युवा कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। कविता संकलन : ‘नूह की नाव’,  कहानी संग्रह : ‘स्टिंकी टोफू’।

आदमीयत से बेदखल आदमी

अपने किस्सों में तुम कैसे
परिभाषित करते हो उस आदमी को :
वह आदमी जिसका अपना कोई मुल्क नहीं है
वह आदमी
जिसकी हँसी में रिरियाहट की ध्वनि आती है
वह आदमी
जिसका मजाक उसकी बेचारगी को दिखाता है
वह आदमी
जो इतने पर भी शब्दों और मानी के पीछे पागल है
वह आदमी
जो बूढ़े चौकीदार की तरह रात भर जागता है
वह आदमी
जो बूढ़े चौकीदार जितना भी नहीं कमाता
वह आदमी
जो भीख मांगता है एक अदद प्रत्युत्तर की
वह आदमी
जो पनीली आंखों से दुनिया को देखता है
वह आदमी
जो उम्र के साथ सयाना नहीं हुआ है
वह आदमी
जो केवल स्वप्न में क्षणभंगुर प्रेम पाता है
वह आदमी
जो जागने पर जोर-जोर से डकारता है
वह आदमी
जो आदमीयत से बेदखल कर दिया गया है।

 

प्रतिबिंब

मैं एक राष्ट्रहीन, तापहीन यायावर
राजमार्ग पर अहरह चलता हूँ
अज्ञात ओझल का अनुसरण
रात-दिन विस्थापन का स्मरण
विस्मृति एक लंबी यातना है

पहले मुझे चिड़ियां पसंद थीं
फिर मैंने नभचरों और जंगलों पर
निर्भर रहना छोड़ दिया
मैंने गोताखोरों के भरोसे
जिंदा रहना छोड़ दिया

एक सपने की मुहब्बत की
गिरफ्त से होकर फरार
मैंने झील के शांत जल को देखा
और पाया कि प्रतिबिंब मुझसे
उतनी भी घृणा नहीं करता।

संपर्क :‘सरोज सदन’, 100 ए, गुलमोहर पार्क, फेज-1, महल रोड, रामनगरिया, जगतपुरा, जयपुर- 302017 मो. 9784972672