कविता
मेघराज मेश्राम, अनुवाद : प्रवीण तुरानकर

मेघराज मेश्राम, अनुवाद : प्रवीण तुरानकर

मेघराज मेश्रामयुवा कवि। मराठी कविता संग्रह ‘माणूस असण्याच्या नोंदी’ प्रकाशित। संप्रति ‘दैनिक लोकमत’ मे कार्यरत।   प्रवीण तुरानकरलेखक और अनुवादक। मराठी-हिंदी अनुवादित कविता संग्रह ‘जब होती है दगान’, और ‘मेरी हयात का प्रमाण’ प्रकाशित।  युद्ध : कुछ टिप्पणियां...

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संजीव प्रभाकर

संजीव प्रभाकर

    गजल संग्रह ‘ये और बात है’। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और संकलनों में प्रकाशित। संप्रति भारतीय वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त। गज़ल 1है कोई साजिश कि है बकवास या कुछ और हैजो बताया जा रहा, इतिहास या कुछ और है? जिस तरह हम दे रहे हैं पूर्वजों को...

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शचींद्र आर्य

शचींद्र आर्य

    युवा कवि। ‘दोस्तोएवस्की का घोड़ा’ (डायरी) और ‘कुतुब मीनार खड़े-खड़े थक गया होगा’ (कविता संग्रह) प्रकाशित। धागे गर्मी की दुपहरों में जब कभीएक चींटा दूसरे चींटे कोखींच कर ले जाते हुए दिखता हैतब लगता हैउनमें बची रह गई हैं कुछ नमीकुछ स्मृतियां, कुछ स्वप्न उनमें...

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मणि मोहन

मणि मोहन

    कवि और अनुवादक। छह कविता संकलन और छह अनुवाद की पुस्तकें प्रकाशित। संप्रति अध्यापन।   दोस्त देर तक बैठे उसके साथअनगिनत दुख अपने गिनाएपर दोस्त बहुत ढीठ थाउसने किसी भी दुख कोदुख ही नहीं मानासामने बैठा हुआ मुस्कुराता रहा देर तकमैं भी थक चुका थाउसे अपने...

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हिमांशु भारद्वाज

हिमांशु भारद्वाज

    स्नातकोत्तर का छात्र।   समय तुम्हें गिन रहा है लेकिन तुम-अपने-आप में डूबे हुएइतिहास की किसी फुटनोट-सी चुप्पी मेंखड़े होकिताब में छपे पेड़ की तरहजिसकी पत्तियां कभी झरती नहींजिसे आंधी नहीं छूतीजिस पर धूप भी केवल उदाहरण बनकर आती है तुम्हें नहीं मालूमकि बाहर...

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धर्मपाल महेंद्र जैन

धर्मपाल महेंद्र जैन

    कनाडा के प्रवासी कवि। चार कविता संग्रह प्रकाशित। सृष्टि का वितान जब पहली बूंद गिरी होगी धरती परईश्वर ने बादल से पूछा होगाकैसे ले आया वह अमृत कलश समुद्र से जब पहला बीज अंकुरित हुआ होगा धरती परईश्वर चकित रह गए होंगेमिट्टी की ऊर्जा को जीवन में बदलते देख जब...

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सारिका भूषण

सारिका भूषण

    कविता संग्रह ‘मां और अन्य कविताएं, ‘मौन को मुखर होने दो’ एक लघुकथा संग्रह -‘एक स्पेस’। भोजपुरी में भी लेखन। नई खबर उन्हें नहीं पसंद है सपाट रास्तेऔर सरल समाजवे चाहते हैं कुछ हलचलकुछ उठापटकताकि उनका अस्तित्व बना रहेवे उकसाते रहेंआग सुलगाते रहेंतिल को ताड़...

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अनिल गंगल

अनिल गंगल

    वरिष्ठ कवि।अद्यतन कविता संग्रह ‘बैंड का आखिरी वादक’। बच्चे की मुस्कान बच्चे की मुस्कान सुबह की पहली किरण हैजो बिना पूछे खिड़कियों पर उतर आती है वह किसी दर्शन की किताब नहीं पढ़तीफिर भी जानती है-कि दुनिया को बचाने के लिएएक खिलखिलाहट काफी है उसके होठों...

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पन्ना त्रिवेदी

पन्ना त्रिवेदी

    गुजराती की प्रसिद्ध कथाकार और कवयित्री। हिंदी में भी लेखन। कई कहानी संग्रह। हिंदी कविता संग्रह ‘खामोश बातें’, ‘पंख में बारिश’, ‘ढाई इंच का चांद’, ‘धूप के हस्ताक्षर’ आदि। दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर। धान रोपती स्त्रियां जागते हुए दिनजब...

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सपना भट्ट

सपना भट्ट

    युवा कवयित्री। ‘चुप्पियों में आलाप’ और ‘भाषा में नहीं’ काव्य संग्रह प्रकाशित। संगीत और सिनेमा में गहरी रुचि। वर्तमान में उत्तराखंड शिक्षा विभाग में अध्यापन कार्य। स्वीकारोक्ति एक दिनरक्त मांस और अस्थि से नहींबल्कि मर्यादा से बंधीमेरी इस देह को छोड़ देंगे...

