
वरिष्ठ कवि। विभिन्न पत्र –पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित पुस्तकालयाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त।

1.
नहीं रह सके अधिक दिन
कागज़ की ज़ेबों में रखे
वादे और विश्वास
तेरे आने और जाने के संदेश
उन्हीं में तो छिपे थे
छोटी-छोटी ज़ेबें
आस और विश्वास से
भरी रहती थीं
पता ही नहीं लगा कब
समय ने काट डाली ज़ेबें
और उड़ा ले गया
तमाम यादें।
2.
वर्णमाला सीखते लिखे गए
टेढ़े-मेढ़े अक्षर
स्लेट और तख्ती से होकर
कागज़ की जेब में ही गए थे
बरसों बाद जब एक दिन
उन अक्षरों से नजर मिली
तो वह खुशी से चहक उठे
लगा जैसे वे
मेरा ही इंतजार कर रहे थे
तभी कागज़ की ज़ेबों के भीतर से
एक आवाज़ आने लगी
अ से अनार
आ से आम।
3.
एक दिन कागज़ पर
मैंने एक नाम लिखा
और फिर
पूरी तरह मिटा दिया
पर कागज़ ने
चुपके से पढ़ लिया वह नाम
और अपनी ज़ेब में
छिपा लिया।
संपर्क : सतकुल, सन्नी साइड, सोलन -173212, हिमाचल प्रदेश मो. 8580449989
