लघुकथा
वरमाला : रीता कौशल

वरमाला : रीता कौशल

प्रवासी लेखिका। आस्ट्रेलिया में निवास। ‘रजकुसुम’ कहानी संग्रह व ‘चंद्राकांक्षा’ काव्य संग्रह लड़की वरमाला लिए अपनी सहेलियों के साथ स्टेज पर खड़ी थी। लड़के के यार-दोस्त लड़के को गोद में उठाए हो-हल्ला मचाकर मस्त हो रहे थे। लड़की जैसे ही लड़के के गले में वरमाला डालने को...

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अंतिम दर्शन : शंभू शरण सत्यार्थी

अंतिम दर्शन : शंभू शरण सत्यार्थी

अमेरिका में रह रहे दोनों बेटे को पिता ने फोन किया- बेटा, माँ की तबीयत बहुत ही खराब है। जितना जल्दी हो सके आ जाओ। तुम दोनों भाइयों को मां बहुत याद कर रही है। छोटे बेटा ने कहा-  मैं तो अभी किसी कीमत पर नहीं आ सकता। बेटी का स्कूल में नामांकन कराना है। स्कूल से कब कॉल आ...

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बदशगुनी : इश्तियाक़ सईद

बदशगुनी : इश्तियाक़ सईद

मैं किसी जरूरी काम से बाजार जा रहा था कि अचानक मेरी बाईं ओर की गली से एक बिल्ली दौड़ती हुई निकली, शायद उसे सड़क पार जाना था। वह मेरा रास्ता काटती तथा मैं बदशगुनी का शिकार होता, इससे पहले मैं लपक के आगे बढ़ गया, जबकि बिल्ली मुझे देख जहां थी वहीं दुबक गई थी। चंद कदम आगे...

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चिड़िया का इंटरव्यू : संजय कुमार सिंह

चिड़िया का इंटरव्यू : संजय कुमार सिंह

आदमी के पास चिड़िया आती थी जब-तब। एक दिन मजाक-मजाक में आदमी ने पूछा- ‘जंगल बेचोगी?’ ‘बेचा गया,’ चिड़िया ने धीरे से कहा। ‘नदी बेचोगी?’ आदमी ने मशीन की तरह दुहराया। ‘बेची गयी,’ वह उदास होकर बोली। ‘आसमान?’ ‘वह भी!’ ‘अब रहोगी कहां?’ ‘आदमी की बस्ती में!’ ‘मन लगेगा?’ आदमी ने...

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दान : श्रवण कुमार सेठ

दान : श्रवण कुमार सेठ

‘भैया..! जरा कंबल दिखाइए।’ ‘कैसा कंबल चाहिए भाई साहब...? कितने तक का दिखाऊं, ओढ़ने के लिए या बिछाने के लिए?’ ‘अपने यूज़ के लिए नहीं चाहिए।’ ‘फिर? भिखारियों को दान-वान के लिए तो नहीं चाहिए न...?’ ‘हां... बिल्कुल सही, दान के लिए ही चाहिए था।’ ‘तो ऐसे कहिए ना बाबूजी, उसे...

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दो लघुकथाएं : मनुकंचन

दो लघुकथाएं : मनुकंचन

हल्दी सर्दियां आ गई थीं। लड़के के सामने टेबल पर गर्म दूध का गिलास पड़ा था। लड़के ने आवाज देकर कहा, ‘इसमें हल्दी डाल दो, आज हल्दी वाला दूध पीने का मन है।’ रसोई से मसालदानी पकड़े हुए एक औरत तेजी से आई और गिलास में एक चम्मच हल्दी मिला कर बिना रुके वापस रसोई में चली गई। वो...

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दादी : रामकरन

दादी : रामकरन

रश्मि अपने भाषण की प्रैक्टिस कर रही थी। साथ में थी उसकी बेस्ट फ्रेंड - उसकी दादी! वह बोलती, फिर दादी से उस पर डिस्कस करती। अचानक उसे कुछ याद आया। वह बोली- ‘दादी, आप कुछ बोलिए।’ दादी अचकचा गई, ‘मैं! मैं क्या बोलूँ!’ ‘कुछ भी। वही जो हमे रोज सुनाती हो’, रश्मि बोली। दादी...

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मैचिंग मास्क : रावेल पुष्प

मैचिंग मास्क : रावेल पुष्प

वरिष्ठ पत्रकार और कवि। शुरुआती समय में मास्क मिलने में काफी परेशानी हो रही थी। कीमत भी एक से डेढ़ सौ तक थी। अब बाजारों में कई तरह के मास्क मिलने शुरू हो गए हैं और कीमत भी बीस-तीस रुपये। इस  डरावनी हालत में भी सुबह एक बार तो दूध, सब्जी और ग्रोसरी के लिए बाहर निकलना ही...

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ख़ुशक़िस्मत : रावेल पुष्प

ख़ुशक़िस्मत : रावेल पुष्प

वरिष्ठ पत्रकार और कवि।कोरोना महामारी में वे सब अपने गांव पैदल ही चल पड़े थे। महामारी में उनके जैसे कई मजदूरों का काम छिन गया था। वैसे कुछ सामाजिक संस्थाओं द्वारा सहायता दी जा रही थी और गुरुद्वारों से लंगर भी मिल रहा था, लेकिन उनकी घर जाने की इच्छा बलवती हो उठी। परमेसरा...

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चोंचले /आशा शर्मा

चोंचले /आशा शर्मा

अद्यतन बाल कहानी संग्रह ‘डस्टबिन में पेड़’, सहायक अभियंता, राजस्थान सरकार   ‘आप जिस व्यक्ति से संपर्क करना चाहते हैं, वह उत्तर नहीं दे रहा। कृपया कुछ देर बाद पुनः प्रयास करें।’ पिछले आधे घंटे से लगातार इकलौते बेटे को फोन लगाता पिता आखिर यह ऑटो रिप्लाई सुनते-सुनते...

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फिर भी बंटे नहीं/ कमल चोपड़ा

फिर भी बंटे नहीं/ कमल चोपड़ा

लघुकथाकार, एक कहानी संग्रह सहित चार लघुकथा संग्रह।   दोनों भाई गायक थे और पाकिस्तान में प्रोग्राम करने आए थे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे पाकिस्तान में भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने अपने देश में। कार हाईवे पर दौड़ रही थी। उन्होंने ड्राइवर से पूछा, ‘ये सैदपुर गाँव...

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ऊहापोह/ अशोक गुजराती

ऊहापोह/ अशोक गुजराती

तीन लघुकथा संग्रह। स्वतंत्र लेखन।   आषाढ़ और श्रेयसी दोनों एक ही कंपनी में कार्यरत थे। विभाग अलग-अलग थे फिर भी निकट आए। प्यार हुआ और विवाह भी। श्रेयसी को इटली में आयोजित एक सेमिनार में भेजने का कंपनी ने निर्णय लिया। कोविड-19 का शुरुआती समय था। वह ख़ुशी-ख़ुशी गई।...

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