समीक्षा संवाद
उपन्यास के तीन रूप : सरोज सिंह

उपन्यास के तीन रूप : सरोज सिंह

    वरिष्ठ लेखिका और समीक्षक। अद्यतन पुस्तक ‘स्त्रीवादी चिंतन की विविध दिशाएं’। संप्रति इलाहाबाद में शिक्षिका।  सभ्यताओं के विकास ने स्त्री और पुरुष को दो अलग-अलग शिविरों में डाल दिया है। विश्व की सभ्यतम कही जाने वाली परंपराओं में भी स्त्री के प्रति एक...

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हिंदी कविता का तापमान : निशांत

हिंदी कविता का तापमान : निशांत

युवा कवि। काजी नजरुल यूनिवर्सिटी, आसनसोल में सहायक प्रोफेसर। अद्यतन पुस्तक ‘जीवन हो तुम’ (कविता संग्रह)।  इधर कविता के संसार में नए कवियों का आगमन तेजी से हुआ है। यहां जिनकी पुस्तकों पर चर्चा है उनमें इन कवियों में दो थोड़े पुराने हैं- आर चेतनक्रांति और हेमंत...

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उपन्यास : अंधेरे में चीख – संध्या नवोदिता

उपन्यास : अंधेरे में चीख – संध्या नवोदिता

युवा कवयित्री, लेखिका, पत्रकार और अनुवादक।आजाद भारत के जो सपने देखे गए, आजादी के बाद वे सभी लगभग ध्वस्त होते दिखाई दे रहे हैं। जनता की जो लूट अंग्रेज कर रहे थे देसी राज में वह लूट और गहरी, और निरंतर होती गई है। गुलामी के दौर में एक उम्मीद तो थी कि स्वतंत्र होंगे तो सब...

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स्त्री कथाकारों की आंच पर देश : मृत्युंजय श्रीवास्तव

स्त्री कथाकारों की आंच पर देश : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी।21वीं सदी में हिंदी कथा साहित्य के प्लैनेट पर स्त्रियों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। अपनी प्रतिरोधात्मकता और रचनात्मकता से और अपने संख्या-बल से भी। पेरिस की सिमोन द बुआ का प्रसिद्ध कथन है, औरत पैदा नहीं होती, बनाई जाती...

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संस्मरण का सौंदर्य :मृत्युंजय श्रीवास्तव

संस्मरण का सौंदर्य :मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी।  इधर अंग्रेजी की दो पुस्तकों ने ध्यान आकर्षित किया है। पहली है रामचंद्र गुहा की द कुकिंग ऑफ बुक्स : अ लिटरेरी मेमॉएर (हिंदी अनुवाद : सामने आते ही नहीं) । दूसरी है अरुंधती राय की मदर मेरी कम्स टु मी। दोनों पुस्तकें संस्मरण...

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हिंदी कविता का तापमान : निशांत

संस्मरण – जिंदगी अपनी इस शक्ल से गुजरी : आदित्य विक्रम सिंह

    युवा समीक्षक, लेखक और साहित्यिक गतिविधियों में अत्यंत सक्रिय    इस वर्ष प्रकाशित जो किताबें इन दिनों चर्चा में हैं, उनमें से तीन किताबों पर हम बात करेंगे। पहली किताब अब्दुल बिस्मिल्लाह की ‘स्मृतियों की बस्ती’ है। दूसरी किताब है लीलाधर मंडलोई की...

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समकालीन कहानी के तीन स्वर  :आदित्य कुमार गिरि

समकालीन कहानी के तीन स्वर :आदित्य कुमार गिरि

युवा लेखक तथा टिप्पणीकार। सेठ आनंद राम जयपुरिया कॉलेज कोलकाता में शिक्षण।  साहित्य के माध्यम से वंचितों के पक्ष में एक माहौल तैयार किया जा सकता है। उनके जीवन को सामने लाकर आम पाठक को संवदेनशील बनाया जा सकता है। कहानी लिखते समय मेरी यही कोशिश रहती है कि वंचितों के...

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हिंदी कविता – कितने आकाश : संजय जायसवाल

हिंदी कविता – कितने आकाश : संजय जायसवाल

    कवि, समीक्षक और संस्कृति कर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर।कविता की यात्रा सभ्यता की भी यात्रा है। वह अपनी यात्रा में बहुत कुछ ‘डिस्कवर’ करती है। जिसमें जीवन के अनुभव अर्थपूर्ण ढंग से सामने आते हैं। वह मनुष्यता का पर्याय है।...

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उपन्यास-यथार्थ और संभावना के बीच : सरोज सिंह

उपन्यास-यथार्थ और संभावना के बीच : सरोज सिंह

    वरिष्ठ लेखिका और समीक्षक। अद्यतन पुस्तक ‘स्त्रीवादी चिंतन की विविध दिशाएं’। संप्रति इलाहाबाद में शिक्षिका। यदि स्त्री को सही मायने में सशक्त करना है, तो उसे शैक्षिक और आर्थिक रूप से समृद्ध करना जरूरी है। विवाह संस्था का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं की...

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नई सदी के नए कवि : आनंद गुप्ता

नई सदी के नए कवि : आनंद गुप्ता

    युवा कवि। कई कविता संकलन तथा प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। संप्रति उत्तर 24 परगना में अध्यापन।  नई सदी की हिंदी कविता में अपने समय की अनुगूंज और ध्वनियां विविधता के साथ सुनी जा सकती हैं। इन वर्षों में समाज और राजनीति में तेजी के साथ...

