
सुप्रतिष्ठित कवि और लेखक। विविध विधाओं में लगभग 80 पुस्तकें प्रकाशित। साहित्य अकादेमी का बाल–साहित्य पुरस्कार।

खतरा सोच का
सुना भर था
कि छूना
किसी भी समुद्र की लहर को
हो जाता है छूना
समस्त समुद्रों का
सोचा
तब तो छूना
एक पहाड़ का
होता होगा छूना
हर पहाड़ का
आते होंगे
नदी, वृक्ष, आकाश
सूर्य, चंद्रमा आदि सभी
सोच के इसी दायरे में
तो सोच कर देखूं पृथ्वी को
और मनुष्यता को
लूं खतरा सोच का।
अपनों का होना
मां ने कहा
जाओ पढ़ो
नहीं तो खाना नहीं दूंगी
देखा
पिता मुस्कुरा रहे थे
अच्छा लगा
पत्नी ने कहा
सुधर जाओ
नहीं तो निकाल दूंगी घर से
देखा
बच्चे हँस रहे थे
दुबके
अच्छा लगा
सोचने बैठा
क्यों लगा अच्छा
तो उत्तर एक ही मिला-
कितना जरूरी होता है
अपनों का होना।
बहुत हौले से
इसी वृक्ष को देखिए
पत्तों में संजोए
सजाए मौसम की
पहली आहट के फूलों में
दबाए फलों की संभावनाएं
कैसे तो इतरा रहा है
छूने देता है फूलों को
मगर हौले से
याद कराता है वृक्ष
सावधानी से कविता शमशेर की
शमशेर की कविता को भी
छूना होता है हौले से
नहीं चाहती वह
छेड़-छाड़ बाहरी
जरा-सी भी नहीं
जाना
जरूर जाना वृक्ष के पास
पर छूना फूलों को
बहुत हौले से
आनंद लेना तब
देख
हरा-हरा शर्माना पत्तों का
भर लाना इंतजार आंखों में
रसीला
जामुनी।
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