वरिष्ठ कवि।प्रकाशित कृतियाँ : संदर्भों की आग, ज़िंदा हैं आँखें अभी (दोहा संग्रह), थोड़ा लिखा समझना ज़्यादा (नवगीत संग्रह), हमारे शब्द बोलेंगे (मुक्तक संग्रह)।

एक पर-टूटे परिंदे ने
भरी उड़ान
जिंदा हैं अभी संभावनाएं
चुप्पियों की गांठ को खोला किसी ने
शब्द में स्वर को तनिक घोला किसी ने
किसलिए, कैसे, कहां, क्यों, कौन, कब तक
इन सवालों पर कहीं बोला किसी ने
शांत लहरों से उठी प्रतिरोध की आवाज
जिंदा हैं अभी संभावनाएं
देह में, दिल में, नजर में डर नहीं है
मंजिलें हैं आंख में, अंबर नहीं है
आंधियां हैं, अंधेरे हैं, बारिशें हैं
किंतु मन में फिक्र रत्ती-भर नहीं है
कह रहा है वक्त से मुठभेड़ का अंदाज
जिंदा हैं अभी संभावनाएं
दर्द से दुख से सदा यारी रहेगी
किंतु आंखों में न लाचारी रहेगी
जिंदगी या मौत, हो परिणाम जो भी
यात्रा यह अनवरत जारी रहेगी
वक्ष पर अंजाम के आसीन है आगाज
जिंदा हैं अभी संभावनाएं।

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