कविता
नरेंद्र पुंडरीक

नरेंद्र पुंडरीक

      सुपरिचित कवि। अद्यतन कविता संकलन ‘इन हाथों के बिना’। केदारनाथ अग्रवाल स्मृति शोध संस्थान से जुड़े। उत्सव का द़ृश्य न अब नदी थीन घाट थेन वे पत्थर थेजिन पर वह एड़ियांघिसती थी अपनी यह एक द़ृश्य थाजो अब नहीं हैघाट के पत्थरों केरोज कुछ न कुछ पिघलने काइस...

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जियाउर रहमान जाफरी

जियाउर रहमान जाफरी

    युवा गजलकार। हिंदी प्राध्यापक। ले गया था वो आंखों का भी मंजर ले गया थामेरा आंसू समंदर ले गया था कभी उसकी जमींदारी रही थीगया तो सिर्फ बिस्तर ले गया था ये सच है जीत ली थी उसने दुनियामगर फिर क्या सिकंदर ले गया था अजब उल्फत उसे महबूब से थीलगा जो सर पे पत्थर...

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कैलाश केशरी

कैलाश केशरी

    व्यवसाय के साथ निरंतर साहित्यि लेखन। पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।   सर्द सुबह में प्रेम धूप आज भीकोहरे से जूझ रही हैहवा में ठंडक हैमगर वह चुभती नहींबस धीरे से त्वचा पर उतरकरमन को छू जाती है मैं चाय की चुस्की लेता हूँऔर सोचता हूँशायद यही होता है...

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शिव कुशवाहा

शिव कुशवाहा

    युवा कवि। काव्य संग्रह ‘तो सुनो’ और ‘दुनिया लौट आएगी’। संप्रतिः अध्यापन।   उम्मीद के पहाड़ समय अपने सुनहरे पंख लगाकरउड़ रहा है अनंत ऊचाइयों परवह मुट्ठी से फिसलती रेत की मानिंदफिसल रहा है हमारी पहुंच से बहुत दूर आकाश में उड़ रहे पंछीसमय की पदचाप सुन रहे...

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मलयालम कविताएं :  अक्कितम, अनुवाद : आरसु

मलयालम कविताएं : अक्कितम, अनुवाद : आरसु

अक्कितम(1926-2020) भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित मलयालम के प्रसिद्ध कवि। इन्हें दार्शनिक का कवि माना जाता है। वे प्रेम की शक्ति में यकीन करते थे। कविताओं के अलावा नाटक, लघु कथाएं, निबंध भी लिखे। आरसुवरिष्ठ साहित्यकार और अनुवादक। भारतीय। हिंदी पुस्तकें ‘आधुनिक वातायन...

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अनुजीत इक़बाल

अनुजीत इक़बाल

    वरिष्ठ कथाकार और कवयित्री। अंग्रेजी की चार किताबें प्रकाशित। नई परिभाषाएं दिशाएं रात भर जागी सैनिक की आंखेंअब केवल दिशाएं पहचानती हैंहर घंटे गुजरता है एक एयर अटैकसन्नाटे को चीरता हुआबादलों में चीख लिखता हुआ। आसमान आसमानअब कैनवास नहींएक स्क्रीन हैजहां बम...

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प्रदीप मिश्र

प्रदीप मिश्र

    कुछ अखबारों के साहित्य-पृष्ठ और पत्रिकाओं के अंकों का संपादन। कविता संग्रह ‘फिर कभी’ और ‘उम्मीद’। उपन्यास ‘अंतरिक्षनगर’ तथा बाल उपन्यास ‘मुट्ठी में किस्मत’ प्रकाशित। संप्रति वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर कार्यरत। आतंकवादी का आत्मकथ्य वह मुझे देखकर...

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कैलाश केशरी

प्रियंका सिंह

    युवा कवयित्री। शोधार्थी, कलकत्ता विश्वविद्यालय।    यात्राओं के संगी देखोधुंध से उड़ते बादलरुई की फाहों की तरहआकर ठहर गए हैंहमारी हथेलियों मेंजुड़ी हुई हथेलियों में समाहित हैहमारा संसार तुम्हारे बाएं कांधे के सहारेटिका मेरा मन है हरासदाबहार वृक्षों वाले वन...

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सिद्धार्थ बाजपेयी

सिद्धार्थ बाजपेयी

    वरिष्ठ कवि।  कविता संग्रह ‘आसान सी बातें’ और अंग्रेजी की एक किताब ‘पेपर बोट राइड’ प्रकाशित।   बात करती नहीं देनबा नदी बात करती नहीं देनबा नदीबस बढ़ जाती है आगेकनखियों से देखती अपनी आंखों का रंग पूछती है आकाश सेअपना चेहरा देखती हैचमकती सिंदूरी शाम के आईने...

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अश्विनी कुमार त्रिपाठी

अश्विनी कुमार त्रिपाठी

    युवा शायर। अद्यतन गजल संग्रह ‘हाशिए पर आदमी’। विभिन्न पत्रिकाओं में गजलें प्रकाशित। एक दर्द को अश्आर में कहने के फन से राब्ताहिज्र की रातों ने जोड़ा है सुखन से राब्ता पेड़ से दीमक का, रोगों का बदन से राब्तायूं भी है कुछ सर-फिरों का, इस वतन से राब्ता दिल के...

