(जन्म :1951) आदिवासी कवयित्री तथा एकेडमी ऑफ अमेरिकन पोएट्स की चांसलर तथा ख्यातिप्राप्त एमविस्कोक क्रीक नेशन की सदस्य।उनकी अनेक पुस्तकों ने सराहना अर्जित की है।

याद रखो

याद करो उस आकाश को
जिसके नीचे तुम पैदा हुए हो
जानो हर तारे की कहानी
याद करो चांद को जानो कि वह कौन है
याद करो सूर्योदय को
जिससे पैदा होता है
हर रोज एक नया सवेरा
समय का सबसे मजबूत बिंदु है वह
याद करो सूर्यास्त को
जिससे पैदा होती हैं रातें
याद करो अपने जन्म और उस जननी को
जिसने झेली थी
तुम्हें रूप और सांस देने में असह्य पीड़ा
तुम जीवंत प्रमाण हो उसके प्राणों का
उसकी माँ का और खुद उसका
याद करो अपने पिता को जो हैं तुम्हारे जीवनदाता
उस लाल काली पीली सफेद
भूरी धरती को याद करो
जिसकी त्वचा हो तुम
हम सब धरती हैं
पौधों, पेड़ों, जानवरों के जीवन को याद करो
जिनके पास है सबकुछ
जनजातियों का, उनके परिवारों का इतिहास भी
करो उनसे बातें, सुनो उनकी धड़कनें
वे सब जीवंत कविताएँ हैं
हवा को याद करो सुनो उसकी आवाज
वह जानती है इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य
याद रखो कि सारे लोगों में तुम हो और
तुममें हैं सारे लोग
याद रखो कि तुम ही हो ब्रह्मांड और
यह ब्रह्मांड तुममें है
याद रखो कि सारी चीजें गतिशील हैं
सब बढ़ रही हैं और तुम भी
याद रखो, इससे ही पैदा होती हैं भाषाएँ
याद रखो उस नृत्य को जो भाषा है
वह जीवन है, याद रखो।
अनुवाद :अवधेश प्रसाद सिंह