देश देशांतर
महामारी के समय में : एन. स्कॉट मोमादे/ अनुवाद : उपमा ॠचा

महामारी के समय में : एन. स्कॉट मोमादे/ अनुवाद : उपमा ॠचा

नेटिव अमरीकन नस्ल ‘किओबा’ मूल के उपन्यासकार, लघुकथा लेखक और कवि। नेटिव अमरीकन रिनेंसा की पहली महत्वपूर्ण कृति ‘हाउस मेड ऑफ डान’ लिखने के लिए 1969 में पुलित्ज़र प्राइज़ से सम्मानित।इन दिनों हम घरों के अंदर रहते हैंजब बाहर निकलने का जोखिम उठाते हैंतो पूरी तरह चौकन्ना...

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बची हुई जगहें : मंगलेश डबराल

बची हुई जगहें : मंगलेश डबराल

(16 मई 1948 - 9 दिसम्बर 2020) कोरोना संक्रमण के शिकार हिंदी के एक बड़े ही महत्वपूर्ण कवि और लेखक। ‘जनसत्ता’ में पत्रकारिता से जुड़े। महत्वपूर्ण काव्य कृतियाँ- ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘आवाज़ भी एक जगह है’, स्मृति एक दूसरा समय है’, ‘नए युग में शत्रु’। रोज़ कुछ भूलता कुछ खोता रहता...

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देश-देशांतर : रैदास

देश-देशांतर : रैदास

(1377, बनारस) भक्तिकालीन दलित कवि। अपने और परिवार के भरण-पोषण के लिए जूते बनाने के श्रम से जुड़े। अपनी वाणी से संसार को एकता और भाईचारे का संदेश दिया। यहां रैदास के दो पदों का खड़ीबोली में काव्यात्मक अनुसृजन।   1-प्रभु की पहचान भी अपने जन से होती है तुझमें मुझमें,...

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देश-देशांतर : अल्मोग बेहार (इजराइल)/ अनुवाद : राजेश कुमार झा

देश-देशांतर : अल्मोग बेहार (इजराइल)/ अनुवाद : राजेश कुमार झा

 (जन्म 1978)। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच भाषा, संस्कृति और राजनीति के स्तर पर भेदभाव के विरोधी। कविताओं में मुख्यतः विभिन्न पृष्ठभूमियों से इजराइल आए लोगों की आकांक्षाओं और तनावों की अभिव्यक्ति। मानवाधिकारों से संबंधित आंदोलनों में सक्रिय। 1-द्विभाषी कविता मैं...

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