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स्पेनी कविताएं : फ्रांसिस्को मुनोज सोलर, अनुवाद :अनीता पंडित

स्पेनी कविताएं : फ्रांसिस्को मुनोज सोलर, अनुवाद :अनीता पंडित

फ्रांसिस्को मुनोज सोलर(1957) स्पेनी कवि। कुल 31 कविता-संग्रह प्रकाशित। इनकी कृतियों के अनुवाद विश्व के कई भाषाओं में हुए हैं।   अनीता पंडित(1982) अनुवादक और संपादक। साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका ‘संवदिया’ का दस वर्षों का संपादन। ए. जे. थॉमस की अंग्रेजी कविताओं के...

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गिरीश पंकज

गिरीश पंकज

    साहित्य और पत्रकारिता में चार दशकों से सक्रिय। साहित्य की विविध विधाओं में शताधिक पुस्तकें प्रकाशित। अनियतकालीन अनुवाद पत्रिका ‘सद्भावना दर्पण’ का तीन दशकों से संपादन। गजल फिर कोई किस्सा पुराना याद आता हैहाँ, वही गुजरा जमाना याद आता है मां-पिता ने जो...

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मीनू मदान

मीनू मदान

    असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय। काव्य संग्रह- ‘अरे ओ वसंत!’ बहस हम एक दिन करेंगे बहस हम बहस करेंगेअट्टालिकाओं के कंगूरेजिनकी रोशनी से जगमगाते हैंउनके घर को अंधेरे क्यों खा जाते हैं हम बहस करेंगेशहर कौन सी डुगडुगी बजाता हैकि गोबर...

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मनोज कुमार झा

मनोज कुमार झा

      सुपरिचित कवि। अद्यतन कविता संग्रह ‘किस्सागो रो रहा है’। अंत से पहले एक दिन कुछ नहीं बचताअस्थियां अलग हो जाती हैं राख से उसी एक दिन से पहलेहैं बहुत से दिन उसी बहुत दिन मेंबहुत से मैं, बहुत से तुम। बुलबुले के भीतर लौटता हूँ गांव लौटता हूँतो गांव...

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राकेश रंजन

राकेश रंजन

  चर्चित कवि। संप्रति बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में प्राध्यापक। ‘अभी-अभी जनमा है कवि’, ‘चांद में अटकी पतंग’ और ‘दिव्य कैदखाने में’ (कविता संग्रह)। ‘मल्लू मठफोड़वा’ (उपन्यास), ‘रचना और रचनाकार’ (आलोचना)। ‘कसौटी’ (अनियतकालीन साहित्यिक पत्रिका) के विशेष...

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देवेश पथ सारिया

देवेश पथ सारिया

    युवा कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। कविता संकलन : ‘नूह की नाव’,  कहानी संग्रह : ‘स्टिंकी टोफू’। आदमीयत से बेदखल आदमी अपने किस्सों में तुम कैसेपरिभाषित करते हो उस आदमी को :वह आदमी जिसका अपना कोई मुल्क नहीं हैवह आदमीजिसकी हँसी में रिरियाहट की...

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राजेंद्र उपाध्याय

राजेंद्र उपाध्याय

    सुपरिचित वरिष्ठ कवि। अद्यतन कविता संग्रह ‘ईश्वर एक अनाड़ी फोटोग्राफर है’। फूलों की बर्बादी के खिलाफ एक वक्तव्य मेरा बस चले तोमैं किसी को नहीं तोड़ने दूं फूल फूल खिले ही भले लगते हैंतुम्हारी बगिया मेंया मेरी बगिया मेंदुनिया के घर में खिलेफूल भी दोस्ती का...

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ओम नागर

ओम नागर

    हिंदी और राजस्थानी भाषा के कवि, अनुवादक। संपादन-अनुवाद की इक्कीस पुस्तकें प्रकाशित। अद्यतन हिंदी कविता संग्रह ‘धार के विपरीत दौड़ती मछलियों की तरह’। हम औरतों का क्या गालियां तो और भी बहुत हैंउलाहने भी चुगलखोरलंकाहोलीविधवाढीठनपूतीनातेकरी हम औरतों का क्याहम...

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पूनम मनु

पूनम मनु

      कई विधाओं में लेखन। दो उपन्यास, दो कहानी संग्रह, एक कविता संग्रह प्रकाशित। अद्यतन कहानी संग्रह ‘ना उम्मीद नहीं हम’। समय से जंग दुनिया के सबसे व्यस्त लोग वे हैंजिन्हें भोजन का समय भी गिनकर मिलता है वे समय की होड़ में नहीं भागतेबल्कि किसी साथी के...

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श्रद्धा टिबड़ेवाल

श्रद्धा टिबड़ेवाल

    कवियत्री। कविता संग्रह ‘पद्म पराग’ प्रकाशित। उलझन मैं नहीं सुलझा पाई अपने जीवन कोअपने केशों की तरहन ही संभाल पाई अपने रिश्तों कोअपने आंचल की तरहजब-जब आंचल कसकर बांधा हैउसमें दरारें आ गई हैंऔर खुला छोड़ातो फिसलता ही रहा हैसो बस खोंस लेती हूँ इसका एक सिरा...

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