के प्रति ईमानदार रहते हुए अश्वेत-अमरीकी अनुभवों पर लगातार लेखन किया। बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’ : कवि और अनुवादक। 400 से अधिक विश्व कविताओं का हिंदी अनुवाद। कविता संग्रह...

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बांग्ला कविता  : जय गोस्वामी/ अनुवाद : मीता दास

बांग्ला कविता : जय गोस्वामी/ अनुवाद : मीता दास

बांग्ला के प्रसिद्ध कवि। कविता–संग्रह ‘पागली तोमार संगे’ के लिए 2000 में साहित्य अकादमी पुरस्कार। हिंदी और बांग्ला  में कविता लेखन एवं अनुवाद, छत्तीसगढ़ जन संस्कृति मंच की अध्यक्ष।1- हम हैं पथिक                                पेड़ का नाम पेड़ हैंधूल का नाम धूलनदियों के...

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आशंका : भगवान स्वरूप कटियार

आशंका : भगवान स्वरूप कटियार

        वरिष्ठ कवि। अद्यतन कविता संग्रह ‘मनुष्य विरोधी समय में’।बंदियो!तुम जहाँ पर भी होजो कुछ भी हो तुम्हारे पासआतंक, घुटन, तनाव और पीड़ामेरे पास भेज दोमछुआरो!जो कुछ भी हो तुम्हारे पासखाली जाल और समुद्र की पीड़ाभेज दो सब मेरे पास हे समस्त खेतिहरो!जो...

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वृक्ष-नर्तन : राजीव कुमार तिवारी

वृक्ष-नर्तन : राजीव कुमार तिवारी

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। भारतीय रेलवे सेवा में।  हवा के ताल पे झूमता वृक्षसृष्टि का सबसे प्राचीन एवं निपुण नर्तक हैहर वृक्ष का अलग नृत्यहर शाख की अलग भंगिमाहर पात की अलग मुद्रापर सबकुछ एक लय मेंएक क्रम मेंएक बृहत्तर चित्र को पूरा करता हुआहवा का...

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पहचान : नीरज नीर

पहचान : नीरज नीर

युवा कवि; काव्य संग्रह  ‘जंगल में पागल हाथी और ढोल’संप्रति सरकारी सेवा में।पहले जंगल खेतों के पास थे इतने पास कि जंगली जानवर कर देते थे कभी-कभी अतिक्रमित खेतों और जंगल की सीमा मेरे पिता ने देखे थे कई बार भालू और बाघ मेरी माँ समझती थी लकड़बग्घे की आवाज वे देखते ही समझ...

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उपेंद्र कुमार मिश्र की दो कविताएं

उपेंद्र कुमार मिश्र की दो कविताएं

      कविता संग्रह ‘मुझे कविता से डर लगता है’। ‘समकालीन अभिव्यक्ति’ पत्रिका का संपादन। 1. दीवारें दीवारें नहीं बाँटतीं बाँटती है दीवार खड़ी करने वाली मानसिकता यह मानसिकता दिखाई दे जरूरी नहीं लेकिन दिखाई जरूर देता है उसका परिणाम ऐसे परिणामों से केवल घर,...

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वेंटिलेटर और वुहान की चिड़िया : रुचि भल्ला

वेंटिलेटर और वुहान की चिड़िया : रुचि भल्ला

      युवा कवयित्री। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। 1. वेंटिलेटर चार जुलाई की सुबह दस बजेजब तुम कहते होनखासकोने की सड़क पर चलते हुए-इलाहाबाद कितना अच्छा है न!जी चाहता है कह दें कसम सेयह हमारा दिल है, दिलजले!इस तरह हमारा दिल न जलाओन लो इस...

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शब्द से शब्द तक : अमेय कांत

शब्द से शब्द तक : अमेय कांत

        युवा कवि। कविता संग्रह ‘समुद्र से लौटेंगे रेत के घर’ 1. बचे रहते हैं शब्द बहुत आसान होता हैबंदूक की किसी गोली के लिएसर को छेद देनाया फाड़ देना देह के किसी हिस्से कोलेकिन शब्द गोली की पहुँच सेहमेशा रह जाते हैं बहुत दूर शब्द चुन ही लेते हैं हर...

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उन औरतों के बारे में : परितोष कुमार पीयूष

उन औरतों के बारे में : परितोष कुमार पीयूष

        विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। उन औरतों के प्रति मैं ज्यादा कृतज्ञ हूँ जिन्होंने मेरी जिंदगी में कुछ बरसों का इजाफा किया है इस ग्रह को बचाए रखने के लिए यह कितनी अनिवार्य है   वे औरतें मेरी प्रेमिकाएँ नहीं रहीं कभी न ही मैं...

