
पतिदेव के साथ कुछ सामान खरीदने बाहर निकली तो मैं एक बोर्ड देख कर ठिठक गई। उसपर लिखा था- नवरात्रि में कन्या-पूजन के लिए यहां संपर्क करें -मां अंबे इंटरप्राइजेज! पति को बोर्ड दिखाते हुए मैंने कहा, ‘अरे, यह क्या! कन्या उपलब्ध कराने की कंपनी!’
‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है। लगता है नई स्टार्टअप कंपनी है।’
‘चलिए, अंदर चल कर देखते हैं।’
हमें देखते ही रिसेप्शनिस्ट ने बड़े मधुर स्वर में कहा, ‘आइए! कैसी कन्या चाहिए आपको? हर उम्र की कन्या मिल जाएगी यहां…’ वह कन्याओं का अलबम दिखाने लगा।
इतनी प्यारी-प्यारी दुर्गा के रूप में सजी-धजी कन्याओं को देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा।
‘वाह! आपने तो हमारा काम आसान कर दिया! पिछले साल ‘कन्या ढूंढ़ो अभियान’ चलाना पड़ गया था। बड़ी मशक्कत से सात कन्याएं ही मिल पाई थीं।’
‘इसीलिए हमने यह सेवा प्रारंभ की है!’
‘सेवा के लिए कुछ राशि-भुगतान का प्रावधान होगा।’
‘ज्यादा नहीं, प्रति कन्या एक हजार।’
‘यह ज्यादा नहीं है? नौ कन्या के लिए नौ हजार!’
‘मेहनत भी कितनी करनी पड़ती है! गंदे मुहल्लों की लड़कियों को नहला-धुलाकर अच्छे कपड़े पहनाना, देवी के रूप में सजाना-संवारना। बोलिए, वरना….!’
‘तस्वीरों में सभी अच्छे घरों की लग रही हैं!’
‘रेट थोड़ा कम करें।’
‘रेट फिक्स है, फिर हम इन्हें देवी का दर्जा भी दिला रहे हैं!’
फ्लैट नं. – बी1013, आर. आर. सिग्नेचर अपार्टमेंट, बालाजी लेआउट, चोक्कनहल्ली, थानीसेंद्र मेन रोड, बैंगलोर – 560064 मो. 8880965006

लिक से हटकर बहुत ही बढ़िया लघुकथा लेखक को ढेर सारी शुभकामनाएं।