वरिष्ठ कवि। कविता, गीत, गजल की 18 पुस्तकें प्रकाशित। आलोचना की एक पुस्तक शब्द असीमित

 

घुटने

उम्र के साथ घिसते हैं घुटने
जैसे घिसते हैं दांत

पिस जाती हैं बर्तन मांजते मांजते
हथेलियां भी
कॉलर घिस जाता है
लिखते लिखते घिस जाती है निब
जैसे पिस जाते हैं मुद्दे एक वक्त के बाद
घुुटने हो जाते हैं घिसे हुए वक्त से

ढीले पड़ रहे मेरे घुटने
तीन पीढ़ियों बाद
जैसे ढीली पड़ जाती है दुश्मनी
मांसपेशियों की तरह

ढीला पड़ना बहकना भी है
डग मग
ढीले पड़ रहे मेरे घुटने
ढीला पड़ना पक जाना भी है
डाल से चू पड़ने को तैयार

जैसे हत्थे से उखड़ जाए कोई
लगता है कभी-कभी
घुटने चमक कर फेंके तो नहीं जाएंगे

घिस रहे हैं मेरे घुटने
घिसते घुटनों के साथ घिस रही है मेरी गति
घिसना दूरी पैदा करना भी है
जैसे घिस जाता है पति-पत्नी का प्यार
जिम्मेदारियां ढोते-ढोते
कम होती जाती है चिकनाहट संबधों की

गजब है कि दोनों घुटने बराबर नहीं घिसते
तय हो जाता है दायां पहले उठेगा या बायां
अनुकरण किसे किसके दम करना है
कि संतुलन बना रहे
गाड़ी रुके नहीं पूरी तरह

बहुत साथ दिया इन घुटनों ने
सीढ़ियां फलांग फलांग के चढ़ता था मैं
पीछे रह जाती थीं साइकिलें
दस कदम आगे-आगे रहता थीं मैं
तनकर खड़ा रहा इन्हीं घुटनों के भरोसे
नजर सामने गर्दन सीधी
अब नजर कदमों पर गर्दन ऊपर नीचे

बहुत साथ दिया घुटनों ने
बिना मजमून पढ़े
जैसे सहमति देता है अपना कोई
अब ठहर-ठहर पढ़ता हूँ घुटने
अपनी हथेलियों से
एक बेचारगी उभर आती है
जैसे हस्ताक्षर नहीं मिल रहा हो बैंक में
पेंशन विड्रॉल के लिए

यौवन में मटर की गदराई छीमी-से
फूटने वाले घुटने

मक्के के दाने-से फूट चुके हैं खिले-खिले
अंत में ठुर्री-सी किरकिरा जाती उनकी मुलायमियत
सोचता हूँ अब इस उम्र में घुटने क्या टेकना
असकताते बहटिआते चलाते रहना है इन्हें
जाम में फंसी गाड़ी-सा धीमे-धीमे बचा-बचा
देर से ही सही पहुंचेंगे सुरक्षित

मिस्त्री कहता है
पैंतालीस साल पुरानी आपकी मारुति 800
ऑन रोड है
ये क्या कम है!

दांत

बुखार दस्त बेचैनी
सारा घर परेशान

हड्डी फूटी थी मसूड़े से
जैसे फूटता है चांद आसमान की नीलिमा में
दुद्धा दांत की तरह
साल-छह महीने में खिल उठे दाने अनार के
चबाते रहे दांत हमारे लिए
हम चबाते रहे दातों को अपने लिए

घिसते गए
दुबराते गए
पियराते गए
फिर टांगे हिलने लगी दातों की

बत्तीस के बीच फंसी कुटती पिसती जीभ
देती रही ज्ञापन पर ज्ञापन
पेट मुंह फुलाए
बिना कहे दातों का दर्द बखानता रहा

दर्द नहीं
टीस उठा करती थी
जैसे करवटों में
रात काटती है कोई गर्भवती

कैल्शियम के दांतों की जड़ें
खुरपियाई गईं
औषधि स्नान कराया गया
मगर अपनी हरकत से बाज नहीं आए
कुत्ते की पूंछ-से हिलने लगते जब तब
अंततः टांग पकड़ खींच लिए गए

मसूड़ा वियोग में रोते-रोते सूज गया
जीभ भरसक घाव सहलाती रही
बचे हुए परिजनों को सांत्वना देती रही

भरपाई का एक ही मंत्र है हमारे पास
लैब में बना विकास

पैमाइश पूरी हुई
इस्टीमेट पास हुआ
और दिन साइत देख मेरे दांत
नट बोल्ट पर कस दिए गए सीमेंटेड
आखिरी सांस तक न बिछड़ने की गारंटी

दातों ने चबाने की गति बढ़ा दी है
सर्र-सर्र जैसे भागती हैं गाड़ियां फोर लेन पर
फास्ट टैग लगाए
जीभ टोती है बार बार
कहीं हिल तो नहीं रहा इनमें से कोई!

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