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महामारी 1918: चित्रकथा

महामारी 1918: चित्रकथा

1918 में पूरी दुनिया में एक विकट महामारी फैली थी, जिसमें लगभग 5 करोड़ लोग मारे गए थे। यह पहले विश्वयुद्ध का बड़ा निर्मम उपहार था। इसका असर भारत पर भी पड़ा था और इस देश में करीब डेढ़ करोड़ लोग मारे गए थे। उसके लगभग सौ साल बाद दुनिया फिर एक महामारी झेल रही है। इस पर चर्चा...

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किताबें मई 2021

किताबें मई 2021

1-थोड़ा-सा उजाला (कविताएं और टिप्पणियां) : अशोक वाजपेयीवाणी प्रकाशन, दिल्ली : मूल्य : 399 रुपए कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान अशोक वाजपेयी की रचनात्मकता और चिंताएं इस पुस्तक में है। लॉकडाउन में भले ही सबकुछ थम गया था, मगर कलम का कारोबार जारी था। पाठक इस पुस्तक के...

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महामारी के समय में : एन. स्कॉट मोमादे/ अनुवाद : उपमा ॠचा

महामारी के समय में : एन. स्कॉट मोमादे/ अनुवाद : उपमा ॠचा

नेटिव अमरीकन नस्ल ‘किओबा’ मूल के उपन्यासकार, लघुकथा लेखक और कवि। नेटिव अमरीकन रिनेंसा की पहली महत्वपूर्ण कृति ‘हाउस मेड ऑफ डान’ लिखने के लिए 1969 में पुलित्ज़र प्राइज़ से सम्मानित।इन दिनों हम घरों के अंदर रहते हैंजब बाहर निकलने का जोखिम उठाते हैंतो पूरी तरह चौकन्ना...

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बची हुई जगहें : मंगलेश डबराल

बची हुई जगहें : मंगलेश डबराल

(16 मई 1948 - 9 दिसम्बर 2020) कोरोना संक्रमण के शिकार हिंदी के एक बड़े ही महत्वपूर्ण कवि और लेखक। ‘जनसत्ता’ में पत्रकारिता से जुड़े। महत्वपूर्ण काव्य कृतियाँ- ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘आवाज़ भी एक जगह है’, स्मृति एक दूसरा समय है’, ‘नए युग में शत्रु’। रोज़ कुछ भूलता कुछ खोता रहता...

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देश-देशांतर : रैदास

देश-देशांतर : रैदास

(1377, बनारस) भक्तिकालीन दलित कवि। अपने और परिवार के भरण-पोषण के लिए जूते बनाने के श्रम से जुड़े। अपनी वाणी से संसार को एकता और भाईचारे का संदेश दिया। यहां रैदास के दो पदों का खड़ीबोली में काव्यात्मक अनुसृजन।   1-प्रभु की पहचान भी अपने जन से होती है तुझमें मुझमें,...

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किताबेंअप्रैल 2021

किताबेंअप्रैल 2021

1-पर्सपोलिस (चित्र उपन्यास) : मार्जान सतरापीवाणी प्रकाशन, दिल्ली : मूल्य : 399 रुपए हिंदी में रोचक ढंग से प्रस्तुत विश्व का पहला सचित्र उपन्यास है जो लोकप्रिय भी हुआ। इसमें ईरान की आम जिंदगी और राजनीति का द्वंद्व है। मार्जान सतरापी ईरान के अंतिम सम्राट की विदुषी...

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देश-देशांतर : अल्मोग बेहार (इजराइल)/ अनुवाद : राजेश कुमार झा

देश-देशांतर : अल्मोग बेहार (इजराइल)/ अनुवाद : राजेश कुमार झा

 (जन्म 1978)। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच भाषा, संस्कृति और राजनीति के स्तर पर भेदभाव के विरोधी। कविताओं में मुख्यतः विभिन्न पृष्ठभूमियों से इजराइल आए लोगों की आकांक्षाओं और तनावों की अभिव्यक्ति। मानवाधिकारों से संबंधित आंदोलनों में सक्रिय। 1-द्विभाषी कविता मैं...

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किताबें मार्च 2021

किताबें मार्च 2021

1-ओह रे! किसान (आलेख संग्रह) : अंकिता जैनवाणी प्रकाशन, दिल्ली : मूल्य : 299 रुपए पृथ्वी को छोड़कर सृष्टि के सभी ग्रह पुलिंग है। पृथ्वी, पर्यावरण और किसान को स्त्री के समान महत्व देते हुए लेखिका ने इस कविता में धर्म, मानवता और सभ्यता के मर्म की व्याख्या की है। 2-बचा रहे...

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