पापा को एडमिट हुए एक हफ्ते से ज्यादा हो गए थे, पर किसी का मजाल था कि कोई कुछ बाहर से लेकर खा ले।छोटी बहन बाहर से लेकर कुछ खाने की जिद करती तो दादी झिड़क देतीं- ऊंचे कुल के हैं।नेम-धर्म से रहना पड़ता है …कौनो जाति-कुजाति के हाथ का खाकर अपना धर्म थोड़ी न भ्रष्ट करना है।

वार्ड ब्वाय ने आकर सूचना दी- जल्दी से खून की व्यवस्था करो, मरीज का ऑपरेशन होना है।

अम्मा जान-पहचान वालों से फोन पर गिड़गिड़ाती रहीं।दादी ने भी कई रिश्तेदारों को फोन किया, पर गांव में खून देने के लिए इतनी जल्दी कोई राजी नहीं होता है।प्रयास व्यर्थ हो गए।कई रिश्तेदार रक्तदान वाली बात सुनकर न आने के बहाने ढूंढने लगे।उधर अस्पताल के एक आदमी ने सोशल मीडिया में अपील जारी की तो रक्तदान करने वालों का तांता लग गया।उन्हें वे जानते तक न थे।

आज सुबह से हम लोगों ने कुछ खाया पिया न था।बड़े तो हालात को समझ रहे थे, पर छोटी बहन का रो-रो कर बुरा हाल था।एक महिला काफी देर से बहन का रोना देख रही थी।उन्होंने खाने का अपना टिफिन खोला तो एक रोटी में सब्जी को रोल करके बहन के हाथों में पकड़ा दिया।रोटी हाथ में आते ही उसने रोना छोड़कर जल्दी-जल्दी खाना शुरू कर दिया।

दादी ने उसे इस प्रकार खाते देख कर मां से कहा- जाति-कुजाति कुछ पता है उसका, ऐसे ही मांगकर खिला दिया? पेट मे बड़ी आग लगी थी!

दादी की आदत से मां एकदम आजिज आ चुकी थीं।उन्होंने दांत पीसते हुए उत्तर दिया- अम्मा, पहले जो लोग खून देने के लिए आए हैं, उनकी जाति पूछकर आ जाओ, तब तक मैं रोटी देने वाले की जाति पूछकर आती हूँ।

ग्राम : जलालपुर, पोस्ट : कुरसहा, जिला : बहराइच, उत्तर प्रदेश271821 मो.8118995166