सुपरिचित आलोचक, कहानीकार और कवि। कुछ समय बाद’ (कहानीसंग्रह), ‘दस्तक’ (काव्यसंकलन), ‘सुराज’ (नाटक) सहित करीब पंद्रह से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र में प्रोफेसर।


1.
सदियों बाद लौटा है चाणक्य
मगध में
नट सम्राट के सामने
नट सम्राट, जिसे देखकर घबराती है शत्रु सेना
पैंतरे ऐसे कि चकित रह जाए इंद्र
नभ में भ्रमण करते यमदूत
हिमथल पर विचरते यति
पाताल में सदियों से निवास करती मत्स्य कन्याएं
यहां तक कि इंद्रप्रस्थ से विस्थापित तक्षक भी।

2.
भयभीत हैं सब! गण, प्रहरी, सभासद
यहां तक कि अमात्य भी

छा गई है एक बेचैनी
मगध की सड़कों पर

क्या होगा अब
युद्ध?
फिर एक महायुद्ध?
मारे जाएंगे असंख्य नागरिक
सैनिक, प्रहरी
बचेगा कौन? चाणक्य? नट सम्राट? अमात्य?

क्या भरे दरबार में नट सम्राट
फिर करेगा अपमान चाणक्य का
या उठाकर डाल देगा कारागार में

क्या करेगा चाणक्य नए मगध में
संघर्ष, शांति या समझौता?

युद्ध होगा या टलेगा?

3.
स्तब्ध है जनता, सभासद, मंत्री, प्रहरी

शांत है राजपथ
स्थिर हैं महल के कंगूरे पर बैठे शांतिदूत प्रहरी
शांत है उनकी ध्वनियां, तिनके भी ऐसे गिरते हुए
जैसे उड़ती है तितलियां
फूलों पर पंख पसारे
धरती से आसमान छूने की दौड़ लगाते
अधमरे ताड़ के लंबे-लंबे पेड़

पसर गई है मगध के राजपथ पर
एक अंतहीन वीरानी

क्या होगा अब?
फिर से एक भीषण युद्ध
जनपद की सड़कों पर बहेगा नागरिकों का रक्त!
किसके लिए बहाएंगे रक्त
मगध के सैनिक
धरती, नट सम्राट, अमात्य या चाणक्य

क्या फिर से लड़ा जाएगा एक युद्ध
अखंड भारत के लिए?

4.
सावधान प्रहरी, सावधान!

यह कैसी हलचल है अब राजपथ पर और
नगरद्वार पर यह शोर कैसा?
क्या मगध में आए चाणक्य की नहीं हैं जटाएं
या उसके ललाट पर चंदन की त्रिपुंडधारी लकीरें
क्या उसकी भुजाओं में नहीं है
मगध को बांधने की अकूत ताकत
और न ही आंखों में अखंड भारत का दिवास्वप्न?

कौन है, यह चाणक्य?
क्यों नहीं है उसकी आंखों में
भविष्य की चमक
और न ही पांवों में धरती को धांगने की धमक?

कैसा है यह चाणक्य? आया कहां से है?
आंखें इतनी विषाक्त क्यों हैं उसकी?
और यह ललाट पर काली छाया कैसी?
क्या यह मगध का चाणक्य नहीं है प्रहरी?

कहीं यह कोई बहुरूपिया तो नहीं है?
इंद्रप्रस्थ से आया कोई बहुरूपिया
जो धर वेश चाणक्य का
घुस आया है मगध में?
नट सम्राट इतना खुश क्यों है प्रहरी
मगन क्यों हैं अमात्य, मंत्री, सभासद
किसी के माथे पर नहीं दिख रही है
एक भी शिकन

क्या अब नहीं होगा युद्ध मगध में और
नहीं कटेगी शिखा चाणक्य की
नाश भी नहीं होगा नट वंश का

अब क्या होगा प्रहरी?
नट सम्राट बचेगा या जाएगा?
क्या अब नहीं होगी हत्या
चाणक्य के मगध में?
अब कौन बैठेगा मगध के सिंहासन पर?

5.
यह कैसा कोलाहल है मगध में
बाजार में खड़ी जनता पूछ रही है प्रहरी से-
किसके लिए खड़े हो योद्धा?
मगध या नट सम्राट?
या बहुरूपिया चाणक्य?
बचेगा मगध?
या जाएगा सेल्युकस के साथ ग्रीक?
यवन कन्याएं लहराएंगी हाथ
बड़ी बड़ी नावों पर

क्या बहेगी एक नदी देश के सागर में
नदी, मगध देश की एक नई नदी!
क्या गढ़ मुक्तेश्वर से लौटेंगी यवन सेनाएं
या बसेगा वहां भी एक नया नगर?

6.
सुनो, सुनो मगध के निवासियो, सुनो!
कि नट सम्राट ने दे दिया है चाणक्य को
गंगा के उत्तरी कछार पर हजार एकड़ धरती
गणतंत्र की भूमि वैशाली में
स्वर्णमुद्राओं की अनगिनत थैलियां
सैकड़ों धरती पुत्र
गढ़ने असंख्य नट सम्राट, अमात्य, दरबारी

सुना जा रहा है कि अब नहीं लौटेगा चाणक्य
तक्षशिला
और न ही आएगा चंद्रगुप्त
मगध

अब नट सम्राट के लिए बनाएगा चाणक्य
एक नई तक्षशिला मगध में
और दूसरी कैथरकलां में
अब उगेगी मगध और कैथरकलां में
चंद्रगुप्त, अमात्य, वीरपुत्रों की एक नई फसल

अब यवन सेना भी नहीं लौटेगी यूनान
कैथरकलां में बनेगी उनकी एक नई नगरी
अब आएंगे
थलेस, पाइथागोरस, सुकरात, प्लेटो, अरस्तू
ग्रीक योद्धाओं की इस नई नगरी में

सावधान प्रहरी, सावधान!
यह मुनादी मगध की है, एक नए मगध की!
सावधान!

7.
स्तब्ध मगध की जनता ने अगली सुबह देखा-
गंगा की लहरों पर तैरती हवाओं के बीच
खड़ा है नट सम्राट
और छोटी सी डोंगी में सवार चाणक्य
गढ़ रह है नट सम्राट के मगध का भविष्य
सिकुड़ आई हैं अमात्य के ललाट पर
नए मगध की अनगिनत लकीरें!

तट पर खड़े स्तब्ध प्रहरी
पूछ रहे हैं जनता से
क्या यही मगध है हमारा नया मगध?
क्या बहुरूपिया चाणक्य फिर से गढ़ेगा
नट सम्राट के लिए एक नया चंद्रगुप्त
अमात्य, प्रहरी, सभासद?

मगध बचेगा या जाएगा?
किसके साथ रहोगे प्रहरी?
मगध या नट सम्राट किसके साथ?

और अमात्य की निष्ठा क्या होगी?
सावधान प्रहरी, सावधान!
तुम्हारे ही कंधों पर है अब
मगध का भविष्य
सम्राट रहेंगे आते जाते पर
बचा रहे मगध!
तुम्हारा मगध!! जनता का मगध!!!

सावधान प्रहरी! सावधान!!
करो अभिनंदन अब नए मगध का
स्वागत करो नट सम्राट और
मगध की नई पाठशाला का
मत पूछना कि किसका है यह मगध
और कौन है यहां का
नया मनसबदार
सावधान प्रहरी, सावधान!