मल्टीमीडिया
कितना वसंत है इस पतझर में : उपमा ऋचा

कितना वसंत है इस पतझर में : उपमा ऋचा

'वज्रादपि कठोर-मृदुनि कुसुमादपि' निराला एक विराट समष्टि का नाम है। जीवन को कविता में और कविता को जीवन में उतारकर वंचितों और उपेक्षितों की वेदना, भूख, मान को अपनी आत्मा में महसूस करने वाला साधक 'निराला' है। वो महाकाव्य का नायक है। वो इतिहास है। इतिहास पुरुष है। वो...

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पतझर, वसंत और प्रेम की तीन कविताएं

पतझर, वसंत और प्रेम की तीन कविताएं

मालवा की गंध में रचे-बसे नरेश मेहता की जन्मशती के अवसर पर वागर्थ की मल्टी-मीडिया प्रस्तुति प्रत्येक नई अभिव्यक्ति को आरंभ में विरोध सहना होता है, लेकिन वर्चस्व वरेण्य बनकर ही रहता है। कल तक, आज की कविता उपेक्षिता थी, लेकिन आज स्वीकृता है। इसका एकमात्र कारण इस काव्य की...

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कामायनी स्वप्न सर्ग : एक पाठ, एक दृष्टि

कामायनी स्वप्न सर्ग : एक पाठ, एक दृष्टि

"बुद्धिवाद के विकास में, अधिक सुख की खोज में, दुःख मिलना स्वाभाविक है. यह आख्यान इतना प्राचीन है कि इतिहास में रूपक का भी अद्भुत मिश्रण हो गया है. इसलिए मनु, श्रद्धा और इड़ा इत्यादि अपना ऐतिहासिक महत्व रखते हुए, सांकेतिक अर्थ की अभिव्यक्ति करें, तो मुझे कोई आपत्ति...

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गुलाबी चूड़ियां : बाबा नागार्जुन

गुलाबी चूड़ियां : बाबा नागार्जुन

जीवन एक अनंत राग है, यह राग जब किसी साज़ पर जा ठहरता है तो सुर सहेजे जाते हैं और यही राग जब किसी कवि के मन में उतरता है तो लिखी जाती है कविता! आइए वागर्थ की विशेष मल्टीमीडिया प्रस्तुति 'कविता चित्रपाठ' के क्रम में इस बार सुनते हैं एक ऐसे ही राग में ढली नागार्जुन की...

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2020 नोबल विजेता लुईस ग्लूक की कविताएं

2020 नोबल विजेता लुईस ग्लूक की कविताएं

कविता मन से मन का संवाद है। माने एक मन, मुंह बनकर संदेश देता है और एक मन, कान बनकर उसे ग्रहण करता है। बस इतना ही; इससे ज़्यादा कुछ नहीं, लेकिन इससे कम भी कुछ नहीं! क्योंकि मेरे लिए कानों से ग्रहण किया गया, कविता का अनुभव आंखों से प्रेषित होता है। (इसलिए कवि के रूप में)...

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बापू/ सुमित्रानंदन पंत

बापू/ सुमित्रानंदन पंत

गांधी जयंती के अवसर पर नमन उस महात्मा को, जिन्होंने हमें शब्द और सत्य के आग्रह का मार्ग दिखाया. रचना : सुमित्रानंदन पंतआवृत्ति : आशीष तिवारीदृश्य एवं ध्वनि संपादन : उपमा ऋचाप्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा परिषद कोलकाता....

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श्रद्धांजलि; कवि कभी नहीं मरता/ मल्लिका अमरशेख

श्रद्धांजलि; कवि कभी नहीं मरता/ मल्लिका अमरशेख

  कवि कभी नहीं मरता... केदारनाथ के लिए शृद्धांजलि शब्द : मल्लिका अमरशेखस्वर एवं ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु दृश्य संयोजन : उपमा ऋचा  ...

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