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चंद्रेश्वर

चंद्रेश्वर

    वरिष्ठ कवि। कविता संग्रह, ‘अब भी’, ‘सामने से मेरे’ और ‘डुमरांव नजर आएगा’। भोजपुरी में भी लेखन। हार कर नहीं हारा क़स्बे की चाय दुकान मेंटूटही बेंचहिलती मेज़ की संगति में रहते हुएलिखी मैंने कई कविताएं मोबाइल सेदोपहर शाम के वक़्त लिखते वक्त घिरे रहनासामान्य...

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नंदा पांडेय

नंदा पांडेय

    वरिष्ठ कवयित्री। काव्य संग्रह- ‘बस कह देना कि आऊंगा’, ‘मनरंगना’।   मुस्कराना जब उन्होंने कहा‘लड़की होकर इतना बोलती हो?’मैंने होंठों पर रख लीआधी मुस्कानजिसमें पूरा इतिहास थासती सावित्री और सीता का जब मेरी रोटियांथोड़ी मोटी बन आईंमैंने आंच में नहीं,अपने मन...

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शुभ्रा ओझा

शुभ्रा ओझा

      युवा कवयित्री एवं कहानीकार। कहानी संग्रह ‘आखिरी चाय’ प्रकाशित। संप्रति शिकागो में शिक्षण कार्य।   गौरैया इस बार गौरैया परकविता नहीं लिखेंगेऔर न ही लिखेंगे कोई गीतइस बार गौरैया कोसुंदर नहीं कहेंगेऔर न ही कहेंगेउसे अपना मीतइस बार गौरैया के लिएरखेंगे...

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राजकुमार गीत

राजकुमार गीत

    कविता संग्रह ‘शाल वन की धरा से’, ‘कसौटी पर कविताएं’, ‘उर्वि’ एवं ’शतरंग’। संप्रति शिक्षक के पद पर कार्यरत।    शहर के भीतर एक और शहर कितने लोग हैं इस शहर मेंफिर भी हर गली के मोड़ परएक अनकहा सन्नाटा बसता हैजैसे कोई शब्द खुद से डर गया हो हजारों चेहरों के...

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सुजाता कुमारी

सुजाता कुमारी

      कवयित्री और समीक्षक। कविता संग्रह ‘पोखर का पानी’ प्रकाशित। संप्रति स्वतंत्र लेखन। दादी और मैं मेरी दादीजब भी मेरे घर आतीवह जैसे समूची आतीमन-आत्मा सब हमारे लिए लेकर आतीजब हमारे संग होतीतब न दादाजी की चिंता न चाचा और बच्चों कीन उसे अपने घर की वैसी...

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अरुण आदित्य

अरुण आदित्य

    वरिष्ठ कवि। कविता संग्रह, ‘रोज ही होता था यह सब’, ‘धरा का स्वप्न हरा है’। उपन्यास, ‘उत्तर वनवास’ रात-बारात विचित्र बारात थी वहघोड़ी, बग्घी या कार नहींबुल्डोजर पर सवार था दूल्हा सड़क छेंककर चल रही थी बारातसड़क के दोनों तरफमकानों की छतों पर खड़े लोगकर रहे थे...

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जितेंद्र जलज

जितेंद्र जलज

    वरिष्ठ कवि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। एक कविता संग्रह ‘चिड़िया ने आत्महत्या नहीं की’। कुछ तो है रातरानी की तरह महकती हुईदुनिया न नहींपर कुछ तो हैजंगल के भीतरजहां पगडंडियां लेकरजाती हैं हमेंकुछ तो हैजो हमें अपनी तरफखींचती हैकुछ तो हैरसीले...

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शंकरानंद

शंकरानंद

    सुपरिचित कवि। तीन कविता संग्रह ‘दूसरे दिन के लिए’, ‘पदचाप के साथ‘ और ‘इंकार की भाषा’ प्रकाशित। संप्रति अध्यापन।  चप्पल और टूट गई चप्पल भी एक दिन रखे-रखेजिसे पहनने वाला कोई नहीं थाजो पांव थे वे निकल गए थे खाली पैरबिना बताए एक ऐसी यात्रा परलौटना जहां से...

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प्रेम रंजन अनिमेष

प्रेम रंजन अनिमेष

    चर्चित कथाकार और कवि। साहित्य की कई विधाओं में लेखन। कहानी संग्रह ‘लड़की जिसे रोना नहीं आता था’, ‘माई रे...’, ‘एक मधुर सपना’, ‘पानी पानी’, ‘एक स्वप्निल प्रेमकथा’ आदि। बच्चों के लिए भी लेखन। संगीत से लगाव।  अवतारपुरुष जब जब होती धर्म की हानि साधुओं का...

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गीता मलिक

गीता मलिक

      युवा कवयित्री। संप्रति शामली जनपद (उत्तरप्रदेश) के एक परिषदीय विद्यालय में अध्यापक। स्त्रियों का जत्था क्या देखा है तुमनेदुखी स्त्रियों का जत्थाएक ही दिशा की ओर चलते हुएएक ही शोक गीत गाते हुएएक सूखती नदी की खोज मेंझाड़ियों में रास्ते खोजते हुए क्या...

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