‘‘मम्मी! आज परिधि भाभी बाजार में मिल गई थीं।हम दोनों ने साथ-साथ ही खरीदारी की।आपको पता है, बातचीत के दौरान अधिकांश समय वे सासु मां को ही याद करती रहीं।उनकी बातों से ऐसा लगा कि वे उनके बगैर गिन-गिन कर एक-एक दिन निकाल रही हैं।जाते-जाते तो उन्होंने यहां तक कह दिया- ‘अभी सासु मां को आने में पूरा एक महीना बाकी है।न जाने यह महीना केसे कटेगा।’ क्या किस्मत पाई है आंटी ने जो उन्हें इतना प्यार करने वाली बहू मिली है, वरना आजकल तो…काश! मेरी होने वाली भाभी भी ऐसी ही हों।’’

रीना अपना बखान आगे जारी रखती, इससे पहले ही ममता ने उसकी बातों को विराम देते हुए कहा- ‘मुझे मालूम है रीना! जाने से पहले परिधि की सासु मां मुझसे मिल कर गई थी। कह रही थी – दो महीने के लिए बेटी के यहां जा रही हूँ।मैंने पूछा, वहां कोई विशेष काम है क्या? इस पर वे बोलीं- काम तो कुछ नहीं, बस थोड़ा आराम करने के लिए!’

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