पाठकीय प्रतिक्रिया
अनकहे दर्द की अभिव्यक्ति

अनकहे दर्द की अभिव्यक्ति

ख़ास चिट्ठी : अनामिका सिंह, कोन्नगर सितंबर 2019 के उत्तरार्ध में प्रकाशित वागर्थ की कविताएँ उन अनकहे पहलुओं को उजागर करने की कोशिश करती हैं जहाँ से हम भरसक अनजान बने रहने की कोशिश करते हैं। ज्योति चावला की कविता ‘उनके पैरों की आवाज से कांप रही है पृथ्वी’ उसी बदरंग पहलू...

read more
पीड़ा के पीछे का मनोविज्ञान

पीड़ा के पीछे का मनोविज्ञान

ख़ास चिट्ठी : अनुपमा ऋतु, युवा लेखिका एवं अनुवादक स्त्री के सवालों से संवाद करता सितंबर अंक विचार के लिए कई सशक्त बिन्दु थमाता है। कई सवाल पैदा करता है। कई जवाब सौंपता है। शक्ति, शोक और सशक्तिकरण की त्रयी को तमाम पहलुओं पर जाँचे जाने की ज़रूरत है। उदविकास की यात्रा...

read more