अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण : विजय शर्मा

प्रमुख समीक्षक और अनुवादक। आलोचना पुस्तक  : ‘क्षितिज के उस पार से’

हर महीने की तरह वह अपने बेटे के पास आया है। खाली कमरे में अकेले बैठे हुए वह अपने मोटे शीशे के चश्में से ईरानी कालीन की पुरानी आत्मा में बुने हुए बदरंग फूलों को घूर रहा है। एक बार फिर दरवाजे से लगा खड़ा मैं उसे देख रहा हूँ।

हर बार जब वह सांस -लंबी उसांस- छोड़ता है, एक तूफान खड़ा करता है अपने जीवन के तट से मृत्यु के जहाज को खदेड़ने का। जब वह बोलता है, वह अपने होंठों की हरकत से मौत का मजाक उड़ाता है। उठने के लिए वह अपनी हथेली से जमीन पर जोर लगाता है, जैसे अपने हारे हुए दुश्मन के सीने से उठ रहा हो। जितने दु:साहस के साथ वह अपनी नियति को नकारता है, उसकी हर चाल के साथ उसका विरोधी उस पर जानलेवा हमला करता है। समय दुश्मन के साथ है। इंतजार बूढ़े के लिए विकल्प नहीं है।

मेरी उपस्थिति से अनजान वह गर्म चाय पीने की कोशिश करता है। वह अपनी कांपती अंगुलियां चाय के गिलास की ओर बार-बार बढ़ाता है। उसकी अंगुलियां गर्मी का अनुभव करती हैं। खुश हो वह नाजुक नीला गिलास अपने होठों तक उठाता है। उसकी सावधानी के बावजूद कुछ बूंदें छलक जाती हैं। तब उसे पता चलता है कि चीनी नहीं है। जंग के इस स्तर पर वह पीछे नहीं हटना चाहता! वह गर्म गिलास अपने होंठों से लगाता है, जबकि उसका दूसरा हाथ धुंधली दृष्टि के बावजूद फूलों में छिपे अदृश्य चांदी के डिब्बे को खोज निकालता है। उसके होंठ जलते हैं और आंखें रोती हैं। उसकी अंगुलियां हर खोजे ़फूल को सहलाती हैं। रेशे उसकी अंगुलियों की दरार में चिपक जाते हैं, उसे उसकी कब्र के भीतर घसीटते हुए।

अंतत: उसे डिब्बे का भान होता है, अपनी खुशी की तकसीद करते हुए वह कई बार उसे थपथपाता है, तब एक क्यूब उठाता है और सावधानी से उसे मुंह में रखता है। पहला घूंट लेता है और जीत की मिठास का स्वाद लेता है।

मैंने उसके बेटे की तरह उसी मकान में किराए पर कमरा लिया है। मैंने केवल एक बार बाप-बेटे को मिलते देखा है। जब वह कमरे में आया, बूढ़े की आंखें चमकीं। उसके बूढ़े शरीर में जीवन की एक सांस सुलग गई। उसकी आंखों में मैंने एक कविता दो अभिव्यक्तियों के साथ पढ़ी। एक प्रेम-दो अनुवादों के साथ।

कभी-कभी, आंगन के बीच बने पानी के कुंड के किनारे पर बैठता हूँ और उसके बेटे को जोर-जोर से सोचते हुए सुनता हूँ। वह मेरे लिए अजनबी दुनिया से निकल कर दूसरी दुनिया में प्रवेश करता है, मेरी और अपनी उपस्थिति से अनजान। जब वह दुख में डुबकी लगाता है, असीम आकाश तक उठता है।

वह बीमार और भूखे बच्चों की बात करता है। वह उनके चेहरे से मक्खी भगाता है, काले खून चूसने वालों को नन्हीं आत्माओं का पोषण चुराने के लिए कोसता है। वह भूकंप से हिलता है और दारुण कष्ट के आघात से अपने चेहरों को पटकती, मलबे में अपने बच्चों को खोजती माताओं को सांत्वना देता है। जब बम बरसते हैं, वह बच्चों के दिल की धड़कन सुनता है। और अचानक उसका चेहरा मुस्कान में खिलता है। वह अपने गांव को वसंत में देखता है, जब उन्मत्त ओस मैदान में भोर के समय लाल जंगली फूलों के साथ प्रेम करती है।

वसंत का उल्लास – लाल फूलों की सुगंध के साथ, वर्षा काल में हरे मैदानों में छाया होता है। इंद्रधनुष ठंडी रातों में भूख और दर्द में डूब जाने वाले होते हैं। उसी समय उसका नवजन्म होता है, जबकि वह हर भूकंप तथा हर युद्ध में मरता है।

वह बड़े शहर में भाग रहा है और अपने छोटे शहर में नहीं लौट सकता। वह ब्लैकलिस्टेड है, कानून तोड़ने वाला है। इसीलिए उसके पिता को उससे मिलने यहां आना होता है। बूढ़ा एकाध दिन अपने बेटे के इंतजार में यहां रहता है। और हर बार वह मुझे अपने साथ अपने दर्द की खाई की यात्रा कराता है। बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के मैं एक यंत्रणापूर्ण प्रतीक्षा साझा करता हूँ। इस बार फिर, अपनी पारदर्शी आत्मा के शीशे में मैं उसकी दारुण यंत्रणा की छाया की ओर खिंचा चला आया हूँ।

मेरी यंत्रणा की तरह घड़ी की सुइयां एक-दूसरे का निरंतर पीछा कर रही हैं।

अपने साथ मुझे नीचे ले जाते हुए वह समय की जंग हार रहा है। भयंकर घंटों में हम दोनों हताश प्रतीक्षा करते हैं। जितना वह अपने भाग्य से बचने की कोशिश करता है, उतना ही कठिन मेरे लिए अपने भाग्य से बचना होता जाता है। बूढ़ा अपने बेटे के लिए दुखी है, उसका बेटा दूसरों के लिए, मैं सबको साथ बांधने वाले इस रहस्यमयी दारुण पहेली को समझने की कोशिश करता हूँ।

मैं जानता हूँ, उसका बेटा अब कभी नहीं लौटेगा। वह बहुत नाजुक था, बहुत शुद्ध। और इस कीचड़ में जीवित रहने के लिए बहुत मासूम।

आधी रात बीच चुकी है। हम सबसे ठंडी रात में सबसे भयंकर अंधकार में बेकार इंतजार कर रहे हैं। बूढ़े की आंखें निर्जीव फूलों पर जड़ी हुई गोलियों की ओर घूम जाती हैं।