कविता
सीने में फांस की तरह : शैलेंद्र चौहान

सीने में फांस की तरह : शैलेंद्र चौहान

चार कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह और आलोचना पुस्तक 'कविता का जनपक्ष' प्रकाशित। जयपुर में रहकर स्वतंत्र लेखन। कविताएं कविताओं पर लदी हुई हैंबुकशेल्फ में सजी हुई हैंपोखर में काई की तरह हैं मौजूदनदी में बहती नाव के तले में चिपकी हैंसमुद्र में तरह-तरह के बैक्टीरिया...

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दो कविताएं : ब्रज श्रीवास्तव

दो कविताएं : ब्रज श्रीवास्तव

चर्चित कवि। तमाम गुमी हुई चीज़ें, घर के भीतर घर, ऐसे दिन का इंतज़ार, और आशाघोष चार कविता संग्रह प्रकाशित। सच बोला तो पहली बार मैंसच बोला थालोग खुश हुए थे दूसरी बार बोला तोकानाफूसी हुईतीसरी बार बोलातो मुझे समझाईश दी गईकम बोलने की चौथी बार बोलातो सब खामोश हो गए पांचवी बार...

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कविताएं : बृजनाथ श्रीवास्तव

कविताएं : बृजनाथ श्रीवास्तव

कवि और लेखक। अद्यतन नवगीत संग्रह,‘धुंध में लिपटे हुए दिन’। हाँफते दिन भर कई युगों सेलकीरें हाथ की हमबांचते दिनभर महल में नाचतीं परियांपहनकर मणि जड़े गहनेविलासी मधुक्षणों के सुखवहीं आकर लगे रहने इधर हमरोज पन्ने भाग्य के हैंजांचते दिनभर सुगंधित भोग की थालेंवहां दिनभर...

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स्वप्न : लैंग्स्टन ह्यूज़, अनुवाद : महिमा श्रीवास्तव

स्वप्न : लैंग्स्टन ह्यूज़, अनुवाद : महिमा श्रीवास्तव

महिला रोग चिकित्सक, वरिष्ठ आचार्य लैंग्स्टन ह्यूज़  (1902- 1967) अमरीकी कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, उपन्यासकार और नाटककार।जाज़ कविता के प्रारंभकर्ताओं में से एक। स्वप्नों को कसके पकड़े रखो क्योंकि यदि स्वप्न मरे तो जीवन एक कटे परवाली चिरैया है जो उड़ नहीं सकती स्वप्नों...

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पहचान पत्र गुम हो जाने पर : राजेंद्र उपाध्याय

पहचान पत्र गुम हो जाने पर : राजेंद्र उपाध्याय

सुपरिचित कवि। अद्यतन कविता संग्रह ‘ईश्वर एक अनाड़ी फोटोग्राफर है’। हर दिन लेकर चलना होता हैअपनी पहचान अपनी जेब मेंमैं घर भूल कर नहीं आ सकता अपनी पहचानभले ही अपने दिल को कहीं भूलकर आ जाऊं मैं रखता हूं रोज उसेअपनी जेब मेंघर से निकलने से पहलेजैसेअपने दिल को रख रहा होऊंमैं...

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संस्कृत से अनुदित दो कविताएं : हर्षदेव माधव

संस्कृत से अनुदित दो कविताएं : हर्षदेव माधव

साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कवि। 167 पुस्तकों  के लेखक। घाव जहां पेड़ थेवहां है बंजर जमीनजहां थी नदीवहां है रेतजहां थे घोंसलेवहां बिखरे पड़े हैं तिनकेजहां घर थावहां है टूटी हुई दीवारेंऔर ईंटों का संघातजहां थे शब्दवहां है मौन का झुंडश्मशान की शांतिजहां थे वसंत के...