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दो कविताएं : अश्वघोष

दो कविताएं : अश्वघोष

        वरिष्ठ गीतकार। अद्यतन गीत संकलन: ‘गौरैया का घर खोया है’। 1. प्रासंगिक होना अब सत्ता के कुछ कारिंदे डाल रहे जनता पर फंदे चाह रहे प्रासंगिक होना बात हवा में करते हैं ये सच में झूठा भरते हैं ये चाहत की सारी फसलों को सिखा रहे बंजर में बोना...

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शंकरानंद की तीन कविताएं

शंकरानंद की तीन कविताएं

      युवा कवि। अब तक तीन कविता संग्रह। स्त्री के हाथ तमाम रेखाएं धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती हैं जो कुछ कोमल है वह घिस जाता है समय के साथ जिसे देखा था और पहचान गया था उंगलियों से अब वे उंगलियाँ धूसर हो गई हैं उन्हें थामता हूँ तो लगता है न जाने कितनी...

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युद्ध और बच्चे : उषा दशोरा

युद्ध और बच्चे : उषा दशोरा

      काव्य संग्रह – ‘भाषा के सरनेम नहीं होते’। संप्रति अध्यापन। 1. जब युद्ध की घोषणा हुईतब  हँसते हुए बच्चेफूल वाले पौधों को पानी दे रहे थे उनकी हँसी के भार से डरी कई बंदूकेंपौधों के पीठ के पीछे जा छुपींउनमें फूल के बीज होने की जिद होने लगीजिद थी  कि...

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कटोरे में चाँद : शिरोमणि महतो

कटोरे में चाँद : शिरोमणि महतो

          ‘महुआ’ पत्रिका का संपादन। अद्यतन कविता संग्रह ‘चाँद से पानी.   एक दिन सोचाबचपन के दिनों कोयाद किया जाएआँगन में बैठकरकटोरे में पानी भरकरदेखा जाए - चाँद को कटोरे के पानी मेंमुझे दिखा चाँदथका-हारा सामंदा-मंदा सा क्या पानी है...

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स्मृतियाँ मरतीं नहीं : राजेंद्र नागदेव

स्मृतियाँ मरतीं नहीं : राजेंद्र नागदेव

        कवि, चित्रकार, वास्तुकार। अद्यतन कविता संग्रह् ‘सुरंग में लड़की’। अंदर की दुनिया में बेआवाज़ बहुत बोलते हैं हमअक्सर मैं अवकाश या बिना अवकाश के समय भीअपने अतीत से बातें करता हूँ वहाँ अब मुझे वह कौआ कहीं दिखाई नहीं देताजो  दो खंभों के बीचझूलती...

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उजला-उजला दिन : लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता

उजला-उजला दिन : लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता

        असिस्टेंट प्रोफेसर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय। काव्य संग्रह ‘जिसे वे बचा देखना चाहते हैं’।             मैं जहाँ भी जाता हूँइक स्याहपन साथ लिए जाता हूँजिस भी कस्बा या शहर के बारे मेंजो कुछ भी सुना था कभी पहलेवह सबका सब बेमानी लगता हैफिर लगता है...

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रोटियाँ : जितेंद्र जलज

रोटियाँ : जितेंद्र जलज

      कविता संग्रह- ‘चिड़ियों ने आत्महत्या नहीं की’। रोटियाँ उसे भूख लगी है और उसके पास रोटी नहीं है उसके पास रोटी नहीं है तो उसे भूख क्यों लगी? इसके लिए किसी अदालत में भूख पर मुकदमा भी ठोंका नहीं जा सकता है सरकार रोटियाँ बांट रही है लेकिन भूखों की कतार...

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हम औरतें : कविता सिंह

हम औरतें : कविता सिंह

      युवा कवयित्री। सहायक प्राध्यापिका।  हम गुनहगार और बेशर्म औरतेंथाम कर बैठ सकती हैं हाथउन सभी अपरिचित पुरुषों केजिनके हृदय हो रहे हैं विदीर्णअपनी स्त्रियों की प्रसव वेदना कीकातर चीख सुनकर हम गुनहगार और बेशर्म औरतेंचूम सकती हैं माथेउन सभी...

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लुईस ग्लूक की 6 कविताएं

लुईस ग्लूक की 6 कविताएं

अजीब बात है कि सच को सच कहने से गुरेज़ करने वाली इस दुनिया ने अगर सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं, तो वह ज़िदगी की तल्ख़ हकीकतों के बीच की ज़िंदगी का रोमन बयान करने वाली कवियों की कौम है। अगर सबसे ज़्यादा दायरे किसी के आसपास खींचे हैं, तो वह 'कवि' है और जगह और ज़रूरत को लेकर सबसे...

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