वरिष्ठ गीतकार। अद्यतन गीत संकलन: ‘गौरैया का घर खोया है’।

1. प्रासंगिक होना

अब सत्ता के कुछ कारिंदे
डाल रहे जनता पर फंदे
चाह रहे प्रासंगिक होना
बात हवा में करते हैं ये
सच में झूठा भरते हैं ये
चाहत की
सारी फसलों को
सिखा रहे बंजर में बोना

 
कागज का इंद्रजाल फैलाते
भोले-भाले
लोगों को ये
दिखा रहे काही में सोना
संशय के अदृश्य परोसे
बांट रहे हैं राम भरोसे
आंखों में आंसू
भरकर ये
चला रहे हैं जादू-टोना।

2. कैसे बात बने?

तू गूंगा है
वे बहरे हैं
कैसे बात बने?

तेरी तो अपनी ढपली है
उनके अपने राग
इसीलिए पसरा रहता है बीचोंबीच विराग
इस विराग के कारण ही सब
टूट रहे सपने
कैसे बात बने

 
तुझे चाहिए हक-हक्कू सब
वे करते हैं क्रीड़ा
गलत आंकड़ों में दब जाती सब
तेरी सारी पीड़ा
ये मुश्किल ही करती जाती
तेरे दर्द घने
कैसे बात बने?

 
तू जीता है सिर्फ हकीकत
उन पर हैं आश्वासन
तेरी इसी हकीकत को वे
सिखलाते अनुशासन
इसी द्वंद्व में तुझसे बिछड़े
तेरे सब अपने
कैसे बात बने?

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