पाठकीय प्रतिक्रिया
तकनीकी और प्राविधिक विकास की राह पर चलना होगा

तकनीकी और प्राविधिक विकास की राह पर चलना होगा

  देवसबोध भदंत : ‘वागर्थ’ के ऑनलाइन दिसंबर 2020 के अंक में बालकृष्ण काबरा ऐतेश द्वारा अनूदित लैंग्स्टन ह्यूज की कविता ‘फ्रीडम ट्रेन’ में अनोखा काव्य तत्व मौजूद है। नस्लवाद पर इतनी शालीनता से प्रत्यालोचना पहले दिखाई नहीं दी। बिर्ख खडका डुवर्सेली : कोरोना काल में...

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हमने अपने भीतर का बहुत कुछ खो दिया है

हमने अपने भीतर का बहुत कुछ खो दिया है

  वागर्थ के नए वेब एडिशन में आपका स्वागत है. कृपया हमसे जुड़ें और अपने अनुभव साझा करें. चुनिंदा प्रतिक्रियाओं को हम पत्रिका में प्रकाशित करेंगे.एक नई सोच, संकल्पना और सृजनधर्मिता समर कुमार सहायक संपादक, लोक सभा सचिवालय (दिल्ली) 'वागर्थ' का डिजिटल अंक देखा। बड़ा सुकून...

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अनकहे दर्द की अभिव्यक्ति

अनकहे दर्द की अभिव्यक्ति

ख़ास चिट्ठी : अनामिका सिंह, कोन्नगर सितंबर 2019 के उत्तरार्ध में प्रकाशित वागर्थ की कविताएँ उन अनकहे पहलुओं को उजागर करने की कोशिश करती हैं जहाँ से हम भरसक अनजान बने रहने की कोशिश करते हैं। ज्योति चावला की कविता ‘उनके पैरों की आवाज से कांप रही है पृथ्वी’ उसी बदरंग पहलू...

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पीड़ा के पीछे का मनोविज्ञान

पीड़ा के पीछे का मनोविज्ञान

ख़ास चिट्ठी : अनुपमा ऋतु, युवा लेखिका एवं अनुवादक स्त्री के सवालों से संवाद करता सितंबर अंक विचार के लिए कई सशक्त बिन्दु थमाता है। कई सवाल पैदा करता है। कई जवाब सौंपता है। शक्ति, शोक और सशक्तिकरण की त्रयी को तमाम पहलुओं पर जाँचे जाने की ज़रूरत है। उदविकास की यात्रा...

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