
कनाडा के प्रवासी कवि। चार कविता संग्रह प्रकाशित।

सृष्टि का वितान
जब पहली बूंद गिरी होगी धरती पर
ईश्वर ने बादल से पूछा होगा
कैसे ले आया वह अमृत कलश समुद्र से
जब पहला बीज अंकुरित हुआ होगा धरती पर
ईश्वर चकित रह गए होंगे
मिट्टी की ऊर्जा को जीवन में बदलते देख
जब पहला फूल खिला होगा धरती पर
ईश्वर मुस्कुराए होंगे
कि किस तरह किरणें कलियों को छेड़ सकती हैं
जब पहले बच्चे की किलकारी गूंजी होगी
ईश्वर आ गए होंगे धरती पर
देखने मनुष्य के रूप में अपना बचपन
जब कोकिल कंठ से गूंजा होगा पहला स्वर
ईश्वर ने छेड़ दी होंगी स्वर लहरियां
राग-रागिनियां, नृत्य, कलाएं उमगी होंगी फिर
जब पहला शब्द होठों ने पुकारा होगा ‘मां’
ईश्वर खिलखिलाती मां के हृदय में बैठ
सृष्टि का नया वितान रच रहा होगा।
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