युवा कवयित्री। सहायक प्राध्यापिका।

 

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
थाम कर बैठ सकती हैं हाथ
उन सभी अपरिचित पुरुषों के
जिनके हृदय हो रहे हैं विदीर्ण
अपनी स्त्रियों की प्रसव वेदना की
कातर चीख सुनकर

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
चूम सकती हैं माथे
उन सभी अपरिचित पुरुषों के
न्याय के लिए लड़ते हुए
जो हार रहे हैं हौसला

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
अपनी गोद में  रख सकती हैं सिर
उन सभी अपरिचित पुरुषों के
खोई है जिन्होंने अपनी माएँ
अभी-अभी

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
रख सकती हैं ओठों के फाहे
आंखों पर
उन सभी अपरिचित पुरुषों के
जिनकी प्रेमिकाओं को कटवा दिया है
खाप पंचायतों ने रात-बिरात

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
बिता सकती हैं रात
उन सभी अपरिचित पुरुषों के साथ
जो थामे हुए हैं मशालें
जब उठा ले गया है बाघ उनकी बकरियों को

हम गुनाहगार और बेशर्म औरतें
उठा सकती हैं हँसिया
उन सभी अपरिचित पुरुषों के लिए
जिनकी नज़रों के सामने
जला दी गईं हैं उनकी फसलें और छानें

हम गुनाहगार और बेशर्म औरतें
पोछ सकती हैं पसीना
उन सभी अपरिचित पुरुषों के माथों से
जिनके दोनों हाथ लिथड़े हैं कीच काछने में

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
खोल सकती हैं अपनी साड़ियाँ
गहरे कुंवों में ढीलने के लिए बाल्टियाँ
ताकि प्यास से मर न जाए कोई अपरिचित मुसाफिर

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
दे सकती हैं अपने देह की ओट
उन सभी अपरिचित पुरुषों को
विक्षिप्त भीड़ के आतंक से जो कांपते छिप रहे हैं

हम गुनहगार और बेशर्म औरतें
नहीं खोजती परिचय
पिता,भाई, प्रेमी, पति या सखा का
बस पहचानती है खून और खून बहती उंगलियाँ
और दुप्पटे का कोर फाड़कर बांध देती हैं पट्टी

हम गुनाहगार और बेशर्म औरतें
मुड़कर नहीं देखतीं
पीठ पीछे उठ रही उन उंगलियों को
जो नहीं साफ करतीं खून के धब्बे
जो लगे हैं उनकी देह और कपड़ों से
हम नहीं देतीं कोई सफाई
बस मुस्कुराती हैं।

 

हम गुनाहगार और बेशर्म औरतें।

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