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कविताएं : अशोक सिंह

कविताएं : अशोक सिंह

जिला साक्षरता समिति दुमका में जिला कार्यक्रम प्रबंधक।  दो कविता संग्रह‘कई-कई बार होता है प्रेम’और ‘असहमति में उठे हाथ’। कठपुतलियां कठपुतलियां नाच रही हैंसदियों सेसदियों से कुछ अदृश्य हाथनचा रहे हैं उन्हेंअंगुलियों के इशारे पर कठपुतलियां थक चुकी हैंसदियों से...

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आधी रात : शरदचंद्र श्रीवास्तव

आधी रात : शरदचंद्र श्रीवास्तव

11 मार्च 1972 को जन्म। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्विविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग में सहायक आचार्य रहे। अर्थशास्त्र से संबंधित विषयों पर आधारित आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। पिछले दिनों कोरोना से संक्रमित होकर मृत्यु।  आधी रात जब जाग जाता हूँतो जाग जाती...

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21वीं सदी कविता से संवाद-4 : विशेष कवि नीलेश रघुवंशी की कविताएं

21वीं सदी कविता से संवाद-4 : विशेष कवि नीलेश रघुवंशी की कविताएं

1969 में जन्म। बहुचर्चित कवि और लेखिका। ‘घर निकासी’, ‘पानी का स्वाद’, ‘अंतिम पंक्ति में’, ‘कवि ने कहा’ (चुनी हुई कविताएं), ‘खिड़की खुलने के बाद’  आदि कविता संग्रह। कविता और उपन्यास के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए नाटक और कई टेलीफिल्मों के लिए पटकथा-लेखन भी किया। एक...

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महामारी के बीच जीवन- दो कविताएं, अनुवाद : उपमा ऋचा

महामारी के बीच जीवन- दो कविताएं, अनुवाद : उपमा ऋचा

आर्थर वाली 19 अगस्त 1889-27 जून 1966इंग्लिश प्राच्य विद्वान, चीनी भाषाविद एवं अनुवादकसेंसरशिप मुश्किल नहीं हैपरदेस की खबरों को सेंसर करनाअलबत्ता मुश्किल हैखुद अपने ख्यालों को सेंसर करनाचुपचाप बैठे रहनाऔर देखना अंधे घोड़े पर सवार बूढ़े कोजो देख नहीं सकतामगर फिर भी दौड़ा...

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मलयालम कविता रात की बारिश : सुगाथाकुमारी, अनुवाद : बालमुकुन्द नंदवाना

मलयालम कविता रात की बारिश : सुगाथाकुमारी, अनुवाद : बालमुकुन्द नंदवाना

कवि और अनुवादक सुगाथाकुमारी प्रख्यात मलयालम कवयित्री, पर्यावरणविद और महिला कार्यकर्ता, 86 वर्षीया पद्मश्री सुगाथाकुमारी का कोरोना महामारी से थिरुवनंतपुरम में 23 दिसंबर 2020 को निधन हो गया।उनकी प्रसिद्ध कविता Night Rain  का हिंदी अनुवाद - रात की बारिशकिसी पागल...

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चंद बयान : विनोद ‘शलभ’

चंद बयान : विनोद ‘शलभ’

वरिष्ठ कवि। अद्यतन ग़ज़ल संग्रह ‘आओ नई सहर का नया शम्स रोक लें’, कविता संग्रह , ‘चारों दिशाएं’। संप्रति- एडवोकेट दिल्ली शिमला हाई कोर्ट्स 1सियासी होशियारी के अदाकारी के मौसम हैंनहीं तो आ रहे फिर अब गिरफ़्तारी के मौसम हैं हमारे ‘सच’ में जो हामी भरे हैं देशप्रेमी वो...

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कुछ कविताएं : अतुल चतुर्वेदी

कुछ कविताएं : अतुल चतुर्वेदी

दो कविता संग्रह, चार व्यंग्य संग्रह प्रकाशित। ‘व्यंग्योदय’ व्यंग्य वार्षिकी का संपादन। सौदागर जी हां !सौदागर हैं वेखरीद लेंगे मुस्कान फेंक कर विश्वासशब्द बिखेर कर भोलापनस्वप्न दिखाकर ईमानपूंजी की चकाचौंध बताकरखुद्दारी खरीद लेंगेलंबा तजुरबा है उन्हेंकिसे बेचकर क्या...

