
एक राज्य में झूठ और सच दो इंसान रहते थे। उस राज्य में जब भी आपराधिक घटना घटती, राजा के दरबार में सुनवाई के दौरान अन्य पक्षों के अतिरिक्त झूठ और सच को बुलाया जाता। प्रायः सच जिसके पक्ष में गवाही देता, राजा उसे निर्दोष बताकर छोड़ देता। झूठ के पक्ष वाले व्यक्ति को सजा सुनाई जाती। धीरे-धीरे राज्य के लोग झूठ से इतना चिढ़ने लगे कि उससे शत्रुता ठान ली। एक रात उसे मार डालने के लिए उसके घर में घुस आए। झूठ उनके हाथ नहीं लगा, क्योंकि वह सच के घर में बैठा गप्पें लड़ा रहा था, लेकिन अपराधियों ने गुस्से में आकर झूठ की पत्नी और बच्चों को मार डाला और लूटपाट कर वहां से चलते बने।
झूठ जब घर लौटा सब हाल जानकर बहुत दुखी हुआ। उसने सोचा, महज कुछ घंटे सच के साथ व्यतीत कर लेने से यदि उसकी यह स्थिति हो गई तो यदि हम साथ रहने लगें तब सच के कारण मेरा अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। उस दिन से झूठ ने सच का साथ हमेशा के लिए छोड़ दिया।
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