
बेटा बहू घर छोड़ कर जा रहे हैं। गाड़ी पर सामान लादा जा रहा है।
‘क्या यह जरूरी है, बेटा’, मां ने धीरे से बेटे को एक कोने में ले जा कर पूछा।
‘लोग क्या कहेंगे। हमारा घर टूट जाएगा, बेटा, प्लीज।’ पिता जी ने बेटे का हाथ पकड़कर कहा।
बेटा चुपचाप सामान रखे जा रहा था। बहू गाड़ी वाले को बता रही है, ‘यह भी रख लो।’
‘आप लोग समझ ही नहीं पाए कि हमें क्या चाहिए। मेरी पत्नी आप दोनों के साथ नहीं रहना चाहती।’ बेटा बोले जा रहा है।
‘हमने तुम्हें कितने प्यार से पाला है, हम तुम दोनों से तीस साल बड़े हैं, इस उम्र में अकेले कैसे रहेंगें।’ पिता बोल रहे थे।
किसी ने कुछ नहीं सुना, गाड़ी चली गई।
थोड़ी देर सारा घर चुप रहा। अचानक खुली खिड़की से दो चिड़ियां कमरे में घुस आईं।
‘हटाओ इन्हें’, पति चीखा! वह चुप थी।
चिड़िया ने खिड़की पर एक तिनका रखा, दूसरी चिड़िया ने दूसरा तिनका रख दिया। दोनों ने दिन भर में एक छोटा-सा घोंसला बना लिया था।
तब कहा, ‘रहने दो, मन लगा रहेगा। खाली घर कब तक अच्छा लगेगा।’ पत्नी ने आगे धीरे से कहा, ‘चाय पियोगे, लाती हूँ। नए मेहमान आए हैं। चाय बनती है!’
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