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समय के यथार्थ के साथ जिरह करनेवाली कविताएं : रमेश अनुपम

समय के यथार्थ के साथ जिरह करनेवाली कविताएं : रमेश अनुपम

कवि, आलोचक तथा टिप्पणीकार। दो किताबें प्रकाशित ‘ठाकुर जगमोहन सिंह समग्र’ और ‘जल भीतर इक वृच्छा उपजै’।इधर लिखी जा रही कविता को लेकर अनेक पाठकों और आलोचकों की  लंबे समय से शिकायत रही है कि इसमें विकल जीवनानुभवों की न कोई प्रतिच्छाया है और न ही कवि का अंतर्द्वंद्व कहीं...

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स्मृतियों के यथार्थ : संजय जायसवाल

स्मृतियों के यथार्थ : संजय जायसवाल

कवि और समीक्षक. विद्यासागर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर एवं प्रबुद्ध रंगकर्मी.संस्मरण साहित्य एक प्रामाणिक एवं रोचक विधा है। इन दिनों संस्मरण लेखन का चलन बढ़ा है। यह जितना आत्मीय और सृजनात्मक मामला है, उतना ही यह एक तरह का ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण भी है। कई बार संस्मरण को...

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तीन कहानी संकलन-नई राहें : आदित्य कुमार गिरि

तीन कहानी संकलन-नई राहें : आदित्य कुमार गिरि

युवा लेखक तथा टिप्पणीकार। सेठ आनंद राम जयपुरिया कॉलेज कोलकाता में शिक्षण।      लेखक की जिम्मेवारी समाज के प्रति होती है। जिन सवालों और मुश्किलों से समाज परेशान और जूझ रहा होता है, लेखक उन्हीं सवालों और मुश्किलों से परेशान होता है। कहानीकारों की चुनी हुई...

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उत्तर-औपनिवेशिक यथार्थ से संवाद करती कविताएं : आदित्य गिरि

उत्तर-औपनिवेशिक यथार्थ से संवाद करती कविताएं : आदित्य गिरि

युवा लेखक तथा टिप्पणीकार।  संप्रति कोलकाता के सेठ आनंद राम जयपुरिया कॉलेज में शिक्षण।    हर रचना अपने में अलग हो, पहले की पुनरावृत्ति न हो। उसमें हर बार नयापन हो, वरना उसका अर्थ नहीं। जो कविता में अभी तक अघटित है, वह हो। विष्णु नागर का नया काव्य संग्रह है ‘ऐसा...

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संस्मरण आगे का रास्ता बताता है : मृत्युंजय श्रीवास्तव

संस्मरण आगे का रास्ता बताता है : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी।संस्मरण एक खास जीवन तथा काल को समझने का एक प्रभावशाली माध्यम है। यह कई बार एक युग के संघर्ष का दस्तावेजीकरण होता है। नागरिक समाज को संस्मरण पढ़कर समकालीन चुनौतियों से संघर्ष करने की ताकत मिलती है। संस्मरण व्यक्तित्व विहीन नहीं...

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नव उदारवाद बरक्स समकालीन कहानियां : आदित्य गिरि

नव उदारवाद बरक्स समकालीन कहानियां : आदित्य गिरि

युवा लेखक तथा टिप्पणीकार।  संप्रति कोलकाता के सेठ आनंद राम जयपुरिया कॉलेज में शिक्षण।    कुमार अंबुज का दूसरा कहानी संग्रह है ‘मज़ाक़’। ‘इच्छाएँ’ उनका प्रथम कहानी संग्रह था जिसे काफी लोकप्रियता मिली थी। मज़ाक़ कहानी संग्रह उत्तर-औपनिवेशिक समय के व्यर्थताबोध को प्रकट...

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हिंदी आलोचना की नई जमीन : संजय जायसवाल

हिंदी आलोचना की नई जमीन : संजय जायसवाल

कवि और समीक्षक. विद्यासागर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर एवं प्रबुद्ध रंगकर्मी.कविता ने हमेशा मानव मन की बेचैनियों को बचाया और चेतना को उद्वेलित किया है। हिंदी कविता का तेवर बदला है। छोटी-छोटी जगहों से कवि आ रहे हैं, उन जगहों की आवाजें हिंदी काव्य-संसार में सुनाई पड़ रही...

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कविता के इस दिक्-काल में : निशांत

कविता के इस दिक्-काल में : निशांत

युवा कवि। काजी नजरुल यूनिवर्सिटी, आसनसोल में सहायक प्रोफेसर।    इस समय कविता की दुनिया में कई पीढ़ियां एक साथ सक्रिय हैं। एकदम युवा कवि से लेकर वरिष्ठ कवियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति से यह काव्य समय चमचमा रहा है। हम यहां कुछ काव्य संग्रहों की चर्चा करने जा रहे हैं।...

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जीवनी लेखन की चुनौतियां और परसाई : संजय जायसवाल

जीवनी लेखन की चुनौतियां और परसाई : संजय जायसवाल

कवि, समीक्षक और संस्कृति कर्मी।विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर।    हिंदी में कुछ जीवनियां काफी प्रसिद्ध रही हैं, क्योंकि वे सिर्फ जीवनी नहीं थीं। ‘निराला की साहित्य साधना’ (रामविलास शर्मा), प्रेमचंद के जीवन पर ‘कलम का सिपाही’ (अमृत...

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उपन्यास : अंधेरे में चीख – संध्या नवोदिता

उपन्यास के तीन विश्व : संध्या नवोदिता

युवा कवयित्री, लेखिका, पत्रकार और अनुवादक।   लिखना शुरू किया तो केवल यह चिंता थी कि जितना कहना है उसे कम से कम शब्दों में कैसे कहा जाय? मैं वह लिखता हूँ जो मुझे पसंद है और मेरा पाठक वह है जिसे मेरा लिखा पसंद है। लेखक शिवमूर्ति की ख्याति ग्रामीण जीवन के कुशल...

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