पाठकीय प्रतिक्रिया
भावपक्ष के समान उत्तम कोटि का कला पक्ष

भावपक्ष के समान उत्तम कोटि का कला पक्ष

हंसा दीप, कैनेडा : सितंबर 2021 का वागर्थ। नि:संदेह आने वाली पीढ़ियों को अपना भविष्य अंग्रेजी भाषा में नज़र आता है, परिणामस्वरूप हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी हिंदी सिर्फ बोलचाल की भाषा रह गई है। पालक अपने बच्चों को बचपन से ही अंग्रेजी स्कूलों में भेजकर उनके सुनहरे...

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दारुण यथार्थ से साक्षात्कार

दारुण यथार्थ से साक्षात्कार

बिपिन बिहारी साव : आज की मीडिया व्यावसायिक बुद्धि से संचालित होती है और जिस मीडिया में आदर्श की स्थिति बची है उसका भी रुझान इसी तरफ हो रहा है। इस समस्या की मुख्य जड़ पूंजीवादी सभ्यता है। विनय कुमार सिंह : अगस्त 2021 के संपादकीय में समकालीन पत्रकारिता की दशा-दिशा का जो...

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हम टिटहरी प्रयास तो कर ही सकते हैं।

हम टिटहरी प्रयास तो कर ही सकते हैं।

वेदप्रकाश आर्य : वागर्थ का जुलाई अंक।वे बुद्धिजीवी जिनमें स्वतंत्र चेतना शेष है, जिन्हें सामान्य जन के सुख दुख भीतर से आंदोलित करते हैं, वे अपने आपको विशिष्ट नहीं समझ सकते,समझना चाहिए भी नहीं। परंतु ऐसे बुद्धिजीवियों का इस समय भयानक अकाल पड़ा हुआ है। अब वे बुद्धिजीवी...

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दृष्टिकोण बदल लेने को प्रेरित करता अंक

दृष्टिकोण बदल लेने को प्रेरित करता अंक

ख़ास चिट्ठी : नवनीत कुमार झा, दरभंगा वागर्थ, जून 2021 अंक: दलित आंदोलन और विमर्श की जिस परंपरा को फुले,अय्यनकलि, पेरियार रामास्वामी आदि ने सींचा उसे एक संगठित वैचारिक जमीन देकर पल्लवित- पुष्पित करनेवाले अंबेडकर के विचारों की अहमियत आज बढ़ गई है, क्योंकि आज धार्मिक...

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समकालीन दौर का एक ज्ञानवर्धक चित्र

समकालीन दौर का एक ज्ञानवर्धक चित्र

नवनीत कुमार झा, दरभंगा,  राहुल सांकृत्यायन के समकालीन थर्मानंद कोसांबी भी बुद्ध के प्रति आस्था रखने वाले एक अद्भुत और अध्ययनशील यायावर थे, परन्तु वे राहुल सांकृत्यायन से वैसे ही अलग थे जैसे दो ध्रुव हों !! धर्मानंद कोसांबी से पूरी तरह से अपरिचित होने के कारण राधावल्लभ...

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सराहनीय प्रयास

सराहनीय प्रयास

1- चितरंजन भारती, असम :  वागर्थ का अंक 303। फणीश्वरनाथ रेणु के महत्व को सवालों के दायरे में रख सुधी रचनाकारों ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उपन्यास में बदलते गांव को तीन उपन्यासों के मद्देनजर श्रद्धांजलि सिंह ने बेहतरीन विवेचन किया है। पंकज चतुर्वेदी, उमाशंकर चौधरी,...

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प्रासंगिक और विचारोत्तेजक अंक

प्रासंगिक और विचारोत्तेजक अंक

भारत यायावर, हजारीबाग : लंबे समय तक कोरोना काल में बंद ‘वागर्थ’ अब मुक्त होकर शीतल समीर-सा आया और इंडिया में किसान के बहाने भारत माता के जार-जार रोने की चर्चा कर गया। रेणु से बड़ा किसान लेखक भला और कौन है? पीड़ित दशा में जी रहे किसान को वाणी देने वाले रेणु स्वयं किसान...

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रचनात्मक और चिंतनपरक सामग्री से सजा अंक

रचनात्मक और चिंतनपरक सामग्री से सजा अंक

अंकेश मद्धेशिया, इलाहाबाद : बचपन की स्मृतियों में बसंत पंचमी की स्मृति स्कूल में होने वाली सरस्वती वंदना और सरस्वती पूजा के बाद मिलने वाले प्रसाद के रूप में ही है। उम्र की कुछ और सीढ़ियां चढ़कर आगे आने पर बसंत की गरिमा का कुछ अनुमान हुआ, जब बसंत पर हिन्दी के...

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तकनीकी और प्राविधिक विकास की राह पर चलना होगा

तकनीकी और प्राविधिक विकास की राह पर चलना होगा

  देवसबोध भदंत : ‘वागर्थ’ के ऑनलाइन दिसंबर 2020 के अंक में बालकृष्ण काबरा ऐतेश द्वारा अनूदित लैंग्स्टन ह्यूज की कविता ‘फ्रीडम ट्रेन’ में अनोखा काव्य तत्व मौजूद है। नस्लवाद पर इतनी शालीनता से प्रत्यालोचना पहले दिखाई नहीं दी। बिर्ख खडका डुवर्सेली : कोरोना काल में...

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हमने अपने भीतर का बहुत कुछ खो दिया है

हमने अपने भीतर का बहुत कुछ खो दिया है

  वागर्थ के नए वेब एडिशन में आपका स्वागत है. कृपया हमसे जुड़ें और अपने अनुभव साझा करें. चुनिंदा प्रतिक्रियाओं को हम पत्रिका में प्रकाशित करेंगे.एक नई सोच, संकल्पना और सृजनधर्मिता समर कुमार सहायक संपादक, लोक सभा सचिवालय (दिल्ली) 'वागर्थ' का डिजिटल अंक देखा। बड़ा सुकून...

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अनकहे दर्द की अभिव्यक्ति

अनकहे दर्द की अभिव्यक्ति

ख़ास चिट्ठी : अनामिका सिंह, कोन्नगर सितंबर 2019 के उत्तरार्ध में प्रकाशित वागर्थ की कविताएँ उन अनकहे पहलुओं को उजागर करने की कोशिश करती हैं जहाँ से हम भरसक अनजान बने रहने की कोशिश करते हैं। ज्योति चावला की कविता ‘उनके पैरों की आवाज से कांप रही है पृथ्वी’ उसी बदरंग पहलू...

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पीड़ा के पीछे का मनोविज्ञान

पीड़ा के पीछे का मनोविज्ञान

ख़ास चिट्ठी : अनुपमा ऋतु, युवा लेखिका एवं अनुवादक स्त्री के सवालों से संवाद करता सितंबर अंक विचार के लिए कई सशक्त बिन्दु थमाता है। कई सवाल पैदा करता है। कई जवाब सौंपता है। शक्ति, शोक और सशक्तिकरण की त्रयी को तमाम पहलुओं पर जाँचे जाने की ज़रूरत है। उदविकास की यात्रा...

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