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जार्जियन कवयित्री इका केवनिशविली की कविता : अनुवाद अवधेश प्रसाद सिंह

जार्जियन कवयित्री इका केवनिशविली की कविता : अनुवाद अवधेश प्रसाद सिंह

लेखक, भाषाविद और अनुवादक। जार्जियन कवयित्री इका केवनिशविली पेशे से पत्रकार हैं, जो मानवाधिकार के क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय हैं। उनके चार कविता-संग्रह, एक कहानी संग्रह और कई निबंध प्रकाशित हो चुके हैं। कई पुरस्कारों से सम्मानित। आज मेरे पति देर रात घर आने वाले...

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मनोज कुमार झा की कविताएँ

मनोज कुमार झा की कविताएँ

        चर्चित युवा कवि। दो कविता संग्रह ‘तथापि जीवन’, ‘कदाचित अपूर्ण’।गांव की तरफ भागते हुए कितनी दूर है गांवअपने गांव की दूरी दूसरों से पूछता हूँक्या मुझे भूख लगी है- दूसरों से पूछता हूँक्या मैं मर रहा हूँ-दूसरों से पूछूंगाकितनी दूर है गांवकहां...

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कविताएँ जावेद आलम खान

कविताएँ जावेद आलम खान

      युवा कवि, शिक्षा निदेशालय, दिल्ली के अधीन शिक्षक। मुझे टुकड़ा-टुकड़ा बांट देना किसी दिन पानी-सा बहूंजमूं पिघलूं और भाप बन बादल में रहूं किसी दिन बदल जाऊं आग मेंभभकूं सुलगूं और बदल जाऊं राख में किसी दिन हवा हो जाऊंउड़ू उड़ाऊं और वायुमंडल में खो...

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तीन कविताएँ : मनीषा झा

तीन कविताएँ : मनीषा झा

      युवा कवयित्री।  दो कविता संग्रह – ‘शब्दों की दुनिया’, ‘कंचनजंघा समय’ सहित आलोचना की कुछ पुस्तकें प्रकाशित। उत्तर बंग विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर।  सीख जवान होती मेरी बेटियो सुनो!ब्याह अगर करना तो खुद वर चुननायाद रखना पिता एक परंपरा...

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अंबिका दत्त की कविता दीवारें

अंबिका दत्त की कविता दीवारें

        वरिष्ठ कवि। हिंदी के साथ राजस्थानी में भी लेखन। ‘आवों में बारहों मास’, ‘कुछ भी स्थगित नहीं’ (हिंदी कविता संग्रह)।1.दीवारें उठती हैंतब लोग लड़-लड़ कर मरते हैंदीवारें गिर रही हैंलोग दब-दब कर मर रहे हैं।2.छोटा-सा शब्द है दीवार - तीन अक्षरों...

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कुछ कविताएँ : संजय राय

कुछ कविताएँ : संजय राय

      युवा कवि। एक पुस्तक ‘कुंवर नारायण का कविता लोक’।आउट स्विंग वर्तमान का मकान अतीत की ईंटों से बना होता है अतीत की बेचैनियां वर्तमान की पिच पर दूब की तरह उगा करती हैं समय का रोलर बार-बार चलाया जाता है पिच पर और जिंदगी है कि तेजी से आती हुई आउटस्विंग...

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किस बूते धरती पर टिकते : नरेन्द्र पुण्डरीक

किस बूते धरती पर टिकते : नरेन्द्र पुण्डरीक

        सुपिरिचित कवि। अद्यतन कविता संकलन ‘इन हाथों के बिना’। केदारनाथ अग्रवाल स्मृति शोध संस्थान से जुड़े।जब मैं पैदा हुआ थाचांद में बैठी एक बुढ़िया की चर्चा हो रही थीबुधिया के काम के बारे मेंहर आदमी के अलग-अलग विचार थेपचास साल के आस-पास थे पिताइन...

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