
युवा कवि। कविता संग्रह ‘बुद्ध और फराहो’। संप्रति सहायक अध्यापक, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।

कर्फ्यू और एक छोटी लड़की
हिंसा इतनी बढ़ गई थी
कि शहर में लगाना पड़ा कर्फ्यू
देखते ही गोली मारने के
दे दिए गए थे आदेश
सड़कों पर बंदूक, पत्थर, खून
टूटे हुए चप्पल और सन्नाटे के सिवा
कुछ नहीं था
ताजा हवा और परिंदों ने कर्फ्यू के चलते
अपने रास्ते बदल लिए थे
लोगों का दम घुट रहा था
सड़क पर अचानक एक छोटी बच्ची दिखी
जिसकी मां खाना बनाते वक्त
बाहर का दरवाजा बंद करना भूल गई थी
वह हँस रही थी
खेल रही थी
उन टूटी हुई चपल्लों
बिखरे हुए पत्थरों के साथ
और पूछ रही थी बंदूकों से
कि क्या टूटी हुई चप्पलें उनकी हैं
अचानक बंदूकें भारी हो गई थीं
वे उठ नहीं पा रही थीं
कर्फ्यू टूट गया था।
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