चंद्रकांत मुड़ासिंह

(1957) ककबरक भाषा के प्रतिष्ठित कवि।सात कवितासंग्रह प्रकाशित।साहित्य अकादेमी के अगरतला स्थित नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर ओरल लिटरेचर के निदेशक।साहित्य अकादेमी का भाषा सम्मान और रवींद्र पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कार प्राप्त।

अनुवाद :अभिजीत भट्टाचार्य

(1971) हिंदी, बांग्ला, असमिया, अंग्रेजी, संस्कृत आदि भाषों के परस्पर अनुवादक।चंद्रकांत मुड़ासिंह की श्रेष्ठ कविताएंसहित अनेक पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित।

कहना चाहता हूँ एक बात

मैं कहना चाहता हूँ एक बात
चाहे उसके बदले सुननी पड़े दस बातें
पर इतनी बातें सुनने के बावजूद
कहना चाहूंगा एक ही बात
मैंने फूल से कही आधी बात
सुनकर हुआ वह
पहले कुछ गंभीर
फिर हुआ बड़ा खुश
सच, फूल जानता है उन्मुक्त हँसी हँसना
पर जब फूल गूंथ गया एक माला में
शेष बातें बाकी रहते-रहते मुरझा गईं
शुष्क बातें सच होने पर भी
लोग सुनना नहीं चाहते
तो फूल की रसीली कहानी से
मैंने शुरू की बातें
पर, इससे
सहसा मेरे श्रोता बड़े क्षुब्ध हुए
अरे! इतनी नाराजगी की क्या बात है?
फिर नाराजगी किस पर?
फूल पर या मुझ पर
इधर-उधर ताकने पर कुछ न मिला
‘पी, ले और पी, यह रही तेरी पूरी बोतल।’
गट-गट कर पी रहा है वह
कर रहा है ढेर सारी बातें।
ढेर सारी बातों की सप्लाई पाने पर भी
सरकार ने रखी नहीं अपनी बात
पर, जब इस अभागे ने माँगा चावल
बढ़ गया राशन में चावल का दाम
क्या वह समझ पाएगा
अगर मैं कहूँ उससे यह सब
मैं केवल एक ही बात कहना चाहता हूँ
आधी बात कही है फूल से
पर, उसके बाद उसका बर्ताव
मुझे भाया नहीं।
अगर आप चाहें तो
कर सकता हूँ बंदूक से बात
यहाँ तक कि
बंदूक के भीतर घुस भी सकता हूँ
फिर बंदूक की नली से निकलकर
लोकगीत के उष्ण सुर में
गुनगुना कर
कहना चाहूँगा मैं एक ही बात।

सरल बातें

मन की बातें गर
सहज तरीके से कह पाता तो अच्छा होता
कह नहीं सकता, चूंकि मैं उड़ रहा हूँ हवा में
पैरों तले मिट्टी के बने हैं पुतले
विचित्र सब रंगों के खेल से जगे हैं प्राण इसके
जो शब्द मिले हैं
उन्हें सरल करके लिखना होता अच्छा
पकड़ता हूँ जब कलम
छूटती है जैसे गोली बंदूक की
बतियाता हूँ जब साथ दोस्त के
अक्सर दिखती है उसकी आड़ी-तिरछी हँसी
कभी गया पास किसी नारी के
सोच-सोचकर वह चेहरा सुंदर
पर कहां है चेहरा
होंठ दबाते आता हूँ लौट
मन की बातें सरल-सहज कर कहूं भी तो कैसे-
सीधी-सादी बेचारी
उसके पैरों तले की खिसक चुकी है जमीन।

चंद्रकांत मुड़ासिंह : निदेशक, नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर ओरल लिटरेचर, नज़रुल कलाक्षेत्र, बनमालीपुर, अगरतला, पश्चिमी त्रिपुरा-799001, मो. 9436554019